पान का इतिहास है जुड़ा वियतनाम से

लखनऊ

 06-12-2018 01:30 PM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

हमारे देश में भोजन के बाद पान खिलाने की प्रथा सदियों पहले शुरू हुई और आज भी प्रचलित है। हिंदुस्तानी विश्व के किसी भी कोने में चले जाएं और पान न खाएं, ऐसा होना असंभव है। पान खाना भारतीय एवं दक्षिण-पूर्व एशियाई में एक परंपरा है। वहीं पान का सेवन सिर्फ भारत में ही नहीं होता है, इसका सेवन इंडोनेशिया और मलेशिया, फिलीपींस, म्यांमार, पाकिस्तान, कंबोडिया, लाओस और थाईलैंड, वियतनाम, बांग्लादेश, नेपाल और ताइवान में भी होता है, और हर देश में इसके सेवन के पीछे अलग-अलग परंपराएं हैं।

पान की उत्पत्ति से जुड़ी एक मनोरंजक कहानी वियतनाम (Vietnam) से मिलती है, वहां ऐसा माना जाता है कि एक जुड़वा भाई टैन और लैंग थें, उनमें से टैन की शादी हो जाती है और टैन अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता था। लेकिन उसकी पत्नी टैन के भाई लैंग से प्यार करने लगती है और इस सदमें को टैन सहन नहीं कर पाता और अपना जीवन त्यागने का विचार कर बैठता है। इस विचार के साथ वो घर छोड़ कर एक नदी के पास जाकर आत्महत्या कर लेता है। जब लैंग को अपना भाई घर में नहीं दिखता है तो वो उसे ढूंढने के लिए निकलता है और जब वह अपने भाई को मृत पाता है तो भाई की मौत के लिए खुद को ज़िम्मेदार ठहराते हुए, एक पत्थर पर अपने सिर को मारना शुरू कर दिया और अंतः लैंग की भी मृत्यु हो गयी। वहीं दूसरी ओर जब टैन की पत्नी ने दोनों भाईयों को एक के बाद एक गायब होते पाया तो वो भी उनकी खोज पर निकल गयी, और नदी के पास दोनों के मृत शरीर को देख, उसने भी अपने प्राण त्याग दिए।

कुछ दिनों बाद टैन का मृत शरीर एक पतले पौधे में परिवर्तित हो गया और लैंग का मृत शरीर पत्थर में परिवर्तित हो गया और टैन की पत्नी दोनों भाइयों के चारों ओर एक बेल के रूप में आवरण करती हुई परिवर्तित हो गयी। अनुयायियों के मुताबिक, समय के साथ वे सुपारी, चूना और पान के पौधे बन गए। इस प्रकार इन तीन वस्तुओं का जन्म हुआ था।

कई लोग पान का सेवन त्योहारों, परंपराओं, माउथ फ्रेशनर और औषधियां गुणों के लिए करते हैं जो की शरीर में हानिकारक प्रभाव नहीं डालता है। लेकिन अनियमित रूप से पान का सेवन शरीर के लिए काफी हानिकारक होता है। पान को आमतौर पर उनके पत्तों में थोड़ा सा चूना और तंबाकू लगाकर उसमें सुपारी डालकर बनाया जाता है, इस मिश्रण में तंबाकू के मिलने के बाद यह हानिकारक बन जाता है। पान और तंबाकू का सेवन कैंसर और अन्य विकारों का कारण बनता है। पान में मौजूद सुपारी का भी अगर नियमित रूप से सेवन हो तो वो भी हमारे शरीर के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकती है।

पान खाने के कुछ हानिकारक प्रभाव निम्न हैं :-

सांसों में दुर्गंध को आमंत्रण :- तंबाकू और सुपारी के साथ पान के पत्तों को खाने से सांसों से दुर्गंध आने लगती है। जबकी पान के पत्ते माउथ फ्रेशनर का काम करते हैं, लेकिन तंबाकू और सुपारी के मिश्रण से यह मुंह की श्वास खराब कर देती है।

मुंह में विकृति का कारण :- सुपारी के सेवन से मुंह लाल हो जाता है और साथ ही यह दांतों और मसूड़ों को स्थायी रूप से विघटित कर देता है। वहीं आपके दांतों और मसूड़ों में हुआ यह प्रभाव अपरिवर्तनीय है, और भविष्य में आपको पान खाने की आदत पर पछतावा होगा।

मुंह के कैंसर की संभावना बढ़ना :- जैसा की हमने आपको पहले ही बताया की पान के पत्तों का सेवन तंबाकू और सुपारी के साथ करने से यह मुंह के कैंसर होने का कारण बनता है।

गर्भावस्था के दौरान पान खाना :- एक शोध के अनुसार गर्भावस्था के दौरान पान खाने से बच्चे के स्वास्थ्य पर प्रभाव परता है। इसका प्रभाव अल्कोहॉल और तंबाकू के सेवन से होता है।

