दर्शन और नैतिकता को लेकर पूरब और पश्चिम के बीच अंतर

लखनऊ

 10-05-2018 12:29 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

आज भारत की आबादी के 12 प्रतिशत लोग अंग्रेजी भाषा समझ और बोल पाते हैं। बड़े-बड़े महानगर जैसे कि लखनऊ, मुंबई, कोलकाता आदि में अंग्रेजी बोलने वाले लोगों की तादाद काफ़ी ज़्यादा है। भारत के अंग्रेजी हुकूमत द्वारा उपनिवेश होने से अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भारत में तेज़ी से होने लगा, आज लोग अंग्रेजी भाषा को अभिजात वर्ग में मानते हैं। इस भाषा का कहर इतना ज़्यादा है कि जो लोग केवल हिंदी बोलना जानते हैं वे भी अंग्रेजी के दो शब्द बोल देते हैं; आजकल अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल करना ट्रेंडी हो गया है। इन्होंने अपनी ही एक भाषा का इज़ात कर दिया है जिसे हिंगलिश (Hinglish) कहते हैं, हिंगलिश में लोग अक्सर हिंदी बोलते हुए अंग्रेजी भाषा का प्रयोग करते हैं। लोगों द्वारा अंग्रेजी भाषा का इस्तेमाल करने के पीछे एक सिद्धांत छुपा है- हिंदी अंग्रेजी को अपने में समाहित कर लेती है और बोलने समझने में किसी प्रकार का कष्ट नहीं देती, जैसे कि कई स्थान पर लोग कहते हैं ‘टेंशन मत लो’ आदि।

किसी सभ्यता के बारे में संचयी रूप से समझना हमारे पूर्वजों द्वारा हमें मिला है और हम उसी भाषा का इस्तेमाल करते हैं जिसका हमारे पूर्वज इस्तेमाल किया करते थे। संचयी रूप से किसी विषय को समझने को ''फिलोसोफी (Philosophy)'' कहते हैं, यह एक अंग्रजी शब्द है और इसकी जड़ें ग्रीक भाषा तक जाती हैं इसी कारण इस शब्द का हिंदी में कोई ठोस अनुवाद नहीं है। दूसरा महत्वपूर्ण शब्द है ''एथिक्स (Ethics)'', यह भी अंग्रेजी भाषा का ही एक शब्द है और इसे हिंदी में नैतिकता कहते हैं। ग्रीक भाषा में फिलोसोफी का अर्थ फिलोसोफिया (Filosofia) है और इसे हिंदी में दर्शन कहते हैं; वहीं एथिक्स को ग्रीक में इथिकी (Ithiki) कहते हैं जिसका अर्थ हिंदी में नैतिकता है। फिलोसोफी का मतलब होता है बुद्धि का प्यार। यह शब्द ग्रीक भाषा के 2 शब्दों से बना है, फिलो (Philo), मतलब प्यार और सोफोस (Sophos), मतलब बुद्धि। फिलोसोफी हमें शिक्षा का अर्थ और स्रोत समझने में मदद करता है, यह एक चाबी है जिससे हम जीवन के अनेक राज़ को दार्शनिक की नज़रों से देख सकते हैं। छोटा से छोटा प्रश्न जैसे 'शिक्षा क्या है ?' किसी भी दो व्यक्तियों के बीच बहस शुरू करवा सकता है। बहुत से ऐसे सवाल हैं जिससे कि मुद्दा काफ़ी बढ़ जाता है जैसे अगर कोई पूछे कि 'अगर नाबालिक अपराध करे तो क्या वह बहुत बड़ा अपराध होगा?', अलग लोग अपने तरीकों में इस सवाल का उत्तर देते हैं और अंत में यह सवाल उत्पन्न होता है कि 'नाबालिक के बचपन और भविष्य का क्या होगा?' और अगर इन्हें सज़ा नहीं दिया गया तो समाज में लोग अपराध करने से नहीं डरेंगे। एक छोटा से छोटा प्रश्न बहुत बड़े-बड़े मुद्दों को जन्म दे देता है और इसे ही फिलोसोफी कहते हैं। अगर फिलोसोफी को शिक्षा की नज़रों से देखें तो हम खुद से ही सवाल करने लगते हैं जैसे - हम क्या पढ़ रहे हैं?, हम कैसा पढ़ा रहे हैं?, हम किसे पढ़ा रहे हैं? और हमारे समझने की प्रकृति कैसी है?, ऐसे ढेरों सवाल हमारे मन में उत्पन्न होने लगते हैं। फिलोसोफी एक सिद्धांत है जो हमें जीवन के अनुभवों से सीख लेकर जीवन जीना सिखाता है। फिलोसोफी की कई शाखाएँ हैं लेकिन 3 शाखाएँ अहम् हैं और हर शाखा पढ़ाई को समझने के अलग तरीकों पर गौर करती है।

