दुनिया और भारत के विभिन्न प्रकार के मगरमच्छ

लखनऊ

 31-01-2019 01:34 PM
रेंगने वाले जीव

पानी और धरती पर रहने वाले ये सरीसृप दिखने में भी बहुत ही अजीब और डरावने लगते हैं। मजबूत जबड़ा, लम्बा और उबड़-खाबड़ शरीर, फुर्तीला इतना कि पलक झपकते ही अपने शिकार को अपने दांतों में दबा दे। हम बात कर रहे हैं इस धरती पर मौजूद सबसे खतरनाक जानवरों में से एक मगरमच्छ की। इन की त्वचा कड़े श्रृंगीय शल्क एवं अस्थिल प्लेटों से युक्त होती है। इनके लंबे थूथन पर बाह्य नासाछिद्र बने होते हैं। ये हमेशा से ही मानव संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। इन्हें मूर्तिकला और चित्रकला में कई हिंदू देवी-देवताओं के साथ चित्रित किया गया है। माना जाता है ये डायनासोर के जमाने के जीव है। मगरमच्छ बड़े जलीय सरीसृप हैं जो पूरे एशिया, अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में रहते हैं।

आज विश्व में इसकी कुल 23 अलग-अलग मगरमच्छ प्रजातियां पायी जाती है जिनमें से कुछ विलुप्ति की कगार पर है। यदि भारत की बात करे तो भारत में तीन प्रकार की मगर की प्रजातियां पाई जाती हैं, जिनमें स्वच्छ जलीय मगरमच्छ (क्रोकोडायलस् पेलुस्ट्रिस), घड़ियाल (गेवेलियस गेंगेटिकस) तथा खारा जलीय मगरमच्छ (क्रोकोडायलस् पोरोसस) हैं। मगरमच्छ भयानक मांसभक्षी जानवर है एवं अलवणीय और लवणीय जल दोनों में रहता है। सारी दुनिया में विभिन्न प्रकार के मगरमच्छ पाये जाते हैं। इनमें से कुछ प्रकार निम्न हैं:-

अमेरिकी मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस एक्युटस - Crocodylus acutus): यह अमेरिका में पाए जाने वाले मगरमच्छ की सबसे व्यापक प्रजाति है। यह प्रजाती कैरेबियन बेसिन में, कैरिबियन द्वीपों और दक्षिण फ्लोरिडा सहित अटलांटिक से मैक्सिको के प्रशांत तट तक तथा दक्षिण में दक्षिण अमेरिका के पेरू और वेनेजुएला तक फैली हुई है। इस प्रजाती के नर लगभग 20 फीट लंबे या उससे भी लंबे हो जाते हैं यह खतरनाक और एक दुर्लभ हमलावर है।

नाइल मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस नाइलोटिकस- Crocodylus niloticus): नाइल मगरमच्छ एक अफ्रीकी मगरमच्छ है, जो अफ्रीका में सबसे बड़े ताजा पानी के शिकारी है, और इसे दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा सरीसृप माना जा सकता है। औसतन, वयस्क पुरुष नाइल मगरमच्छ लंबाई में 11.6 से 16.5 फीट के बीच होता है। नाइल मगरमच्छ पूरे उप-सहारा अफ्रीका में काफी व्यापक है, और झीलों, नदियों और मार्शलैंड जैसे विभिन्न प्रकार के जलीय वातावरण में रहता है।

खारे पानी के मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस पोरोसस- Crocodylus porosus): यह दुनिया का सबसे खतरनाक और बड़े आकार का जीवित सरीसृप है। इस प्रजाती के नर आकार में 20.7 फीट तक बढ़ते हैं। यह ज्यादातर समुद्री वातावरण में रहता है। हालांकि, यह आमतौर पर डेल्टास, दलदलों, समुद्र-ताल और मुहानों जैसे खारे आवास में पाया जाता है। इन प्रजातियों में मगरमच्छों की अन्य प्रजातियों की सबसे विस्तृत श्रृंखला शामिल है और यह पूरे भारतीय उपमहाद्वीप, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण पूर्व एशिया में पाये जाते हैं।

भारत में आप इन्हे मुख्य रूप से भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, ओडिशा (ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले यह उद्यान एक दलदली क्षेत्र और मैन्ग्रोव वन वाला क्षेत्र है। यह उद्यान भारत में सबसे बड़े खारे पानी के मगरमच्छों, भारतीय अजगर और किंग कोबरा जैसे सरीसृपों की कई अन्य प्रजातियों का घर है।) और सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान पश्चिम बंगाल (यह उद्यान गंगा डेल्टा पर मैंग्रोव वन द्वारा पूरी तरह से घिरा हुआ है और खारे पानी के मगरमच्छों सहित कई सारी सरीसृप प्रजातियों का घर हैं।) में देख सकते है।

