भारतीय समाज के पुनर्जागरण में चिन्मय मिशन की भूमिका

लखनऊ

 13-09-2018 02:45 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

कई वर्षों की पराधीनता के बाद भारतवर्ष को राजनैतिक स्वतन्त्रता तो प्राप्त हुई, किन्तु समाज के प्रमुख लोगों में पश्चिमी सभ्यता का असर खत्म न हुआ था। हिन्दू धर्म का महत्व लुप्त होने लगा था। उसे दूर करने के लिए देश के कई विद्वानों ने धार्मिक सुधार के लिये अनेक आन्दोलन प्रारम्भ किए। उसी समय सन् 1951 में सनातन धर्म को आधार बनाकर स्वामी चिन्मयानन्द द्वारा 'चिन्मय आन्दोलन' का उदय हुआ। चिन्मय आन्दोलन के परिणामस्वरूप चिन्मय मिशन का गठन किया गया था। इस संगठन ने हिंदू धर्म के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ समाज सेवा के विविध क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बनाई है।

इस आन्दोलन की स्थापना स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती (8 मई 1916 - 3 अगस्त 1993) ने की थी। सारे भारत में फैली धर्म संबंधी अनेक भ्रांतियों का निवारण कर शुद्ध धर्म की स्थापना करने के लिए स्वामी चिन्मयानंद जी ने 'गीता ज्ञान-यज्ञ' प्रारम्भ किया। इसका परिचालन सेन्ट्रल चिन्मय मिशन ट्रस्ट द्वारा होता है और वर्तमान में भारत एवं विश्व के अन्य भागों में इसके 300 से अधिक केंद्र चल रहे हैं। जिनमें से एक ‘चिन्मय अवध आश्रम’ लखनऊ शहर के श्रीनाथ मैरिज लॉन, महानगर के पास C-4, A, H पार्क में स्थित है। इस आश्रम से जुड़ी गतिविधियों को आप फेसबुक पर ‘चिन्मय मिशन लखनऊ’ (Chinmaya Mission Lucknow) (https://www.facebook.com/Chinmaya-Mission-Lucknow-837456916294375/) नामक पेज पर आसानी से देख सकते हैं।

समूचे विश्व में यह मिशन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, समाज सेवा परियोजनाओं और संबंधित कार्य क्षेत्रों में कार्यालयों व योजनाओं का आयोजन एवं समन्वय करता है। मिशन के वेदांत कार्य के उद्देश्य को अग्रसर करने के लिये श्रद्धालुओं को स्वामी एवं ब्रह्मचारिणी के रूप में प्रशिक्षित किया जाता है। मिशन ने आधारित स्तर पर कई हजार अध्ययन समूह स्थापित किये हैं, बहुत सी सामाजिक परियोजनाएं शुरू की हैं, कई विद्यालय, कॉलेज, अस्पताल, वृद्धाश्रम खोले हैं, तथा बाल एवं युवा विकास के कई कार्यक्रम, ग्रामीण नर्सों के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम, ग्रामीण महिलाओं के लिये आय सृजन योजनाएं संचालित की हैं।

चिन्मय मिशन का मुख्य उद्देश्य संसार के सभी क्षेत्र के व्यक्तियों को वेदान्त ज्ञान प्रदान कर उन्हें समाज का एक उपयोगी अंग बनने में सहायता करना है। स्वामी जी के परिश्रम के फलस्वरूप इसका संदेश विश्व के अनेक देशों में तथा भारत के कोने-कोने में फैल गया है। इसका आधार सनातन धर्म और उसके धर्म ग्रन्थ रामायण उपनिषद् आदि हैं। 1993 में स्वामी चिन्मयानन्द सरस्वती के महासमाधि प्राप्त करने के बाद, उनके शिष्य स्वामी तेजोमयानंद (जिन्हें गुरुजी के नाम से जाना जाता है) चिन्मय मिशन के वैश्विक प्रमुख बन गये। गुरुजी के तहत, चिन्मय इंटरनेशनल फाउंडेशन और चिन्मय अंतर्राष्ट्रीय आवासीय स्कूल जैसी परियोजनाएं भी शुरू की गईं। इनके बाद जनवरी 2017 में स्वामी स्वरूपानंद को चिन्मय मिशन का उत्तराधिकारी बना दिया गया है।

संदर्भ:

1. http://www.chinmayamission.com/where-we-are/centres-2/chinmaya-mission-lucknow/
2. http://www.chinmayamission.com/who-we-are/the-mission/
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Chinmaya_Mission
4. https://goo.gl/cFWE7P



RECENT POST

  • आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के पश्चात अब लाना है फिर से भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर
    द्रिश्य 2- अभिनय कला य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-07-2021 10:21 AM


  • मौन रहकर भी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने की कला है माइम Mime
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-07-2021 10:11 AM


  • भारत में यहूदि‍यों का इतिहास और यहां की यहूदी–मुस्लिम एकता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-07-2021 10:37 AM


  • पश्चिमी और भारतीय दर्शन के अनुसार भाषा का दर्शन तथा सीखने और विचार के साथ इसका संबंध
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-07-2021 09:40 AM


  • विश्व के इतिहास में सामाजिक समूहों के लिए गहरा महत्व रखता रहा है बलिदान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-07-2021 10:20 AM


  • शहर के मास्टर प्लान में शामिल किया जाना चाहिए मलिन बस्तियों का विकास
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-07-2021 06:09 PM


  • 1857 में लखनऊ से संबंधित एक मूक ब्लैक एंड वाइट फिल्म है, द रिलीफ ऑफ लखनऊ
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     18-07-2021 02:23 PM


  • विभिन्न धर्मों सहित दुनियाभर में मिल जाएंगे, महाबली हनुमान के मंदिर और उपासक
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-07-2021 10:12 AM


  • लखनऊ के मिर्जा हादी रुसवा का प्रसिद्ध 19वीं सदी उर्दू उपन्यास उमराव जान अदा
    ध्वनि 2- भाषायें

     16-07-2021 09:43 AM


  • पहले भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम की साक्ष्‍य रही है भव्‍य राजसी दिलकुशा कोठी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     15-07-2021 07:54 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id