यह शाखाएँ हैं –

  • मेटाफिजिक्स (Metaphysics)
  • एपिस्टेमोलॉजी (Epistemology)
कुछ उप शाखाएँ यह हैं –
  • ओंटोलॉजी (Ontology)
  • कोस्मोलॉजी (Cosmology)

अब आते हैं एथिक्स या नैतिकता पर, एथिक्स शब्द ग्रीक शब्द 'एथिकोस' से बना है । यह फिलोसोफी के आधार पर अच्छाई और बुराई के बीच अंतर बताता है। यह वह जीवन जीने का तरीका बताता है जिससे कि समाज किसी भी व्यक्ति को अपना मान लेगा। प्लेटो को पश्चिमी फिलोसोफिकल सिस्टम का पिता माना गया, भगवद गीता और तिरुक्कुरल भारत के सबसे पुराने तत्त्वमीमांसा हैं और यह इंसानियत के एक आचार संहिता हैं। सभी पुराने ग्रंथो में कई बातें लिखी गई हैं ताकि लोग अच्छी बातों का समाज में इस्तेमाल करें, लोग बुरा कार्य करने से पहले सोचें ; ग्रंथों में कर्म की बात लिखी गई है, और यह लोगों को यह सीख देता है कि लोग जिसके साथ जैसा व्यवहार करेंगे उसे वैसा ही वापिस मिलेगा। हमें नैतिकता समाज में अच्छे-अच्छे भावों को रखने के लिए बढ़ावा देती है। फिलोसोफी के अंतर के बारे में लिखने वाले कई लेखक थे लेकिन बिमल कृष्ण मतिलाल एक ऐसे लेखक थे जिन्होंने फिलोसफी के प्रकार को एक अलग ढंग से लिखकर पेश किया।

1. https://oregonstate.edu/instruct/ed416/PP1.html

2. https://www.hindu.com/books/indian-epics-vs-western-philosophies/articles3764566.ece

3. https://en.wikipedia.org/wiki/Bimal_Krishna_Matilal



RECENT POST

  • लखनऊ की ऐतिहासिक धरोहर, नूर बख्श की कोठी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-12-2018 01:43 PM


  • अचार का चटपटा इतिहास
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     14-12-2018 02:10 PM


  • 80 और 90 के दशक का लोकप्रिय संचार माध्‍यम ‘पेजर’
    संचार एवं संचार यन्त्र

     13-12-2018 12:29 PM


  • स्लीपर कोशिकाओं के कारण अप्रभावी हो रहे हैं जीवाणुनाशक
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     12-12-2018 12:13 PM


  • लखनऊ और प्राचीन यूनानी चिकित्सा प्रणाली
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     11-12-2018 11:51 AM


  • इस जादुई कुकुरमुत्ते से हो सकता है नशा
    फंफूद, कुकुरमुत्ता

     10-12-2018 12:47 PM


  • महाकाव्य रामायण की एक किरदार, अहिल्या
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-12-2018 10:00 AM


  • लज्जत-ए-लखनऊ - पौराणिक मक्खन मलाई का एक कटोरा
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     08-12-2018 12:04 PM


  • नेत्रों की एक विचित्र बीमारी, वर्णांधता
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     07-12-2018 12:00 PM


  • पान का इतिहास है जुड़ा वियतनाम से
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     06-12-2018 01:30 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.