बढ़ती आबादी के साथ बिगड़ता रोज़गार परिदृश्य

लखनऊ

 29-09-2018 01:01 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

आज हर युवा बेरोज़गारी का पहाड़ा पढ़ते हुए नज़र आ रहा है। आखिर यह बेरोज़गारी है क्‍या? आज हर वो व्‍यक्ति बेरोज़गार है जो अपनी क्षमता, शिक्षा और योग्‍यता से लगभग आधी या न्‍यूनतम आय में कार्य करने के लिए मजबूर है। बेरोज़गारी किसी भी देश के विकास में एक बहुत बड़ा अभिशाप है। भारत जैसे विशाल आबादी वाले देश में यह समस्‍या और अधिक मज़बूत होती जा रही है। आज हमारे देश में लाखों बच्‍चे बड़े-बड़े सपने लिए अपनी पढ़ाई पूरी करके कॉलेजों से बाहर आते हैं। किंतु जब सरकारी नौकरी की बात आती है तो ‘एक अनार सौ बीमार’ वाली स्थिति देखने को मिलती है। भारत में बेरोज़गारी के प्रमुख कारक इस प्रकार हैं:

1. जनसंख्या में तीव्र वृद्धि
2. सैद्धांतिक शिक्षा पर केंद्रित रहना
3. मंद औद्योगिक विकास
4. कुटीर उद्योग में गिरावट
5. कृषि मजदूरों के लिए वैकल्पिक रोज़गार के अवसरों की कमी
6. तकनीकी उन्नति न होना

भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था भले ही तीव्रता से विकास के पथ पर अग्रसर हो, किंतु रोज़गार उत्‍पादन के क्षेत्र में आंकड़े कुछ और ही बताते हैं। आप नीचे दिये गये ग्राफ (1972-2015) से इसका अनुमान लगा सकते हैं।


ये आंकड़े दर्शाते हैं कि उदारीकरण (Liberalization) के बाद से सरकार सकल घरेलू उत्‍पाद (Gross Domestic Product) को बढ़ाने में हर सक्षम प्रयास कर रही है किंतु रोज़गार के क्षेत्र में कोई सकारात्‍मक प्रभाव देखने को नहीं मिल रहे हैं।

70 और 80 के दशक में भारत का सकल घरेलू उत्‍पाद वृद्धि दर 3% से 4% और रोज़गार वृद्धि दर 2% था। और वर्तमान समय में सकल घरेलू उत्‍पाद वृद्धि दर 10% और रोज़गार वृद्धि दर 1% है। यहां भी प्रत्‍येक 100 पुरूषों में वेतनभोगी महिलाओं (उत्‍तर प्रदेश में-20, तमिलनाडु-50, तथा मेघालय और नागालैण्‍ड -70) के आंकलन में काफी भिन्‍नता है। किंतु लिंग से ज्‍यादा यह भिन्‍नता विभिन्‍न जातीय समुदायों में देखने को मिलती है।

आज निजी क्षेत्र सरकारी क्षेत्र की अपेक्षा रोज़गार देने में अधिक सक्षम नजर आ रहे हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2015 में भारत के 7 लाख लोग निजी उद्योग क्षेत्र में कार्यरत थे। यह संख्‍या भारत के स्‍वास्‍थ्‍य क्षेत्र और प्रशासनिक क्षेत्र में कार्य करने वालों से काफी अधिक थी तथा हर तीसरा भारतीय प्रत्‍येक माह न्‍यूनतम 10,000 रुपये कमा रहा था, जो भारत सरकार द्वारा सातवें वेतन आयोग में निर्धारित आय (18,000 रुपये) से काफी कम थी। भले ही आज निजी क्षेत्रों ने रोज़गार के अवसर बढ़ा दिये हों, किंतु नौकरी की सुरक्षा और वेतन के मामले में वे सरकारी क्षेत्र से अत्‍यंत पीछे हैं। साथ ही किसी भी कर्मचारी को निजी क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए निम्‍न योग्‍यताएं होना अत्‍यंत आवश्‍यक है:

1. किसी व्‍यक्ति की प्रतिभा, कौशल और अनुभव संगठन में अच्‍छे प्रदर्शन के लिए लाभदायक है।
2. नई खोज करने की प्रवृत्ति।
3. विभिन्न भाषाओं का ज्ञान किसी व्यक्ति को विश्व स्तर पर कार्य करने हेतु सक्षम बनाता है।
4. कर्मचारियों का मूल्यांकन किया जाता है कि वे अपनी नौकरियों के प्रति कितने सजग हैं, अर्थात वे कम्पनी की आकांक्षाओं पर कितने सफल सिद्ध होते हैं|

विभिन्‍नताओं की नगरी भारत में आज अनेक निजी क्षेत्र हैं, जिनके द्वारा अनेक प्रकार के कार्य संपन्‍न किये जाते हैं। लेकिन इन क्षेत्रों में कार्य के प्रति योग्‍य व्‍यक्ति यदि उस क्षेत्र विशेष की भाषा का ज्ञान नहीं रखता तो उसके लिए उस क्षेत्र में कार्य करना मुश्किल हो जाता है। अतः वह योग्‍य होते हुए भी उस कार्य को नहीं कर पाता। भाषायी भिन्‍नता भी इसमें एक बाधा बन जाती है।

वर्तमान सरकार द्वारा स्‍वरोज़गार को बढ़ावा देने के लिए विभिन्‍न स्‍वरोज़गार योजनाएं प्रारंभ की गयी हैं। जिसमें 120 मिलियन (12 करोड़) लोगों को लाभ प्राप्‍त हुआ तथा इसमें लगभग 3.6 लाख करोड़ का लोन वितरित किया गया। वर्ष 2017 में गुजरात सरकार ने वस्‍त्रोद्योग में कार्य करने वाले स्‍त्री-पुरूषों को 3000 और 4000 रुपये सब्सिडी (Subsidy) प्रदान की, जिससे लगभग 300 नौकरियों का सृजन हुआ। इस वर्ष प्रधानमंत्री ऑफिस में निजी क्षेत्रों पर सकारात्‍मक कार्यवाही करने के लिए एक बैठक आयोजित की गयी।

सरकार ने समस्या को नियंत्रित करने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, हालांकि ये कदम पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। सरकार के लिए इस समस्या को नियंत्रित करने हेतु कार्यक्रमों को शुरू करना ही काफी नहीं है बल्कि उनकी प्रभावशीलता पर भी ध्यान देना ज़रूरी है और यदि आवश्यकता पड़े तो उन्हें संशोधित करने का कदम भी उठाना चाहिए। नीति निर्माताओं और नागरिकों को अधिक नौकरियों के निर्माण के साथ ही रोज़गार के लिए सही कौशल प्राप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास करने चाहिए।

संदर्भ:
1.https://theprint.in/opinion/one-step-india-can-take-to-make-private-sector-jobs-more-inclusive-not-quota/125146/
2.https://theundercoverrecruiter.com/benefits-diversity-workplace/
3.https://www.thehindu.com/todays-paper/tp-national/need-for-an-employment-policy-to-solve-jobless-growth/article25043170.ece
4.https://www.hindustantimes.com/india-news/private-security-industry-is-a-bigger-employer-than-healthcare-in-india-study/story-ROQwoKDbzVA3NQevqqdRBK.html
5.https://www.firstpost.com/business/state-of-working-in-india-report-yet-another-warning-on-employment-but-this-too-may-fall-on-deaf-ears-5270911.html



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