भारतवासियों की इन्टरनेट आदतें एवं भारत में इन्टरनेट का भविष्य

लखनऊ

 05-01-2019 01:08 PM
संचार एवं संचार यन्त्र

भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्‍या दिन प्रतिदिन तीव्रता से बढ़ती जा रही है, जिस कारण भारतीय स्‍थानीय भाषाएं भी इंटरनेट जगत में अपना स्‍थान बना रहीं हैं। भारत में 1600 से अधिक बोलियों तथा लगभग 30 भाषाएं बोली जाती हैं जिनमें से 22 भाषाओं को भारतीय संविधान द्वारा आधिकारिक भाषाओं के रूप में स्वीकार किया गया है। अप्रैल 2017 में भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के विकास पर प्रकाश डालते हुए, गूगल और केपीएमजी (KPMG) ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की जिसके अनुसार भारत में स्‍थानीय भाषा के आधार पर इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्‍या पिछले कुछ वर्षों (2011-2016) में 41% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) से बड़ी है, यह वृद्धि दर अंग्रेजी भाषा की तुलना में काफी तीव्र है। इनकी संख्‍या वर्ष 2016 में 23.4 करोड़ तक हो गयी थी। यह संख्‍या वर्ष 2021 तक 18% की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से 53.6 करोड़ तक पहुंच जाऐगी। जिसमें प्रत्‍येक 10 नए उपयोगकर्ताओं में 9 भारतीय भाषा के होंगे।



डिजिटल भारत में प्रत्‍येक क्षेत्र का डिजिटलीकरण किया जा रहा है, तब चाहे वह शिक्षा का क्षेत्र हो, व्‍यवसाय का क्षेत्र हो या अन्‍य कोई क्षेत्र। भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं प्रयोग की जाने वाली ऑनलाइन सामग्रियों को निम्‍न श्रेणियों में विभक्‍त किया गया है:

परिपक्व श्रेणियां
90 फिसदी से अधिक भारतीय भाषा में इंटरनेट का उपयोग करने वालों ने चैट एप्लिकेशन और डिजिटल मनोरंजन पर एक्सेस किया। 2016 में इनकी वृद्ध‍ि दर सबसे ज्‍यादा रही।

विकासशील श्रेणियां
सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म और डिजिटल समाचार बढ़ रहे हैं - 30 करोड़ भारतीय भाषा उपयोगकर्ता उन्हें इस्तेमाल कर रहे हैं। मोबाइल उपकरणों में भारतीय भाषाओं का प्रयोग तथा क्षेत्रीय भाषा में आवश्‍यक सामाग्री की उपलब्‍धता, भारतीय भाषा में उपयोकर्ताओं की संख्‍या में वृद्धि करेगा।

उभरती हुई नई श्रेणियां
भारतीय भाषा के आधार पर डिजिटल राइट-अप, डिजिटल भुगतान, ऑनलाइन सरकारी सेवा, ई-टेलिंग और डिजिटल वर्गीकरण की श्रेणियों को उपयोगकर्ताओं के लिए तैयार किया जाएगा हैं। अगले पाँच वर्षों में इन श्रेणियों तक पहुँचने वाली भारतीय भाषा उपयोगकर्ताओं की वृद्धि दर 26% से 33% हो जाऐगी।

भारतीय भाषा इंटरनेट के भविष्य के रुझान (2021)

1. वहननीय भारतीय भाषा की बढ़ती पैठ का समर्थन करने वाले स्मार्टफ़ोन उपयोगकर्ताओं के अनुसार ऑनलाइन सामग्री उपलब्‍ध करा कर इनकी संख्‍या में वृद्धि करेंगे।
2. डिजिटल साक्षरता में सुधार के साथ-साथ इंटरनेट और इंटरनेट के संचालन में होने वाले व्यवसायों की बढ़ती पहुंच से उपयोगकर्ताओं को मनोरंजन से लेकर ऑनलाइन लेनदेन में तक काफी सुविधा मिलेगी।
3. अधिक उपयोगकर्ताओं को आकर्षित करने के लिए इंटरनेट सामाग्रियों को भारतीय भाषा में स्‍थानीय क्षेत्रों पर ध्‍यान केंद्रित करते हुऐ तैयार किया जाऐगा।
4. व्‍यवसायों द्वारा भारतीय भाषाओं के उपयोगकर्ताओं बाजार तक पहुंचने के लिए स्‍थानीय भाषा में डिजिटल प्रणाली तैयार करने हेतु निवेश किये जाऐंगे।
5. भारतीय भाषा में मोबाइल अनुरूप सामग्री भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ता के बीच ऑनलाइन सेवाओं को अपनाने के लिए एप्‍लीकेशन और वेबसाइटों को तैयार करने में सक्षम होगी।
6. भारतीय भाषा के उपयोगकर्ताओं को अपनी स्थानीय भाषा में डिजिटल विज्ञापन के लिए उच्च प्रसार करने के लिए डिजिटल माध्यम में स्थानीय भाषा के विज्ञापनों की हिस्सेदारी बढ़ जाएगी।
7. डिजिटल माध्‍यमों में विज्ञापन के लिए स्‍थानीय भाषाओं का प्रयोग बढ़ जाएगा।
8. बहु भाषा डेटा एनालिटिक्स वैश्लेषक क्षमताओं का निर्माण व्यवसायों और सामग्री उत्‍पादक के लिए अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।

