सुअर पालन से रोजगार के अवसर

लखनऊ

 01-09-2018 01:39 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

हमारा देश तेजी से बढ़ती हुई जनसंख्या के लिये खाद्य सुरक्षा के साथ-साथ रोजगार से संबंधित चुनौतियों का सामना कर रहा है। इसके समाधान के लिये आज हमें खेती के साथ साथ पशु पालन की तरफ रूख करने की आवश्यता है। विभिन्न पशुधन प्रजातियों में सुअर पालन व्यावसायिक तौर पर एक बहुत ही फायदेमंद व्यावसाय है। भारत में कुछ समय पहले तक सुअर पालन को उपेक्षा की नजरों से देखा जाता था परंतु आज जब भारत में लोग प्रोफेशनल होते जा रहे हैं तो उनका व्यवसायों की ओर देखने का नजरिया भी बदल गया है। अब लोग सुअर पालन को एक बहुत ही फायदेमंद व्यवसाय के रूप में देखते हैं।

हाल के वर्षों में, मवेशी पालन, मांस खाने और गोमांस निर्यात पर बहुत अधिक विवाद खबरों में रहा है, क्योंकि भारत की आबादी का एक बड़ा हिस्सा शाकाहारी से मांसाहारी बनता जा रहा है, जिसके चलते उ० प्र० सरकार ने सारे ग़ैरक़ानूनी बूचड़खाने बंद करवा दिये थे। मांस की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिये सुअर का स्थान सर्वप्रथम आता है। सुअर को 4-5 किलोग्राम भोजन की ही आवश्यकता होती है, इन्हें अच्छा भोजन मिलने पर ये 6 महीने में ही 50-60 किलोग्राम तक वजन के हो जाते हैं। इस दृष्टि से सुअर पालन का व्यवसाय अत्यंत लाभदायक है।

सूअर एक उर्वर पशु है जो दस से 16 बच्चे देता है। अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में मांस के अलावा सुअर से प्राप्त अन्य उत्पादों जैसे वसा, खाल, बाल ,हड्डी आदि की भी अधिक मांग है जो इसे निर्यात के लिए आधिक उपयोगी बनती है।

सुअर पालन आसान व्यवसाय के परिणामस्वरूप भारत में सबसे कम आर्थिक तबके से संबंधित ग्रामीण वर्गों द्वारा आजीविका का साधन बन रहा है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सुअर उत्पादन को आजीविका के आधार के रूप में तैयार करने के लिए सरकार द्वारा कई प्रयास किये जा रहे है। जिनमें से एक है “सुअर पालन लोन योजना” इस योजना के तहत बहुत से बैंक लोगों व किसानों को आसान किस्तों पर ऋण देता है और इस योजना के लिये सरकार द्वारा भी सब्सिडी प्रदान की जाती है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को अपनी आय बढ़ोतरी तथा सुअर के प्रजनन और व्यावसायिक पालन को प्रोत्साहित करना है।

हमारे देश के स्वदेशी सुअर छोटे आकार के होते हैं। नतीजतन वे वांछित उत्पादन नहीं दे पाते हैं। उत्तर पूर्व भारत में सुअर खेती बहुत महत्वपूर्ण घटक है। भारत में कुल सुअर आबादी में से 28% इस क्षेत्र में उगाए जाते हैं। मांस के उत्पादन के लिए हम कुछ आयातित सुअर की नस्लों का चयन कर सकते हैं। वे हमारे देश में उपलब्ध हैं और सुअर पालन के लिए बहुत उपयुक्त हैं उनमें से कुछ नीचे सूचीबद्ध हैं:
1. बड़े व्हाईट यॉर्कशायर: यह आकर में बड़े होते हैं। यह भारत में सबसे अधिक प्रचलित विदेशी सुअर प्रजाति है। एक वयस्क सुअर का वजन 200 से 400 किलो के आसपास होता है।
2. लैंड्रेस: इनका शरीर लंबा, कान गिरने वाले और थूथन लम्बी होती हैं। इनमे वयस्क सूअर का वजन 200 से 360 किलोग्राम होता है।
3. मिडल वाइट यॉर्कशायर: यह नस्ल भारत के कुछ क्षेत्रों में उपयोग की जाती है। इनमें मांस ड्रेसिंग प्रतिशत अन्यों से बेहतर होता है। वयस्क का वजन 250 से 340 किग्रा के आसपास होता है।

संदर्भ:
1.http://vikaspedia.in/agriculture/livestock/pig-farming-1/piggery
2.https://www.agrifarming.in/commercial-pig-farming-business-india/
3.http://www.upcmhelpline1076.in/pig-farming-loan-yojana/



RECENT POST

  • क्या लखनऊ में चल रही पारिस्थितिकी बनाम मनुष्य की बहस में पिस जायेगी 109 साल पुरानी धरोहर
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     25-02-2020 03:10 PM


  • भारत की ज़मीन पर चीते की एक और दस्तक
    स्तनधारी

     24-02-2020 03:00 PM


  • खाली घोंसला संलक्षण (Empty Nest Syndrome) पर आधारित एक लघु फिल्म
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     23-02-2020 03:30 PM


  • लखनऊ में बहुत विशाल पैमाने पर किया गया डिफेंस एक्सपो (Defence Expo)
    हथियार व खिलौने

     22-02-2020 01:30 PM


  • लखनऊ का मनकामेश्वर मंदिर है, बहुत प्राचीन
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     21-02-2020 11:30 AM


  • लंदन के संग्रहलयों के संग्रह में मौजूद हैं लखनऊ की वस्तुएं
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     20-02-2020 12:30 PM


  • क्या प्रभाव पड़ेगा कोरोना वायरस के प्रकोप का वैश्विक अर्थव्यवस्था में
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     19-02-2020 11:10 AM


  • समय से लड़ता लखनऊ का मुग़ल साहिबा का इमामबाड़ा
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     18-02-2020 01:20 PM


  • पर्यावरण को स्वस्थ और अधिक शांतिपूर्ण बनाता है लखनऊ का फूल बाजार
    बागवानी के पौधे (बागान)

     17-02-2020 01:25 PM


  • बिना मिटटी के भी उगा सकते हैं, घर के अन्दर साग-सब्जियां
    बागवानी के पौधे (बागान)

     16-02-2020 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.