लखनऊ का नवाबी हास्य

लखनऊ

 13-05-2018 12:23 PM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

linkलखनऊ में हर चीज अलग और बदली-बदली सी लगती है। यहाँ का हास्य बिना शेर-ओ-शायरी के तो निकल ही नहीं सकता। अमा जब तक एक बीड़ा पान मुँह में घुल नहीं जाता तब तक यहाँ के हास्य का रस तो निकलता ही नहीं है। हास्य मानव जीवन का अभिन्न अंग है और भाषा इसकी मोती। बिना भाषा के हास्य का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता है। लखनऊ अवध के क्षेत्र में आता है जिस कारण यहाँ की मूल भाषा अवधी है परन्तु यहाँ की भाषा में अवधी और उर्दू का जो संगम हुआ है उससे एक अलग ही सुंदर भाषा का जन्म हुआ है जिसे लखनवी भी कहा जा सकता है।

एहसास उनको क्या हो। शामे अवध की जन्नत..!
देखा नहीं जिन्होंने। बाज़ार लखनऊ का..!!

आज भी लखनऊ में हास्य में नवाबियत दिखाई दे जाती है पहले 'आप' की परंपरा लोगों में एक अलग ही फन का आगाज़ करती है। लखनऊ की इसी नवाबी भाषा का प्रयोग यदि लड़ाई करते हुए भी किया जाये तो वह कैसे होगा? देखें नीचे दिए गए वीडियो में कैसे भाषा का प्रयोग कर हास्य को पैदा किया गया है -


प्राचीन भारत में विभिन्न राजदरबारों में राज कवी, हास्य कवी या हँसाने वाला व्यक्ति होता था जिसका काम ही होता था लोगों को हँसाना और वाक् पटुता का परिचय देना। लखनऊ में भी इस परंपरा का प्रचालन हुआ करता था। लखनऊ में भाषायिक हास्य का भी अपना एक स्थान है जैसे बरेलवी भाषा को यहाँ कहा जाता है कि यह सही नहीं है तथा कर्कश है। रामपुर के बारे में यहाँ का मजाक कुछ यूँ है कि वहां के लोग बात-बात पर रामपुरी चक्कू निकाल लेते हैं। तो आइये इस विडियो में देखते हैं कैसे इस टैक्सी ड्राईवर ने हास्य एवं कविता का प्रयोग कर इस भावना को स्पस्ट किया-


अवध पंच में मुशीरुल हसन ने लखनऊ के हास्य के बारे में बेहतरीन प्रस्तुति दी है। हास्य भारत में समान नहीं होता, इसके कई रूप व प्रकार होते हैं। जैसे कानपुरी मजाक कुछ और है और बरेलवी कुछ और तो लखनवी कुछ और यही असमानता यहाँ पर भाषायिक महत्ता को दर्शाती है। हास्य मानव शरीर के लिए उतना ही जरूरी होता है जितना की हवा और जल। यह मानव को दुखों से निजात पाने की प्रेरणा देता है। तथा अपनी बात बिना हिचक के रखने की छूट भी प्रदान करता है।

1.https://www.huffingtonpost.com.au/2017/07/19/there-are-nine-different-types-of-humour-which-one-are-you_a_23036626/
2.http://www.thehindu.com/opinion/columns/no-humour-please-we-are-indian/article19286300.ece
3.http://www.wfgyan.in/2015/12/blog-post_87.html
4.https://www.youtube.com/watch?v=MB6eOfb8uDQ



RECENT POST

  • वाहनों की गति को मापता रडार स्पीड गन
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     21-10-2019 12:01 PM


  • तेज़ी से बढती मोबाइल उपयोगकर्ताओं की वैश्विक दर
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     20-10-2019 10:00 AM


  • क्या है वर्तमान भारत में बाघों की स्थिति?
    स्तनधारी

     19-10-2019 11:51 AM


  • खोज के युग से ही हुआ था मानव सभ्यता का विकास
    समुद्र

     18-10-2019 10:59 AM


  • बड़े और छोटे इमामबाड़े के अलावा भी है लखनऊ में एक और प्राचीन इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     17-10-2019 10:49 AM


  • भोजन का अधिकार है हर व्यक्ति का बुनियादी अधिकार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     16-10-2019 12:34 PM


  • दुर्गा पूजा में पेश किया जाने वाला पारंपरिक भोग
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-10-2019 12:33 PM


  • भारतीय प्राचीन लिपियों में से एक है ब्रह्मी लिपि
    ध्वनि 2- भाषायें

     14-10-2019 02:40 PM


  • कैसे एक डाकू से महर्षि वाल्मीकि बने रत्नाकर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     13-10-2019 10:00 AM


  • उत्तर प्रदेश की आखिरी मीटर गेज रेलवे लाइन
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     12-10-2019 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.