अवधी- लखनऊ की भाषा

लखनऊ

 19-04-2018 12:42 PM
ध्वनि 2- भाषायें

उत्तर प्रदेश में अवधी भाषा बोलने वाले 3 लाख व्यक्ति हैं, यह भाषा नेपाल में भी बोली जाती है। लखनऊ शहर में उर्दू और हिंदी भाषा बोली जाती है, अवधी भाषा हिंदी से काफ़ी अलग है और शिक्षा के क्षेत्र में छात्रों को हिंदी या उर्दू भाषाएँ सिखाई जाती है। लखनऊ के कई विद्यालय और कॉलेज में हिंदी या उर्दू में ही पढ़ाई होती है लेकिन क्षेत्रीय स्तर पर अवधी भाषा में ही पढाई होनी चाहिए, इससे छात्रों को एक भाषा समझने में सुविधा होगी और अवधी का महत्त्व बढ़ जाएगा। भारत में एक कहावत है – ‘कोस-कोस पर बदले पानी, चार कोस पर बाणी’। इसका अर्थ यह है कि - भारत में भाषा हर कुछ किलोमीटर पर उसी तरह बदलती है जिस तरह पानी का स्वाद बदलता है। अधिकारिक रूप से भारत में 22 भाषाएँ बोली जाती हैं और इनमें 720 बोलियाँ हैं। 2011 की जनगणना से यह पाया गया कि भारत में 122 बड़ी भाषाएँ हैं और ज्यादातर व्यक्ति इनका इस्तेमाल करते हैं। भारत में राज्य स्तर पर जो भाषाएँ बोली जाती हैं वह यह हैं -

* हिंदी
* तेलुगु
* कन्नड़
* मराठी
* पंजाबी
* उर्दू
* संस्कृत
* गुजराती
* बंगाली
* सिन्धी
* संथाली
* ओड़िया
* नेपाली
* मणिपुरी
* मैथिली
* कोंकणी
* डोगरी
* बोड़ो
* मलयालम
* असामी

कुछ भाषाएँ ऐसी भी हैं जिन्हें अलग महत्व नहीं दिया गया है जैसे- भोजपुरी, पाली, प्राकृत, बंजारा, लदाखी, गोंडी, हो, आदि। यह सभी भाषाएँ सिक्किम, बिहार, मध्य प्रदेश और मणिपुर की हैं, इससे यह पता लगता है कि भारत में 1000 से भी ज्यादा बोलियाँ बोली जाती हैं।

क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाने के फ़ायदे-
भारत के कुछ राज्यों में जो भाषाएँ बोली जाती हैं उन्हें भाषाओँ के बदले बोली (Dialect) कहा जाता है और इससे लोगों में भाषा को स्वीकार करने को लेकर काफ़ी उलझन होता है। हिंदी को अनुदेश का माध्यम चुना गया था और इस कारण कुछ राज्य जैसे छत्तीसगढ़ और उत्तर-प्रदेश में भाषा को शिक्षा के स्तर पर लेकर उलझन थी, क्षेत्रीय लोगों के समक्ष यह उलझन थी कि पढाई हिंदी में होगी या क्षेत्रीय भाषा में। अगर अनुदेश का माध्यम हर राज्य में हिंदी हो जाएगा तब उस राज्य की क्षेत्रीय भाषा की आभा ख़त्म हो जाएगी और उस भाषा को बोलने वाले लोग कम हो जाएँगे। इस दुविधा से बचने के लिए राज्यों में क्षेत्रीय भाषा का उपयोग करना चाहिए (जैसे- अवधी, छत्तीसगढ़ी, आदि); ऐसा करने से वक्ताओं के बीच विद्रोह भी नहीं होगा और भाषा की आभा भी सुरक्षित रहेगी।

1. www.thehindu.com/thread/arts-culture-society/india-a-land-of-many-tongues/article19445187.ece
2. www.livemint.com/opinion/aSPk19Phjudbncuz/The-relevance-of-regional-language-in-teaching.html



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