जानिए इस सुन्दर चोर चिड़िया के बारे में

लखनऊ

 22-09-2018 03:27 PM
पंछीयाँ

पक्षी किसका मन नहीं लुभाते, आखिर वे होते ही इतने प्यारे हैं। भोलापन तो उनकी आँखों से ही झलकता है। परन्तु यदि हम आपको बोलें कि इन सुशील सीधे सादे पक्षियों में एक चतुर चोर भी छिपा है, तो क्या आप हमारी बात मानेंगे? नहीं ना, परन्तु यह सत्य है कि एक पक्षी ऐसा भी है जो अपनी इस चोरी की आदत के लिए मशहूर है। तो चलिए जानते हैं ‘महालत’ के बारे में।

चोरी तो यह चिड़िया करती ही है पर चोरों जैसे कुछ लक्षण भी इसमें पाए जाते हैं जैसे इस पक्षी के कई नाम हैं: महालत, मुटरी, कोकैया, महताब, टाकाचोर आदि। दूसरा लक्षण है इसका पहचान में न आना। आप यह तो बता देंगे कि ये चिड़िया महालत है परन्तु उसका लिंग बताने में आपको काफी मुश्किल आएगी। अर्थात इस चिड़िया में नर और मादा दोनों दिखावट में एक जैसे ही होते हैं। एक काले सर के साथ इसके शरीर का मुख्य रंग कत्थई है। पूँछ ऐसी लगती है जैसे कुछ स्याही रंग की हो और सिरे से काली होती है। पूँछ के बीच के दो पर सबसे लम्बे होते हैं और दोनों किनारों के सबसे छोटे। शरीर के ऊपरी पंख पर एक सफ़ेद धारी होती है। चोंच, पैर और पंजे काले होते हैं।

हमारे लखनऊ के साथ-साथ इन पक्षियों का फैलाव भारत में मुख्य भूमि से लेकर हिमालय तक है और इसके अलावा इन्हें पाकिस्तान, बांग्लादेश, बर्मा, लाओस और थाईलैंड में भी पाया जाता है। ये सर्वभक्षी पक्षी हैं तथा इनकी ख़ुराक में फल, दाने से लेकर कीड़े-मकोड़े, चिड़ियाओं के अंडे, छोटी चिड़ियाएँ आदि आते हैं। साथ ही ये हाल ही में मारे गए मवेशियों के शवों को भी अपना भोजन का स्रोत बनाते हैं। देखा जाये तो ये कौए के ही परिवार ‘कौर्वीडे’ (Corvidae) से सम्बन्ध रखते हैं तथा इनका वैज्ञानिक नाम ‘रूफ़स ट्रीपी’ (Rufous Treepie) है।

ये अपना घोंसला फरवरी से जुलाई के बीच आम या ऐसे ही किसी बड़े पेड़ पर बनाते हैं। आकृति के अनुसार इनका घोंसला काफी साधारण होता है जिसका तला समतल और गहराई काफी कम होती है। स्वभाव से ये दोस्ताना नहीं होते तथा जिस पेड़ पर इनका घोंसला होता है, उस पेड़ पर यदि कोई और पंछी आ जाए तो उसे भगा देते हैं। इनके प्रजनन का समय अप्रैल से जून के बीच होता है और ये एक समय में 3 से 5 अंडे देते हैं। इनका नाम मुटरी और कोटरी इनकी आवाज़ की वजह से पड़ा है क्योंकि ये ऐसी ही ध्वनि उत्पन्न करते हैं। और वहीं दूसरी ओर इनका नाम टकाचोर इनकी चोरी करने की प्रकृति की वजह से रखा गया है।

संदर्भ:
1. सिंह, राजेश्वर प्रसाद नारायण. 1958. भारत के पक्षी. प्रकाशन विभाग, सूचना एवं प्रकाशन मंत्रालय
2. अंग्रेज़ी पुस्तक: Kothari & Chhapgar. 2005. Treasures of Indian Wildlife. Oxford University Press
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Rufous_treepie



RECENT POST

  • क्या वन आवरण पर भारत में नीति संशोधन की है आवश्यकता
    जंगल

     20-11-2019 12:00 PM


  • नवाचार (Innovation) के माध्यम से ही भविष्य का विकास है सम्भव
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     19-11-2019 11:12 AM


  • भारत में कहाँ-कहाँ प्रतिबंधित है, पेपर स्प्रे?
    हथियार व खिलौने

     18-11-2019 01:43 PM


  • भारत में सर्वाधिक पसंद किये जाने वाले उपन्यास
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-11-2019 11:44 AM


  • लखनऊ में पाया जा सकता है ब्लैक-बेलीड टर्न, पर कब तक?
    पंछीयाँ

     16-11-2019 11:26 AM


  • लखनऊ का पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन “पसंदा कबाब”
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-11-2019 12:54 PM


  • क्या है मधुमेह टाइप 1 और टाइप 2
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     14-11-2019 12:03 PM


  • शोक मनाने के लिए बनवाया गया था कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-11-2019 11:34 AM


  • लखनऊ के ऐतिहासिक यहियागंज गुरुद्वारे का इतिहास
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-11-2019 12:25 PM


  • क्या पौधों में भी हो सकता है कैंसर
    कोशिका के आधार पर

     11-11-2019 12:47 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.