भारत और द्वितीय विश्वयुद्ध

लखनऊ

 07-04-2018 01:45 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

भारतीय इतिहास गवाह है उस विशाल युद्ध का जिसने दुनिया का रुख बदल दिया । सन 1939 में द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ हो गया था , और उस दौरान भारत पर अंग्रेजों का शासन था। ब्रिटिश सरकार अक्ष शक्तियों के खिलाफ थी। अक्ष शक्तियों में वो देश आते थे जो तानाशाही के अंतर्गत प्रगतिशील थे , अक्ष शक्तियों का जो प्रमुख देश था वह जर्मनी था और यह देश तानाशाह अडोल्फ़ हिटलर के अंतर्गत कार्यरत था । कुछ अन्य देश जो अक्ष शक्तियों के भागीदार थे, वे हैं- इटली और जापान । सुभाषचंद्र बोस ने जर्मनी और जापान की मदद करने की सोची , उनके द्वारा उनका यह कदम भारत में ब्रिटिश राज को खत्म करने में योग्य होगा। उन्होंने अडोल्फ़ हिटलर से मुलाकात कर आजाद हिन्द फौज के लिए एक नए नक़्शे और योजना का आरंभ किया । ब्रिटिश सरकार , संयुक्त राज्य अमेरिका , चीन और सोवियत संघ मित्रपक्ष शक्तियाँ थीं और इनका मकसद अक्ष शक्तियों को रोकना था । विश्व युद्ध में भारतीय शहरों का भी अहम योगदान है , इन शहरों में फ़ौज तैयार हुए और उन फौजों ने सेना का बल मज़बूत किया। पहले विश्वयुद्ध के कुछ वर्ष पहले लखनऊ में ब्रिटिश फ़ौज और सरकार द्वारा ब्रिगेड बनाए गए। यह भाग (division) इसीलिए हुए ताकि आतंरिक सुरक्षा में रुकावट नहीं आए । ऐसे भागों के नाम हैं-

-1- आठवा (लखनऊ) कैवेलरी ब्रिगेड
-2- बाइसवीं (लखनऊ) ब्रिगेड
-3- फैजाबाद ब्रिगेड
-4- इलाहबाद ब्रिगेड
-5- प्रेसीडेंसी ब्रिगेड

भारत पर इस युद्ध का प्रभाव - विश्वयुद्ध के आरंभ होने के कुछ महीने बाद ही अंग्रेजों ने हिन्दुस्तानी फ़ौज जुटाना शुरू कर दिया था , देश के अनेक शहर और गाँव में सेना में भरती होने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी थी। अंग्रेज़ अफ़सर और कुछ अंग्रेज़ सैनिक इसका प्रचार किया करते थे, वे सेना में रहने की सुख-सुविधाओं की बातें बताया करते थें । भारत के कई शहरों में यह प्रतिक्रिया कुछ रंग नहीं दिखला पाई और इसके कारण अंग्रेजों ने जबरदस्ती युवकों को सेना में भरती करना शुरू कर दिया । इससे भारत के कई शहर प्रभावित हुए। खाने और पीने की मांग दुगनी हो गई, और युद्ध ने भारतीय अर्थव्यवस्था को खोखला कर दिया जिसका सीधा परिणाम भारतीय विकास पर हुआ।

1943 की बंगाल में भुखमरी और सूखा (Great Bengal Famine)- 1943 में सदी का सबसे भयानक आकाल पड़ा था। इस आकाल के दौरान 30 लाख लोगों ने भुखमरी के कारण जान गवा दी। आकाल का कारण था अनाज घट जाना। विश्वयुद्ध के समय सैनिकों के खाने के लिए ज्यादा मात्रा में चावल उगाया जा रहा था और सारा अनाज ग्रेट ब्रिटेन भेजा जा रहा था। इस कारण कई जगहों पर फ़सलें ख़राब हो गई और अनाज काफ़ी कम हो गया , इससे भयंकर गरीबी आई और 25 से 30 लाख लोग खाने के लिए तड़प उठे। जब हालात बद से बत्तर हुए तब ब्रिटेन से खाने की मांग की गई और वह मांग हर बार ठुकरा दी गई , उन दिनों ब्रिटेन के प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल (Winston Churchill) थे। और इसी लापरवाही के कारण 30 लाख लोग मौत के मुँह में समा गए, आकाल केवल खाने को लेकर नहीं पड़ा बल्कि कपड़े के लिए भी लोग तरस गए थे।

1. www.mapsofindia.com/my-india/history/india-role-in-world-war-2
2. व. मत्सुलेंको द्वारा लिखी किताब - दूसरा विश्वयुद्ध



RECENT POST

  • क्या है जमीनी स्तर या खराब ओजोन और यह कैसे मानव स्वस्थ्य को प्रभावित करती है
    जलवायु व ऋतु

     17-09-2021 09:44 AM


  • समुद्र की लवणता में एक छोटा सा परिवर्तन जलवायु और जल चक्र को काफी प्रभावित कर सकता है
    समुद्र

     16-09-2021 10:07 AM


  • एरोपोनिक सिस्टम से हवा में हो रही है खेती
    साग-सब्जियाँ

     15-09-2021 10:14 AM


  • सतत विकास लक्ष्यों की पूर्ती के लिए आवश्यक हैं कृषि सिंचाई परियोजनाएं
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     14-09-2021 10:22 AM


  • विभिन्न संस्कृतियों में प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण हैं हंस और कलहंस
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)पंछीयाँ

     13-09-2021 06:53 AM


  • भारत में मुगलों द्वारा लायी गयी ग्लास ब्लोइंग की आधुनिक तकनीक
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-09-2021 12:34 PM


  • वजन घटाने और गंभीर बीमारियों से छुटकारा दिला सकता है वीगनिस्म
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     11-09-2021 09:04 AM


  • गणेश चतुर्थी महोत्सव का महत्व व लखनऊ में इस त्यौहार की रौनक
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     10-09-2021 12:00 PM


  • खर्चीली किंतु मुनाफे की है मगरमच्छ की खेती
    रेंगने वाले जीव

     09-09-2021 06:30 AM


  • अन्य राज्यों की तुलना में उत्तर प्रदेश की साक्षरता दर में क्यों है इतना भारी अंतर
    ध्वनि 2- भाषायेंद्रिश्य 2- अभिनय कला

     08-09-2021 01:25 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id