कौन प्रमाणित करता है भारत के डॉक्टरों को अभ्यास शुरू करने के लिए?

लखनऊ

 29-11-2018 01:55 PM
स्तनधारी

नागरिक राष्ट्र के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, अतः एक स्वस्थ नागरिक ही एक स्वस्थ राष्ट्र का निर्माण कर सकता है। इसलिए सरकार का उत्तरदायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों के स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखें, जिसके लिए सरकार के द्वारा देश के विभिन्न क्षेत्रों में चिकित्सालय तथा चिकित्सक की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। भारतीय चिकित्सकों को उनकी शैक्षिक योग्यता के अनुसार लाइसेंस प्रदान किये जाते हैं, जो दो प्रमुख प्रकार के होते हैं: एम.बी.बी.एस. परीक्षा से उत्तीर्ण (भारत के आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा मान्यता प्राप्त अस्पताल से शिक्षा प्राप्त किए गये चिकित्सक) और एफ.एम.जी.ई. परीक्षा से उत्तीर्ण (राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड में परीक्षा दिए हुए चिकित्सक)। भारत के सभी चिकित्सकों के लिए नियमों की स्थापना भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद द्वारा की जाती है।

भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद की स्थापना 1934 में, भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम 1933 के तहत की गई, जिसका प्रमुख कार्य चिकित्सा के क्षेत्र में उच्च शिक्षा हेतु तथा भारत व विदेशों की चिकित्सा योग्यता की मान्यता के लिए समान मानकों को स्थापित करना था। स्वतंत्रता मिलने के बाद भारत में मेडिकल कॉलेजों की संख्या में निरंतर वृद्धि होने लगी, देश में चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास और प्रगति से उत्पन्न हुई चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम के प्रावधान पर्याप्त नहीं थे। परिणामस्वरूप, 1956 में पुराने अधिनियम को निरस्त कर दिया गया और एक नया अधिनियम बनाया गया। इस अधिनियम को आगे भी 1964, 1993 और 2001 में संशोधित किया गया।

इस परिषद के उद्देश्य निम्नानुसार हैं:
1. चिकित्सक शिक्षा में स्नातक पूर्व (अंडर ग्रेजुएट/Under Graduate) और स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रेजुएट/Post Graduate) दोनों स्तर पर एक समान मानकों को बनाए रखना।
2. भारत या विदेशी देशों के चिकित्सा संस्थानों की चिकित्सा योग्यता की मान्यता/अमान्यता के लिए सिफारिश।
3. मान्यता प्राप्त चिकित्सा योग्यता रखने वाले डॉक्टरों का स्थायी/अस्थायी पंजीकरण करना।
4. चिकित्सकीय योग्यता की पारस्परिक मान्यता के मामले में विदेशी देशों के साथ पारस्परिक आदान-प्रदान बनाना।
5. सभी पंजीकृत डॉक्टरों की सूची रखना।

पुरस्कारों की सूची:

डॉ बी.सी. रॉय अवॉर्ड:
डॉ बी.सी. रॉय नेशनल अवॉर्ड फंड की स्थापना 1962 में उनको हमेशा याद रखने के उद्देश्य से की गई थी। यह पुरस्कार प्रतिष्ठित चिकित्सा सम्बन्धी व्यक्ति को निम्न श्रेणियों में प्रस्तुत किया जाता है: स्टेट्समैनशिप ऑफ दी हाईएस्ट ऑर्डर इन आवर कंट्री (Statesmanship of the Highest Order in our Country), मेडिकल मेन-कम-स्टेट्समैन (Medical man-cum-Statesman), एमिनेंट मेडिकल पर्सन (Eminent Medical Person), एमिनेंट पर्सन इन फिलॉसोफी (Eminent person in Philosophy) और एमिनेंट पर्सन इन आर्ट्स (Eminent person in Arts)।

हरि ओम आश्रम अवॉर्ड:
हरि ओम आश्रम अलेम्बिक रिसर्च अवॉर्ड फंड ने पुरस्कार के लिए मौलिक अनुसंधन की श्रेणियों के तहत मेडिकल साइंस (Medical Science), क्लीनिकल रिसर्च (Clinical Research) और ऑपरेशनल रिसर्च (Operational Research) को नामांकित करने का निर्णय लिया है।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/Medical_license
2.https://www.quora.com/What-is-the-function-of-MCI-India
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Medical_Council_of_India
4.https://www.mciindia.org/CMS/



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