भारत में टाइपराइटर का इतिहास एवं इसकी लौटती लोकप्रियता

लखनऊ

 12-01-2019 10:00 PM
वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

कंप्यूटर क्रांति के इस दौर ने पूरी दुनिया में जिस एक चीज को सबसे ज़्यादा प्रभावित किया है, वह है टाइपराइटर। कभी हर कार्यालय और हर घर का एक अभिन्न हिस्सा माना जाने वाला टाइपराइटर धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में समाता जा रहा है। लेकिन अभी भी अधिकांश न्यायिक कार्य टाइपराइटर का उपयोग करके किए जाते हैं।

टाइपराइटर का आविष्कार चरणबद्ध रूप में हुआ है। सर्वप्रथम 1575 में एक इतालवी प्रिंटमेकर आया था। उसके बाद 1714 में, हेनरी मिल द्वारा ब्रिटेन में एक मशीन (machine) का पेटेंट (patent) प्राप्त हुआ था, जो टाइपराइटर के समान प्रतीत होता है। 1808 में इतालवी पेलेग्रिनो तुरी ने एक टाइपराइटर का आविष्कार किया था। साथ ही उन्होंने अपनी मशीन में स्याही प्रदान करने के लिए कार्बन पेपर का भी आविष्कार किया। 1823 में इतालवी पिएत्रो कोंटी डि सिलवेगना ने टाइपराइटर के एक नए मॉडल का आविष्कार किया था। 1865 में, डेनमार्क के रेव रसमस मलिंग-हेन्सन ने हेन्सन राइटिंग बॉल का आविष्कार किया, जो पहला व्यावसायिक रूप से बेचा गया टाइपराइटर था।

वहीं एशिया में सबसे पहले टाइपराइटर का निर्माण वर्ष 1955 में भारत में हुआ था। पहले मैनुअल टाइपराइटर को विशेष रूप से भारतीय इंजीनियरों द्वारा अकेले डिजाइन और निष्पादित किया गया था। और इसको बनाने का विचार नवल गोदरेज द्वारा दिया गया था। 1980 के दशक के अंत तक, गोदरेज द्वारा एक साल में 50,000 टाइपराइटर बेचे जाते थे। वहीं इसका आखिरी संयंत्र 2009 में महाराष्ट्र के शिरवाल में था।

1930 के दशक में अमेरिका में 96% टाइपिस्ट महिलाएं थी। वह कार्यस्थल पर उनके साथ हो रहे शोषण के कारण नारीवादी आंदोलन से जुड़ी हुई थी, क्योंकि उस समय यह एकमात्र ऐसा कार्य था जो महिलाओं को मिल सकता था। एक दिलचस्प बात यह है कि भारत में पहली बार आने वाले अधिकांश टाइपराइटर अमेरिकी थे। ब्रिटेन में भी, अधिकांश टाइपराइटर अमेरिकी थे। वहीं टाइपराइटर के प्रति गांधी जी का दृष्टिकोण सामान्य था, उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में टाइपराइटर का इस्तेमाल किया, और टाइपिस्टों (typists) को नियुक्त भी किया था। बाद में उनके जीवन में टाइपराइटर का मूल्य कम हो गया था, लेकिन जरूरत पड़ने पर वे इसका उपयोग करते थे। उदाहरण के लिए, 1926 में, गांधी ने अपनी एक पश्चिमी महिला शिष्या एस्थेर मेनन को लिखा था कि वे भी टाइपराइटर से घृणा करते हैं, बस इसका कभी-कभार उपयोग कर लेते हैं जैसे वह अन्य कई चीजों का करते है। उनको अगर टाइपराइटर से दूर कर दिया जाए तो उन्हें इक कोई अफसोस नहीं होगा। उन्हों नें ये भी लिखा की वह इसका उपयोग इसलिए भी कर लेते है क्योकि इससे उनका काफी समय बचता है।

वर्तमान में टाइपराइटर इतना लोकप्रिय नहीं है, लेकिन कई युवाओं में टाइपराइटर की अहमियत बढ़ रही है। कई जगह सरकारी परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए टाइपराइटर में टाइप करने की परीक्षा ली जाती है, जिस वजह से युवाओं द्वारा टाइपराइटर को सीखने का जुनून अभी भी बरकरार है। वहीं कुछ युवाओं द्वारा अपने लेखन को लिखने के दौरान लैपटॉप से विचलित होने के कारण टाइपराइटर का उपयोग करना शुरू किया जा रहा है। पेपरलेस पोस्टकार्ड (Paperless Postcards) की संस्थापक, पोद्दार इसे ‘डिजिटल डिटॉक्स (digital detox)’ मानती है।

संदर्भ :-

1.https://bit.ly/2Fsuzei
2.https://bit.ly/2QETKvM
3.https://bit.ly/2gRUTmM
4.https://bit.ly/2TKrIBg

5.
https://bit.ly/2SMJOlZ6.https://en.wikipedia.org/wiki/Typewriter



RECENT POST

  • लखनऊ बना देश का पहला सीसीटीवी शहर
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-07-2019 11:34 AM


  • क्या दूसरे ग्रहों के जीव आये थे लखनऊ भ्रमण पर?
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     18-07-2019 12:01 PM


  • उत्तर प्रदेश में पाये गये हैं सबसे अधिक उत्खनन स्थल
    खदान

     17-07-2019 01:45 PM


  • जब मिले सुकरात एक भारतीय योगी से
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-07-2019 02:20 PM


  • सामाजिक उत्थान और एकता का प्रतीक है लखनऊ स्थित अंबेडकर पार्क
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-07-2019 12:52 PM


  • शास्त्रीय संगीत में लखनऊ की विधा – ठुमरी
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनि

     14-07-2019 09:00 AM


  • भारतीय और पाश्‍चात्‍य तर्कशास्‍त्र एवं उनके बीच भेद
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     13-07-2019 12:05 PM


  • ग़दर के समय लखनऊ में स्थित ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का वर्णन करती एक पेंटिंग
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-07-2019 01:02 PM


  • लखनऊ के आसपास स्थि‍त बड़हल के वृक्ष के उपयोग और फायदे
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     11-07-2019 12:54 PM


  • जीवन के लिये अनमोल है पानी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     10-07-2019 01:13 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.