कैसे एक वैज्ञानिक और एक संन्यासी ने मिलकर दी विज्ञान को एक नयी दिशा

लखनऊ

 10-11-2018 10:00 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

विज्ञान प्रकृति के अनुरूप होने पर सबसे अच्छा काम करता है। यदि हम इन दोनों को एक साथ रखते हैं, तो हम महान तकनीकों की खोज कर सकते हैं। जिसका एक उदाहरण 'मुक्त ऊर्जा' (अंग्रेजी में फ्री एनर्जी/Free Energy) भी है, जिसे 'शून्य-बिंदु ऊर्जा' भी कहा जाता है, जो हमारे आस-पास मौजूद पदार्थ का उपयोग करती है और इसे उपयोग करने योग्य ऊर्जा में परिवर्तित करती है। यह हमें ऊर्जा का असीमित स्रोत देती है। अंतरिक्ष के गुणों की कल्पना आइंस्टीन, न्यूटन और अन्य सभी तरह से कई लोगों प्राचीन वेदों, सूफ़ी, अध्यात्म और प्राचीन सभ्यताओं ने की है।

आध्यात्मिक विज्ञान की अवधारणा से आधुनिक विज्ञान सीधे जुड़ा हुआ है। यदि हम एक माइक्रोस्कोप (Microscope) की सहायता से परमाणु की संरचना को देखते हैं, तो अदृश्य भंवर जैसी कुछ आकृतियां दिखाई देती हैं और ऊर्जा के इन असीमित भंवरों को क्वार्क्स (Quarks) और फोटॉन (Photon) कहा जाता है। ये परमाणु की संरचना को बनाते हैं। जैसे ही आप परमाणु की संरचना के करीब और करीब ध्यान केंद्रित करते हैं, आपको कुछ भी नहीं दिखाई देगा, आप एक भौतिक संरचना को महसूस करेंगे। परन्तु हमारे पास परमाणु की कोई भौतिक संरचना नहीं है।

परमाणु अदृश्य ऊर्जा से बने होते हैं। हमने आधुनिकता के वास्तविक प्रकृति के बारे में एक प्राचीन समझ को पकड़ने के लिए आधुनिक विज्ञान के एक बहुत ही रोचक प्रवृत्ति (विशेष रूप से पिछले दशक के भीतर) को देखा है। वैज्ञानिक निकोला टेस्ला प्राचीन अवधारणाओं से अवगत थे। जिस विज्ञान पर वह काम कर रहे थे उसके साथ सहसंबंध - 'आकाश' और 'प्राण' जैसे संस्कृत शब्दों से था और इन्हें बल और हम जिस पदार्थ से घिरे हुए हैं इनके द्वारा बताया है। ये शब्द उपनिषद (वैदिक ग्रंथों का संग्रह) से आते हैं। निकोला टेस्ला के स्वामी विवेकानंद (1863-1902) के साथ काफी मधुर सम्बन्ध थे, जो वेदांत दर्शन के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली आध्यात्मिक नेताओं में से एक थे।

टेस्ला ने विवेकान्द से मिलने के बाद संस्कृत में शब्दों का प्रयोग करना शुरू कर दिया था। सत्य की शुद्ध प्रकृति को जानने के लिये टेस्ला ने पूर्वी दृष्टिकोण का अध्ययन करना शुरू कर दिया था। उन्होंने जानने की कोशिश करी कि इस दुनिया को चलाता कौन है। आखिरकार वह विद्युत शक्ति के बेतार संचार के आधार पर पहुंच गया जिसे टेस्ला कोइल ट्रांसफार्मर (Tesla Coil Transformer) के नाम से जाना जाता है। टेस्ला ने फ्री एनर्जी की अवधारणा के लिये आकाश और प्राण को आधार बनाया था। वह इन दोनों के आधार विज्ञान में अपने प्रश्नों के उत्तर खोज रहा था।

विवेकानंद ने टेस्ला को 1800 के करीब एक पत्र लिखा जिसमें उन्होंने टेस्ला के सन्दर्भ में बताते हुए कहा कि टेस्ला प्राण और आकाश की अवधारणा से काफी प्रभावित हुए हैं और साथ ही उन्होंने बताया कि टेस्ला के मुताबिक इन्हीं दो वैदांतिक सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान से जोड़ा जा सकता है। उन्होंने पत्र में यह भी बताया कि वे एक हफ्ते बाद स्वयं टेस्ला से भेंट करने जाएंगे।

वैदिक ज्ञान हासिल करने के लिये टेस्ला विवेकानंद को पत्र लिखा करते थे जिसमें वे वैदिक रहस्यों के बारे में पूछा करते थे। बिजली और मुक्त ऊर्जा के बेतार संचार के लिये टेस्ला की दूरदर्शिता को लगभग सौ साल से स्थगित कर दिया गया था जिसे बाद में दूसरे वैज्ञानिकों द्वारा आगे बढ़ाया गया।

सन्दर्भ:
1.https://www.scienceandnonduality.com/did-the-vedic-philosophy-influenced-the-concept-of-free-energy-and-quantum-mechanics/
2.https://steemit.com/philosophy/@madhavi009/did-the-vedic-philosophy-influence-the-concept-of-free-energy-and-quantum-mechanics
3.https://stillnessinthestorm.com/2015/10/free-energy-developed-from-vedic-texts/



RECENT POST

  • गैरकानूनी होने के बावजूद भी आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं मोरपंख के हस्तशिल्प
    पंछीयाँ

     25-06-2019 11:18 AM


  • भारत की सबसे बड़ी दिग्गज आईटी कंपनियां एवं आईटी नौकरियों का भविष्य
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     24-06-2019 12:05 PM


  • भारत के कब्ज़े में है बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी
    हथियार व खिलौने

     23-06-2019 09:00 AM


  • भारत का केसरिया स्तूप हो सकता है इंडोनेशिया के बोरोबुदूर मंदिर की प्रेरणा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-06-2019 11:33 AM


  • रामचरितमानस में योग का तात्पर्य
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     21-06-2019 11:20 AM


  • रामपुर और लखनऊ को संदर्भित करता रडयार्ड किपलिंग का प्रसिद्ध उपन्यास ‘किम’
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-06-2019 11:26 AM


  • कब, कैसे और कहाँ हुई टाई की उत्पत्ति?
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     19-06-2019 11:06 AM


  • तेप्ची कढ़ाई- जो मशीनों के इस दौर में भी हाथ से की जाती है
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     18-06-2019 11:04 AM


  • क्या बंदर केवल शाकाहारी होते हैं?
    स्तनधारी

     17-06-2019 11:08 AM


  • समय के साथ स्वाभाविक होते पिता
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-06-2019 10:30 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.