क्यों बढ़ रहा है भारतीय भाषाओं का ई-टेलिंग में उपयोग:

1) भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ता ई-टेलिंग में उत्पाद के रेंज और सुविधा को प्रमुख लाभ मानते हैं। वहीं 90% से अधिक उपयोगकर्ताओं को नकद लाभ और छूट लाभदायक नहीं लगते हैं।
2) लगभग 25% भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को ई-टेलर द्वारा प्रदान किया गया भुगतान अंतराफलक के उपयोग के संबंध में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, जिससे इस स्तर पर संभावित निर्गम पात हो जाते हैं।
3) लगभग 44% भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं को अंग्रेजी में लिखे हुए उत्पाद के विवरण और ग्राहक की समीक्षाओं को समझना मुश्किल होता है। फैशन और जीवन शैली जैसी उच्च भागीदारी श्रेणियों को उत्पाद के विवरण और ग्राहक की समीक्षाओं में भारतीय भाषाओं को डालने की आवश्यकता है।
4) लगभग 50% हिंदी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की तुलना में 75% तमिल और तेलुगू भाषी इंटरनेट उपयोगकर्ताओं द्वारा ई-टेलिंग वेबसाइटों में स्थानीय भाषा से एक्सेस करने का स्र्झान दिखाते हैं।
5) भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच उच्च जागरूकता के बावजूद, भाषायी अवरोध सुविधापूर्ण कारक ई-टेलिंग के उपयोग को प्रभावित करते हैं।

क्यों बढ़ रहे हैं डिजिटल भुगतान करने वाले भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ता:

1) डिजिटल भुगतान में एक्सेस करने वाले भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की कुल हिस्सेदारी 2021 तक 28% से बढ़कर 43% होने की उम्मीद है, जिससे अंग्रेजी भाषा के केवल 57% उपयोगकर्ता रह जाएंगे।
2) 75% से अधिक भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ता बैंक प्रचारित वेबसाइटों और ऍप्लिकेशन्स के बजाए मोबाइल वॉलेट को चुनते हैं। जिसमें से चुनिंदा मोबाइल वॉलेट्स ने अपने प्लेटफॉर्म पर भारतीय भाषा को शामिल किया है।
3) लगभग 33% भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ता ऑनलाइन लेनदेन में प्रदान की गयी सुरक्षा को सबसे अहम मानते हैं।
4) ऑनलाइन सेवाओं के बारे में पता होने के बावजूद, लगभग 58% भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने ऑनलाइन पारिस्थितिकी तंत्र में भाषा अवरोध के कारण ऑफ़लाइन प्रणाली के उपयोग को जारी रखा। तमिल, तेलुगू और कन्नड़ उपयोगकर्ताओं में 2021 तक उनके आधे से अधिक उपयोगकर्ता में वृद्धि की संभावना है।

डिजिटल समाचार पड़ने करने वाले भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ता:

1) 3.2 करोड़ भारतीय भाषा उपयोगकर्ता डिजिटल माध्यम पर विशेष रूप से समाचारों को पड़ते हैं। डिजिटल समाचार पर एक्सेस करने वाले वर्तमान उपयोगकर्ता के आधार पर यह एक तिहाई है।
2) 60% से अधिक भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ता क्षेत्रीय समाचारों को पड़ना पसंद करते हैं। विभिन्न समाचार कंपनियों द्वारा क्षेत्रीय समाचारों को स्थानीय भाषाओं में प्रसारित किया जाएगा।
3) 2021 तक डिजिटल समाचार में एक्सेस करने वाले हिंदी, मराठी, बंगाली और तमिल भारतीय भाषा उपयोगकर्ता का 80% हिस्सा बनेंगे।
4) डिजिटल समाचार सामग्री को मोबाइल उपकरणों पर पड़े जाने के लिए सुधार करने की अवश्यकता है क्योंकि लगभग 99% भारतीय भाषा इंटरनेट उपयोगकर्ता मोबाइल उपकरणों पर ऑनलाइन सामग्री का उपयोग करते हैं।
5) 56% भारतीय भाषा के इंटरनेट उपयोगकर्ता जो डिजिटल समाचार का उपयोग नहीं करते हैं, उनकी ऑनलाइन क्षेत्रीय समाचार सामग्री की बढ़ती उपलब्धता के साथ अपनाने की संभावना की जा सकती है।

संदर्भ:
1.https://bit.ly/2qGod0Y



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