वहीं पान के पत्ते रोगों के निजात दिलाने में भी काफी लाभदायक होते हैं, कुछ उपायों के बारे में हम आपको बताते हैं :-

1. सूखी खांसी, कुक्कुर खांसी, अजीर्ण, खसरा दस्‍त इत्‍यादि से निजात दिलाने में पान के पत्‍ते अत्‍यंत प्रभावी होते हैं। अत्‍यधिक खांसी होने पर पान के पत्‍ते के रस को शहद के साथ लेने पर खांसी से राहत मिल जाती है। 3 पान के पत्‍ते और 12 तुलसी के पत्‍तों को बारीक पीसकर 125 ग्राम पानी में पकाएं, पकाने के पश्‍चात जब आधा पानी शेष रह जाता है, इसे छानकर इसमें दो चम्‍मच शहद मिलाएं। दिन में तीन बार इसके सेवन से सर्दी खांसी में राहत मिल सकती है।
2. पान के पत्‍ते में एक इलाइची, चूना आदि मिलाकर चबाने से मुंह में आने वाली दुर्गंध से राहत मिल सकती है।
3. पेट की कमजोरी से छुटकारा दिलाने में भी पान का पत्‍ता सहायक होता है, पान के पत्‍ते को सेंधा नमक के साथ खाने से पेट की कमजोरी, भूख ना लगने की समस्‍या, आलस्‍य आदि से निजात मिलता है।
4. दिन में दो से तीन बार 4-4 ग्राम पान के पत्तों के रश के सेवन से बुखार से राहत मिलती है।
5. शीत हवा या पानी के कारण कान में दर्द होने लगता है, ऐसी स्थिति में पान के पत्‍ते के 2-3 बूंद गर्म करके डालने पर तुरंत राहत मिल जाती है।

पान के हानिकारक प्रभावों और उसे खाने के बाद उससे फैलाई जाने वाली गंदगी को देखते हुए इस पर कई राज्यों में प्रतिबंध लगा दिया गया है। जैसे कि 9 जनवरी 2015 को आंध्र प्रदेश की सरकार ने तम्बाकू, गुटखा, पान मसाला या कोई भी चबाने वाला तम्बाकू और निकोटीन (Nicotine) निर्मित उत्पाद बेचने, रखने या बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। वहीं संयुक्त अरब अमीरात (United Arab Emirates) में पान के पत्तों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है और साथ ही वहां उन्हें ले जाना गैरकानूनी है। साथ ही यूरोपीय संघ नें भी भारतीय पान में प्रतिबंध लगाया हुआ है।

संदर्भ:
1.
https://www.healthlibrary.in/quite-a-mouthful-the-dangers-and-benefits-of-chewing-paan/
2.https://en.wikipedia.org/wiki/Paan
3.https://www.indiastudychannel.com/resources/143645-Betel-Paan-Its-Origin-History-And-Medicinal-Properties.aspx
4.https://www.healthline.com/health/betel-nut-dangers#cancer-risk
5.https://www.downtoearth.org.in/news/andhra-bans-gutkha-paan-masala--40029
6.https://gulfnews.com/lifestyle/community/banned-betel-leaves-still-causing-trouble-1.2168206
7.https://www.business-standard.com/article/markets/eu-may-ban-import-of-paan-114080501931_1.html



RECENT POST

  • यूक्रेन युद्ध, भारत में कई जगह सूखा, बेमौसम बारिश,गर्मी की लहरों से उत्पन्न खाद्य मुद्रास्फीति
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     26-05-2022 08:44 AM


  • हम लखनऊ वासियों को समझनी होगी प्रदूषण, अतिक्रमण से पीड़ित जल निकायों व नदियों की पीड़ा
    नदियाँ

     25-05-2022 08:16 AM


  • लखनऊ के हरित आवरण हेतु, स्थानीय स्वदेशी वृक्ष ही पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे उपयुक्त
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:37 AM


  • स्वास्थ्य सेवा व् प्रौद्योगिकी में माइक्रोचिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग, क्या भारत बनेगा निर्माण केंद्र?
    खनिज

     23-05-2022 08:50 AM


  • सेलफिश की गति मछलियों में दर्ज की गई उच्चतम गति है
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:40 PM


  • बच्चों को खेल खेल में, दैनिक जीवन में गणित के महत्व को समझाने की जरूरत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:09 AM


  • भारत में जैविक कृषि आंदोलन व सिद्धांत का विकास, ब्रिटिश कृषि वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉवर्ड द्वारा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:03 AM


  • लखनऊ की वृद्धि के साथ हम निवासियों को नहीं भूलना है सकारात्मक पर्यावरणीय व्यवहार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:47 AM


  • एक समय जब रेल सफर का मतलब था मिट्टी की सुगंध से भरी कुल्हड़ की स्वादिष्ट चाय
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:47 AM


  • उत्तर प्रदेश में बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:52 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id