लखनऊ में फूलों के राजा की महक

लखनऊ

 07-03-2018 11:25 AM
शारीरिक

गुलाब को फूलों का राजा कहा गया है। ये दिखने में तो सुन्दर है ही साथ ही इसकी मदहोश कर देने वाली खुशबू और इसके फूलों का विभिन्न तरीकों से किया जाने वाला इस्तेमाल इस फूल को दिए गए राजा के दर्जे को सही साबित करता है।

गुलाब पादप जगत का पुष्प विभाग और रोसालेस (Rosales) गण का पुष्प है जिसके वंश का नाम रोसा (Rosa) है। 100 से भी अधिक जाती वाला यह एक बहुवर्षीय, झाड़ीदार, कंटीला पुष्पीय पौधा है और अधिकांश एशियाई मूल का है। ज्यादातर गुलाब लाल रंग का होता है लेकिन सफ़ेद, पीला, गुलाबी आदि रंग का भी मिलता है तथा वर्ण-संकर से और भी कई रंग के गुलाब मिलने लगे हैं। गुलाब की विशेषता जैसे ऊपर बयां की गयी है कि वह बहुत से तरीके से इस्तेमाल किया जाता है जैसे खाने में खुशबू के तौर पर तथा कपडों पर इत्र के तौर पर, बालों को शुशोभित करने के लिए एवं हार आदि बनाने के लिए। भारत में सबसे पहले गुलाब का प्रमाण चरक संहिता में मिलता है जिसमें उन्होंने गुलाब आसवन की प्रक्रिया बताई है। मुग़लों के ज़माने से गुलाबों का वर्ण-संकर कर उनकी नयी प्रजातियाँ बनाकर विविध स्पर्धाओं में नए नाम के साथ पेश करना यह आज भी बड़ी मात्रा में किया जाता है।

गुलाब की शारीरिक रचना साधारण पुष्पीय पौधों की तरह ही होती है; फूल, पत्ते, ताना और जड़। उसके फूल का यदि पार्श्व अनुभाग लिया जाए तो आप उसके भागों को ठीक से जान सकते हैं। पंखुड़ी को आधार देती हुई पुश्प्कोश की पत्ती तथा फूल के मध्यभाग में पराग सहित पुंकेसर से घिरा हुआ बीजांड रहता है जिससे एक डंडा निकलता है तथा इसकी नोक पर कुक्षि होती है जो कीटक के पैर से लाये पराग कण को पकड़ती है और प्रजनन में साह्य करती है।

लखनऊ और गुलाब का रिश्ता काफी महत्वपूर्ण और पुराना है। लखनऊ के नवाबी खाने में और इत्र के तौर पर इसका इस्तेमाल होता आ रहा है। लखनऊ के राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान ने गुलाब के विभिन्न प्रकारों और उनसे मिलने वाले इत्र पर नए शोध किए हैं। गुलाब की खेती को यहाँ पर बढ़ावा मिलता है क्यूंकि यह बहुत किफ़ायती होती है।

1. लाइफ नेचर लाइब्रेरी- द प्लांट्स
2. रिफ्रेशर कोर्स इन बॉटनी: सी. एल. साव्हने
3. हैंडबुक ऑफ़ बोटैनिकल डायग्रामस: ब्लोद्वेन लोय्ड
4. https://hi.wikipedia.org/wiki/गुलाब



RECENT POST

  • हम लखनऊ वासियों को समझनी होगी प्रदूषण, अतिक्रमण से पीड़ित जल निकायों व नदियों की पीड़ा
    नदियाँ

     25-05-2022 08:16 AM


  • लखनऊ के हरित आवरण हेतु, स्थानीय स्वदेशी वृक्ष ही पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे उपयुक्त
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:37 AM


  • स्वास्थ्य सेवा व् प्रौद्योगिकी में माइक्रोचिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग, क्या भारत बनेगा निर्माण केंद्र?
    खनिज

     23-05-2022 08:50 AM


  • सेलफिश की गति मछलियों में दर्ज की गई उच्चतम गति है
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:40 PM


  • बच्चों को खेल खेल में, दैनिक जीवन में गणित के महत्व को समझाने की जरूरत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:09 AM


  • भारत में जैविक कृषि आंदोलन व सिद्धांत का विकास, ब्रिटिश कृषि वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉवर्ड द्वारा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:03 AM


  • लखनऊ की वृद्धि के साथ हम निवासियों को नहीं भूलना है सकारात्मक पर्यावरणीय व्यवहार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:47 AM


  • एक समय जब रेल सफर का मतलब था मिट्टी की सुगंध से भरी कुल्हड़ की स्वादिष्ट चाय
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:47 AM


  • उत्तर प्रदेश में बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:52 AM


  • देववाणी संस्कृत को आज भारत में एक से भी कम प्रतिशत आबादी बोल व् समझ सकती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:08 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id