बड़ा इमामबाड़ा की वास्तुकला है बड़ी अनोखी

लखनऊ

 30-07-2018 03:01 PM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

नवाबों के शहर लखनऊ ने अपने शानदार बगीचों, सांस्‍कृतिक धरोहरों और अद्वितीय पुरातात्विक स्मारकों के माध्‍यम से अपना आकर्षण बनाए रखा है। इसकी ऐतिहासिक इमारतों में से एक अद्भुत वास्तुकला वाली इमारत 'बड़ा इमामबाड़ा' है।

बड़ा इमामबाड़ा का निर्माण अवध के नवाब असफ-उद-दौला द्वारा 1784 में कराया गया। इसको असफी इमाम्बारा भी कहा जाता है। 1784 के दौरान अवध प्रान्त में लोग भुखमरी से मर रहे थे, स्थिति इतनी गंभीर हो गयी थी कि न केवल आम आदमी, बल्कि अमीर लोगों के पास भी कुछ खाने के लिये नहीं था। तभी असफ-उद-दौला ने स्थिति को सुधारने तथा लोगों को रोजगार देने के लिए बड़ा इमामबाड़ा की इमारत का निर्माण प्रारंभ करवाया। इसका निर्माण 1791 में पूरा हुआ तथा इसके निर्माण की अनुमानित लागत पाँच से दस लाख रुपए के मध्‍य थी। यही नहीं, इस इमारत के पूरा होने के बाद भी नवाब इसकी साज सज्जा पर हर वर्ष भारी रकम खर्च करते थे। शायद इसी कारण इनके विषय में कहा जाता था कि "जिसे न दे मौला उसे दे आसफूउद्दौला"।

इस इमामबाड़े में एक अस़फी मस्जिद है, मस्जिद परिसर के आंगन में दो ऊंची मीनारें हैं, इसमें विश्व-प्रसिद्ध भूलभुलैया बनी है, जो अनजान लोगों को मस्जिद में प्रवेश करने से रोकती है, और इसमें एक गहरा कुँआ भी बनाया गया है। ऐसा कहा जाता है कि छत तक पहुंचने के 1024 रास्ते हैं, लेकिन वापस आने का एक ही रास्ता है।

यहां पर खूबसूरत झरोखा खिड़कियां दीवार की सतह से थोड़ी बाहर की ओर निकली हुई हैं, जिनसे गोमती नदि व उसके आगे शहर के नज़ारे मिलते हैं। इनका निर्माण दीवारों के सौंदर्य को बढ़ाने के साथ ही उस दौरान की महिलाओं को बिना घर से बाहर निकले शहर का नज़ारा दिखाने के लिए किया गया था। यह खिड़कियां तीरंदाजों और जासूसों को युद्ध के समय छुपने के लिये एक सुरक्षित स्‍थान भी प्रदान करती थीं। चमत्कार की बात यह है कि मेहराबदार झरोखे और दरवाजे बड़ा इमामबाड़ा का पूरा वजन उठाते हैं। इतनी विशाल इमारत कोई स्तम्भ या शहतीर के बल पर नहीं खड़ी है।

संदर्भ:
1
.https://www.thehindu.com/features/metroplus/exploring-the-mysteries-of-bara-imambara-in-lucknow/article7309728.ece
2.https://thrillingtravel.in/2017/11/bhool-bhulaiya-bara-imambara-lucknow.html
3.अंग्रेज़ी रिपोर्ट: Bajpai, Usha and Gupta, Sachin. Use of Solar Passive Concepts in the Avadh Architectural Buildings and their Modified Impact. Indian Journal of History of Science, 50.1 (2015) [https://insa.nic.in/writereaddata/UpLoadedFiles/IJHS/Vol50_2015_1_Art13.pdf]



RECENT POST

  • लखनऊ बना देश का पहला सीसीटीवी शहर
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-07-2019 11:34 AM


  • क्या दूसरे ग्रहों के जीव आये थे लखनऊ भ्रमण पर?
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     18-07-2019 12:01 PM


  • उत्तर प्रदेश में पाये गये हैं सबसे अधिक उत्खनन स्थल
    खदान

     17-07-2019 01:45 PM


  • जब मिले सुकरात एक भारतीय योगी से
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-07-2019 02:20 PM


  • सामाजिक उत्थान और एकता का प्रतीक है लखनऊ स्थित अंबेडकर पार्क
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-07-2019 12:52 PM


  • शास्त्रीय संगीत में लखनऊ की विधा – ठुमरी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     14-07-2019 09:00 AM


  • भारतीय और पाश्‍चात्‍य तर्कशास्‍त्र एवं उनके बीच भेद
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     13-07-2019 12:05 PM


  • ग़दर के समय लखनऊ में स्थित ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का वर्णन करती एक पेंटिंग
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-07-2019 01:02 PM


  • लखनऊ के आसपास स्थि‍त बड़हल के वृक्ष के उपयोग और फायदे
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     11-07-2019 12:54 PM


  • जीवन के लिये अनमोल है पानी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-07-2019 01:13 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.