ताम्बे के केबल में इंसुलेशन के लिए गुट्टा-पर्चा का उपयोग

लखनऊ

 14-05-2018 03:16 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

1847 में वर्नर वोन सीमेंस (Werner Von Siemens) ने सूचक टेलीग्राफ (pointer telegraph) बनाने के उद्देश्य से सीमेंस कंपनी की नींव रखी थी। कुछ ही सालों के भीतर, बर्लिन में ‘टेलीग्राफेन-बौआनस्टाल्ट वोन सीमेंस एंड हल्सके’ के रूप में स्थापित शिल्पकार की कार्यशाला एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय निगम में विकसित हुई। वार्नर वोन सीमेंस ने वीटस्टोन टेलीग्राफ में सुधार करने के लिए कई तरकीबें सोची। उन्होंने साधारण वस्तुओं का इस्तेमाल किया जैसे -

सिगार के डब्बे, लोहे के टुकड़े, रोधक ताम्बे के तार और टिनप्लेट - इन सभी चीज़ों का इस्तेमाल कर उन्होंने अपना खुद का सूचक टेलीग्राफ बनाया। कुछ समय बाद उसी वर्ष में, वार्नर वोन सीमेंस ने एक गुट्टा पर्चा प्रेस विकसित किया जिससे ताम्बे के तार के लिए निर्बाध इंसुलेशन (Insulation) बनाना संभव हो सका। इसने और सूचक टेलीग्राफ ने आधुनिक दूरसंचार के पथ पर दो महत्वपूर्ण प्रगति को चिह्नित किया। दिए गए चित्र में बाईं ओर गुट्टा पर्चा के पौधे को दिखाया गया है और दाईं ओर वार्नर वोन सीमंस का एक रंगा हुआ चित्र। आज, सीमेंस एक घरेलु नाम है। यह कंपनी घरेलु उत्पाद और अस्पताल में इस्तेमाल की जाने वाली मशीनें बनाती है, इन उत्पादों का इस्तेमाल लखनऊ में भी किया जा रहा है। यह कंपनी एक 'इलेक्ट्रिक पावर' समाधान कंपनी के रूप में काफ़ी प्रसिद्ध है। यह कंपनी ताम्बे के तार के उत्पाद के लिए गुट्टा-पर्चा का इस्तेमाल करती है, अब सवाल यह उठता है कि आखिर यह गुट्टा-पर्चा क्या चीज़ है?

गुट्टा-पर्चा पेड़ की एक प्रजाति है। गुट्टा-पर्चा शब्द मलय (Malay) भाषा से आया है और मलय भाषा में पौधों को गेताह परका कहते हैं। गुट्टा के पेड़ 5 से 30 मीटर ऊँचे और 1 मीटर चौड़े होते हैं। इसकी पत्तियां सदाबहार होती हैं। रासायनिक रूप से गुट्टा-पर्चा एक पॉलीमर (Polymer) है। यह बिजली का एक अच्छा इंसुलेटर है और इसीलिए इसका बिलजी के उपकरणों में इस्तेमाल किया जाता है। 1845 तक, UK में गुट्टा-पर्चा के साथ इन्सुलेट किये गए टेलीग्राफ तारों का निर्माण किया जा रहा था। यह शुरुआत में टेलीग्राफ केबल्स के लिए इंसुलेटिंग सामग्री के रूप में कार्य करता था, जिसमें पहला ट्रान्साटलांटिक टेलीग्राफ केबल भी शामिल था।

आधुनिक संचार में जो उत्पाद इस्तेमाल किये जाते हैं वे मलेशिया के पेड़ों के उत्पाद होते हैं, यह पेड़ UK और जर्मनी में भी नहीं उगते। यह साफ़ रूप से यह कह सकते हैं कि यह उपनिवेशीकरण का वैश्वीकरण प्रभाव है।

1.https://www.siemens.com/history/en/history/1847_1865_beginnings_and_initial_expansion.html
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Gutta-percha



RECENT POST

  • क्या मिक्सर ग्राइंडर से बेहतर है भारत भर में प्रचलित सिलबट्टा
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:32 PM


  • वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है, लखनऊ की तारे वाली कोठी शाही वेधशाला
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:56 AM


  • अग्नि और सूर्य देवता को समर्पित है, लोहड़ी का उत्सव
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:15 PM


  • क्या है आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से वजन बढ़ने का कारण?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-01-2021 12:15 PM


  • अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए उत्तरदायी भारतीय रिजर्व बैंक
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     12-01-2021 11:40 AM


  • लॉकडाउन में बड़ी अंत:कक्ष खेलों की लोकप्रियता
    हथियार व खिलौने

     11-01-2021 10:53 AM


  • अति प्राचीन और स्वर्ग से आया प्रतीत होता है, जॉर्जिया का बहु-ध्वनिक लोक गायन
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     10-01-2021 03:04 AM


  • क्या है इंटरनेट की अंधेरी दुनिया और क्यों है हमें इससे खतरा?
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     09-01-2021 01:22 AM


  • जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करती है फोटोग्राफी
    द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

     08-01-2021 02:28 AM


  • सोने चांदी से बने भारतीय आभूषणों की कला का संक्षिप्त इतिहास
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     07-01-2021 02:26 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id