स्लीपर कोशिकाओं के कारण अप्रभावी हो रहे हैं जीवाणुनाशक

लखनऊ

 12-12-2018 12:13 PM
कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

आजकल अक्‍सर सुनने में आता है कि एंटीबायोटिक (Antibiotic) दवाएं असर नहीं कर रही हैं, जबकि यही दवाई पहले सबसे ज्‍यादा कारगर सिद्ध होती थी, तो ऐसा क्‍या हो रहा जो समान दवाई समान बीमारी पर कोई प्रभाव नहीं डाल रही हैं। इस तथ्‍य को गहनता से समझने के लिए हमें सबसे पहले समझना होगा इसके प्रमुख कारक के विषय में अर्थात जीवाणु के विषय में। यह एककोशिकीय जीव प्रकृति में सर्वत्र पाया जाता है जिनमें से कुछ लाभदायक होते हैं तो कुछ रोग जनक।

रोगजनक जीवाणुओं को नष्‍ट करने के लिए एंटीबायोटिक दवाएं बनाई जाती हैं, किंतु कुछ समय से यह प्रभावी नहीं हो रही हैं। इन समस्‍याओं को देखते हुए वैज्ञानिकों ने जीवाणुओं की कोशिका का अध्‍ययन करना प्रारंभ किया जिसे ज्ञात हुआ किे ये जीवाणु स्‍वयं को इन एंटीबायोटिक दवाएं के प्रतिरोधी के रूप में तैयार कर रहे हैं, ये अपने डीएनए को इस प्रकार विकसित कर रहे हैं जिससे इनके शरीर की कोशिका जीवाणुनाशक दवाओं को शरीर में प्रवेश ही ना करने दे या उन्‍हें शरीर से निष्‍कासित कर दें। साथ ही जीवाणुनाशक दवाओं को इनकी आकृति के अनुसार तैयार किया जाता है, अतः इससे बचने के लिए यह जीवाणु अपनी आकृति में परिवर्तन कर देते हैं या इनकी कोशिकाएं प्रतिक्रिया करना बंद कर देती हैं तथा लम्‍बे समय के लिए निष्‍क्रिय हो जाती हैं, जिसे "स्लिपर सैल" (Sleeper Cell) या परसिस्‍टर्स (Persisters) जीवाणु कहा जाता है, जिनकी खोज 1944 में की गयी थी। जैसे ही जीवाणुनाशक दवाओं का उपयोग बंद किया जाता है, तो ये परसिस्‍टर्स पुनः सक्रिय हो जाते हैं, एक नवीनतम शोध से ज्ञात हुआ है कि जब परसिस्‍टर्स शरीर की प्रतिरक्षा कोशिकाओं में छिपे होते हैं, उस दौरान ये हमारे प्रतिरक्षा तंत्र का अभिन्‍न अंग मैक्रोफ्गेस(macrophages) की मारक क्षमता को कम कर देते हैं, साथ ही जीवाणुनाशक दवाओं को बंद करने के बाद ये हमारे शरीर में अन्‍य घातक रोग भी उत्‍पन्‍न कर सकते हैं।

परसिस्‍टर्स प्रमुखतः सूक्ष्‍म जीवाणुओं को जीवाणुनाशक दवाओं से बचाने के लिए अस्‍थाई रूप से सक्रिय होते हैं। इनकी कोई विशेष प्रजाति नहीं है, इन्‍हीं के प्रभाव के कारण तपेदिक जैसी बीमारियां सही होने में लम्‍बा समय ले लेती हैं। स्विस फेडरल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (Swiss Federal Institute of Technology) के यूइची वेकमोटो और नीरज धर ने परसिस्‍टर्स की इस धारणा पर प्रश्‍न उठाया कि ये बढ़ते नहीं है या बहुत धीमी गति से बढ़ते हैं, इनके द्वारा किये गये अध्‍ययन से ज्ञात हुआ कि तपेदिक के लिए माइकोबैक्टेरियम स्मेग्मैटिस (Mycobacterium smegmatis) उत्‍तरदायी हैं तथा परसिस्‍टर्स बढ़ते हैं किंतु ये सामन दर पर मरते भी हैं, इसलिए इनकी आबादी के लिए भ्रम उत्‍पन्‍न हो जाता है। किंतु वैज्ञानिकों का मानना है कि परसिस्‍टर्स की वास्‍तविक जीवन प्रणाली के विषय में अभी हमें ज्‍यादा जानकारी प्राप्‍त नहीं हुयी हैं। हालांकि वैज्ञानिक अब जीवाणुओं के विरूद्ध अपनी रणनीति बदलने का प्रयास कर रहे हैं, वे खोज कर रहे हैं कि किस प्रकार हमारे प्रतिरक्षा तंत्र में उपस्थित परसिस्‍टर्स को समाप्‍त किया जाए।

डॉ हेलैन बताते हैं कि: "परसिस्‍टर्स पहले की तुलना में हमारे प्रतिरक्षा तंत्र पर अधिक गहरा प्रभाव डाल रहे हैं, फिर भी वे जीवाणु की संभावित कमजोरी को प्रकट कर देते हैं। परसिस्‍टर्स का उपचार करना मुश्किल होता है, क्योंकि वे एंटीबायोटिक्स के लिए अदृश्य होते हैं, लेकिन परसिस्‍टर्स की हमारी प्रतिरक्षा कोशिकाओं को कमजोर करने की प्रक्रिया के दौरान इन्‍हें समाप्‍त किया जा सकता है। हम संभावित रूप के इनकी कार्यप्रणाली को लक्षित कर कुशलतापूर्वक इनके संक्रमण का उपचार कर सकते हैं।"

संदर्भ :

1. https://www.nationalgeographic.com/science/phenomena/2013/01/03/sleeper-cells-the-secret-lives-of-invincible-bacteria/
2. https://www.sciencedaily.com/releases/2018/12/181207112735.htm



RECENT POST

  • कैसे हुई विश्व शांति दिवस मनाने की शुरुआत?
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     22-09-2019 09:35 AM


  • ग्वालियर घराने के निम्न दिग्गज असल में थे लखनवी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     21-09-2019 12:19 PM


  • पुरानी यादों को तरोताज़ा करती है विभिन्न वस्तुओं की महक
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     20-09-2019 12:12 PM


  • चाईनीज़ चेकर से मिलता जुलता भारतीय सुरबग्घी का खेल
    हथियार व खिलौने

     19-09-2019 11:56 AM


  • चंद्रमा की सतह पर अभी भी जीवित हैं टार्डिग्रेड्स
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     18-09-2019 11:05 AM


  • लखनऊ में हुई थी दम बिरयानी की उत्पत्ति
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     17-09-2019 11:06 AM


  • जीन में फेरबदल कर बन सकते हैं डिज़ाइनर बच्चे
    डीएनए

     16-09-2019 01:31 PM


  • जे. सी. बोस का भारतीय अभियांत्रिकी और विज्ञान में अमूल्य योगदान
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     15-09-2019 02:14 PM


  • अवध और लॉर्ड वैलेस्ली की सहायक संधि
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     14-09-2019 10:05 AM


  • बीते समय के अवध के शाही फव्वारे
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     13-09-2019 01:37 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.