खूबसूरती एवं व्यवसाय के नए मायनों में बदलती कढ़ाई

लखनऊ

 13-10-2018 12:08 PM
स्पर्शः रचना व कपड़े
एम्ब्रॉयडरी या कढ़ाई एक ऐसी कला है जिसमें रंग-बिरंगे धागों से सुई की मदद से कुछ ऐसा काढ़ा जाता जो कपड़े की सुन्दतरता बढ़ा देती है। पुराने जमाने में कढ़ाई हाथों से ही की जाती थी, लेकिन वक्त बदलने के साथ ही आज कढ़ाई मशीनों से भी की जाने लगी है। कढ़ाई करना तब भी बारीकी और हुनर का काम था और आज भी ये बारीकी और हुनर का काम माना जाता है। एक साधारण-से कपड़े को खूबसूरती के नए मायनों में बदलती कढ़ाई की कई किस्में जैसे चिकनकारी, फुलकारी, ज़रदोज़ी, कशीदाकारी, मुकैश कढ़ाई आदि आज भारत में की जाती हैं।

कढ़ाई की परंपरा लगभग 2300-1500 ईसा पूर्व से चली आ रही है। वर्तमान में एम्ब्रॉयडरी ना केवल खूबसूरती के लिये बल्कि व्यवसाय के एक अच्छे विकल्प के तौर पर भी उभर कर सामने आ रही है। यह आज व्यवसाय को अत्यधिक बहुमुखी प्रतिभा और नये दायरे प्रदान कर रही है। परंतु आज हाथ कढ़ाई केवल उन्ही उच्च कुशल कारीगरों तक ही सीमित रह गयी है जो इसे एक कला मानते हैं और वहीं दूसरी तरफ मशीनीकृत कढ़ाई का सस्ता और आकर्षक रूप लोगों को पसंद आ रहा है। भारत में, हाथों के कढ़ाई वाले सामानों का उपयोग अभी भी कपड़ो और आंतरिक सजावट के किया जा रहा है परंतु पश्चिमी देशों में, हाथ कढ़ाई के कार्यों को एक कला और विलासिता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। फैशन के इस दौर में पश्चिमी देशों में पैच या "छोटे कढ़ाई वाले प्रतीक चिन्हों" का उपयोग कपड़ों को सुंदर बनाने और वैयक्तिकृत करने के लिए किया जाता है। जोकि अब मशीनों द्वारा भी बनाए जा रहे है। जिसके कारण इसमें बेहतर भविष्य के अवसर प्राप्त हो रहे है।

वर्तमान में कढ़े हुए परिधानों की मांग देश विदेश में इतनी बढ़ गई है की समय पर इसकी आपूर्ति करने के लिये नयी मशीनों और कुशल कारीगरों की आवश्यकता भी बढ़ती जा रही है। इस बढ़ती मांग के चलते आज मशीनीकृत कढ़ाई का उपयोग ज्यादा होने लगा है। अनुमान लगाया जा रहा है की विदेशों में कढ़े हुए परिधानों की बढ़ मांग और उच्च निर्यात के चलते भारत जल्द ही कढ़ाई के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानचित्र पर उजागर हो जाएगा।

हाल ही में सूरत (टेक्सटाइल मार्केट के लिये प्रसिद्ध) नगर निगम के ऑक्टोरी विभाग के विवरण से ज्ञात हुआ की टेक्सटाइल मार्केट में करीब 35,000 कढ़ाई मशीन स्थापित की गई हैं, और इन मशीनों की कुल संख्या नवंबर तक 50,000 से ऊपर तक होने की उम्मीद है। कढ़ाई व्यवसाय पिछले कुछ वर्षों में प्रति वर्ष सात प्रतिशत की वृद्धि कर रहा है और इस दर से भारत जल्द ही कढ़ाई का एक प्रमुख केंद्र बन जाएगा।

इस काम को सीखने वाले में अगर जागरुकता और इसी व्यवसाय को करियर बनाने की चाह हो तो यह उसके जीवन स्तर को ऊंचा उठाने का अच्छा साधन बन सकता है। यदि आप कढ़ाई के व्यवसाय में भविष्य बनाना चहते है तो हम आपको मशीन की कढ़ाई और हाथ कढ़ाई के व्यवसाय में फायदे और नुकसान से अवगत करते है:

हाथ की कढ़ाई हस्तनिर्मित, उत्तम डिजाइन, कढ़ाई का सावधानीपूर्वक काम, जीवंत और सुरुचिपूर्ण रंग, तथा मजबूत स्थानीय विशेषताओं से संमृद्ध असाधारण दिखने और उत्कृष्ट नमूने है। परंतु इसमें समय समय लगता है, काम जितना अधिक जटिल होगा, उतना ही अधिक समय लगेगा। जिस वजह से व्यापार में बुरा असर भी पड़ सकता है। और हाथ की कढ़ाई में कारीगरों का कुशल होना भी महत्वपूर्ण होता है। वहीं मशीन की कढ़ाई सस्ती और डिजिटलीकरण होने के कारण जल्दी हो जाती है। इसके द्वारा ग्राहकों की बड़ी से बड़ी मांग को समय पर पूरा किया जा सकता है, और इस व्यवसाय में नुकसान हाथ की कढ़ाई की तुलना में कम होते है। परंतु कम्प्यूटरीकृत होने के कारण इसके डिजाइनों का स्वरूप सीमित हो गया है।

संदर्भ:

1.https://medium.com/@PatriciaJStrange/advantages-and-disadvantages-machine-embroidery-vs-hand-embroidery-f79c84b7497d
2.https://timesofindia.indiatimes.com/city/ahmedabad/Embroidery-nextbig-thing-in-textiles/articleshow/1955928.cms
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Embroidery_of_India

https://www.educationtimes.com/article/10/2009102020091014172049718fddd55a6/Career-in-embroidery.html


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