दो सिख गुरु रहे थे लखनऊ के इस गुरूद्वारे में

लखनऊ

 23-11-2018 09:00 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

भारत एक बहुधर्मी राष्ट्र है, जहाँ अनेक धर्म और संस्कृति के लोग रहते हैं। यह इंगित करता है कि कहीं ना कहीं सभी धर्म एक दूसरे से आंशिक रूप से जुड़े हुए हैं, जिस बंधन ने भारत को इतनी भिन्नताओं को एक साथ समेटने की क्षमता दी। इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ ने भी एक मिसाल पेश की है।

लखनऊ के ऐतिहासिक गुरुद्वारे यहियागंज में वर्ष 2016 में एक अद्भुत नज़ारा देखने को मिला, जहाँ रोज़ा इफ्तारी के समय गुरुद्वारे में इफ्तर के जश्न का आयोजन किया गया, जिसमें विभिन्न धर्मगुरुओं के अलावा आम आवाम ने भी शिरकत की और साथ ही लंगर में हिंदू, मुस्लिम, सिख, शिया और सुन्नी सब एक साथ बैठकर खाना खाते हुए दिखाई दिए। यह जश्न अंतर-विश्वास एकजुटता का एक सराहनीय उदाहरण है।

यहियागंज गुरुद्वारा लखनऊ में सबसे ऐतिहासिक गुरुद्वारों में से एक है। ऐसा माना जाता है कि 1670 में, गुरु तेग बहादुर सिंह पटना साहिब से लौटते हुए तीन दिनों तक यहां रहे थे। वे जहां ठहरे थे, उसी जगह पर यहियागंज गुरुद्वारा बना है। वहीं 1672 में गुरु गोविंद सिंह जी छह वर्ष की आयु में दो महीने यहां ठहरे थे। उनके लिखे गुरुग्रंथ साहिब का एक हस्त लिखित स्वरूप भी गुरुद्वारे में संग्रहित है। गुरुद्वारे में उनके दो हुक्मनामे भी संग्रहित हैं। साथ ही यहाँ सिख पंथ की विभिन्न घटनाओं को दर्शाती हुई एक आर्ट गैलरी (Art Gallery) भी है।

यहियागंज गुरुद्वारे में 1947 में अधिकांश पंजाबियों ने शरण ली थी। इतने सारे पंजाबियों को देख लखनऊ के लोगों को पहले थोड़ा झटका सा लगा, उनकी अलग भाषा और संस्कृति के बावजूद उन्हें अपनाया गया। उस समय प्रत्येक प्रवासी को घर और रोजगार प्रदान करना एक आसान बात नहीं थी। सरकार द्वारा शरणार्थियों के लिए चंदन नगर, सिंगर नगर, आदर्श नगर, आलमबाग और लाजपत नगर उपनिवेशों का निर्माण किया गया। वहीं प्रवासियों द्वारा आलमबाग को पंजाबी इलाके में बदल दिया गया और स्थानीय लोगों द्वारा उसे ‘लखनऊ का लाहौर’ के नाम से जाना जाने लगा।

वहीं यहियागंज गुरुद्वारे के इतिहास की जानकारी को शहर के लोगों तक पहुंचाने के लिए केवल वेबसाइट और फेसबुक का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है, बल्कि अब पोस्टर के माध्यम से भी प्रचार किया जा रहा है। सिख स्कूलों में उपदेशों के माध्यम से भी गुरुद्वारे के इतिहास के बारे में बताया जा रहा है।

संदर्भ:
1.https://www.ixigo.com/yahiyaganj-gurudwara-lucknow-india-ne-1700827
2.http://uptourism.gov.in/pages/top/explore/lucknow/gurudwara-yahiyaganj
3.https://goo.gl/SVJtCK
4.https://navbharattimes.indiatimes.com/metro/lucknow/development/history-will-promote-yhiaganj-gurdwara/articleshow/45780887.cms
5.https://www.hindustantimes.com/india/punjab-rhymes-with-nawab/story-OKbS7UycGZzkDbiPMCp39J.html
6.https://www.scoopwhoop.com/Iftar-Party-For-Muslims-Organised-By-A-Gurudwara/#.ri13b2939
7.https://www.youtube.com/watch?v=yR1vPSQRTmg



RECENT POST

  • भारत में सर्वाधिक पसंद किये जाने वाले उपन्यास
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-11-2019 11:44 AM


  • लखनऊ में पाया जा सकता है ब्लैक-बेलीड टर्न, पर कब तक?
    पंछीयाँ

     16-11-2019 11:26 AM


  • लखनऊ का पारंपरिक स्वादिष्ट व्यंजन “पसंदा कबाब”
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-11-2019 12:54 PM


  • क्या है मधुमेह टाइप 1 और टाइप 2
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     14-11-2019 12:03 PM


  • शोक मनाने के लिए बनवाया गया था कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-11-2019 11:34 AM


  • लखनऊ के ऐतिहासिक यहियागंज गुरुद्वारे का इतिहास
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-11-2019 12:25 PM


  • क्या पौधों में भी हो सकता है कैंसर
    कोशिका के आधार पर

     11-11-2019 12:47 PM


  • चित्रकला के इतिहास में स्पेन के कुछ मुख्य कलाकार
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     10-11-2019 03:09 AM


  • क्यों मनाया जाता है, "ईद-ए-मिलाद उन नबी" का त्यौहार
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-11-2019 11:30 AM


  • किराना उद्योग में ई-कॉमर्स के बढते कदम
    संचार एवं संचार यन्त्र

     08-11-2019 11:22 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.