ब्लैक कैमन (मेलानोचुचस नाइजर- Melanosuchus niger): यह हरे रंग का होता है। दक्षिणी अमरीका में झीलों और धाराओं के आसपास पाए जाने वाले ये ब्लैक कैमन दुनिया के सबसे बड़े मगरमच्छों में से एक हैं जिनकी लंबाई 17-20 फीट तक होती है।

क्यूबा मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस रोम्बीफर- Crocodylus rhombifer): क्यूबा मगरमच्छ एक छोटे मगरमच्छ की प्रजाति है जो केवल क्यूबा में पाई जाती है। वयस्क मगरमच्छ 6.9 से 7.5 फीट के बीच की लंबाई में होता है और इसका वजन 70 से 80 किलोग्राम के बीच होता है।

घड़ियाल (गैविएलिस गैंगीटिकस- Gavialis gangeticus): घड़ियाल की विशिष्टताओं में से एक यह है कि इसमें एक लंबी और पतली थूथन होती है। इनके पास बहुत कम दांत हैं। इनका औसत आकार 15 फीट तक होता है। यह भारतवर्ष के उत्तरी भाग की नदियों में पाया जाता है।

घड़ियाल भारत की प्रमुख नदी प्रणालियों जैसे गंगा, चंबल, काली, कोसी, गंटक, महानदी और सोन नदी में पाए जाते हैं। आप इन्हे विशेष रूप से राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य, राजस्थान / मध्य प्रदेश (भारत में घड़ियाल की सबसे बड़ी आबादी और गंगा नदी डॉल्फिन इस अभयारण्य की नदी में पायी जाती है) और कतर्नियघाट वन्य जीवन अभयारण्य, उत्तर प्रदेश में देख सकते है। कतर्नियघाट वन्य जीवन अभयारण्य बहराइच जनपद जिले (जोकि लखनऊ से 130 किलोमीटर की दूरी पर है) के तराई में स्थित है और घड़ियाल की लुप्तप्राय प्रजातियों का घर है। यह अभयारण्य भारत में घड़ियाल को उनके प्राकृतिक आवास में देखने के लिए सबसे अच्छे स्थानों में से एक है।

बौने मगरमच्छ (ऑस्टेओलेमस टेट्रास्पीस -Osteolaemus tetraspis): यह सबसे छोटा जीवित मगरमच्छ है जो मध्य-पश्चिम उप-सहारा और पश्चिम अफ्रीका के तराई क्षेत्रों में रहता है। इस प्रजाति के वयस्कों की औसत लंबाई 4.9 फीट होती है। यह मुख्य रूप से निशाचर प्रजाति है और इसे IUCN द्वारा असुरक्षित प्रजाति के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

पश्चिम अफ्रीकी मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस सूचस- Crocodylus Suchus): रेगिस्तानी मगरमच्छ या पश्चिमी अफ्रीकी मगरमच्छ उप-सहारा अफ्रीका में एक विस्तृत श्रृंखला में पाया जाता है। ये स्वभाव में काफी विनम्र होते है।

सियामेसे (Siamese) मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस सियामेंसिस Crocodylus siamensis): यह एक गंभीर रूप से लुप्तप्राय मगरमच्छ प्रजाति है जो इंडोनेशिया, पूर्वी मलेशिया, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम और थाईलैंड के बोर्नियो और जावा द्वीपों के नदियों, धाराओं, और दलदल में रहने वाले निवासी है। वयस्क लगभग 6.9 फीट लंबे होते हैं और इनका लगभग 40 से 70 किलोग्राम वजन होता है।

स्वच्छ जलीय मगरमच्छ या मुगर मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस पेलुस्ट्रिस- Crocodylus palustris): इस प्रजाति को विभिन्न क्षेत्रों में भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता है। यह मीठे पानी में रहने वाली प्रजाति है और यह पाकिस्तान का राष्ट्रीय सरीसृप है। ये प्रजाति पूरे भारतीय उप-महाद्वीप में पायी जाती है और 13 से 16 फीट तक लंबी होती हैं।

यह भारत में पायी जाने वाली मगरमच्छों की तीन प्रजातियों में से एक हैं। भारत में ये ज्यादातर मीठे पानी के तालाबों, झीलों, प्रमुख नदियों और मानव निर्मित जलाशयों में रहते है। आप इनको मुख्य रूप से आप इंदिरा गांधी वन्यजीव अभयारण्य, तमिलनाडु में देख सकते है। इस अभयारण्य में अमरावती नदी के पार अमरावती बांध है और जलाशय हैं यह पर इस प्रजाति की सबसे बड़ी आबादी पायी जाती है। साथ ही साथ ये चिन्नार, थेनार और पंबर नदियों में भी पायी जाती है।

न्यू गिनी के मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस नोवेगिनी- Crocodylus novaeguineae): यह न्यू गिनी द्वीप पर रहने वाला एक छोटा मगरमच्छ है और मीठे पानी की झीलों और दलदलों में निवास करता है। इन सरीसृपों द्वारा भोजन के रूप में छोटे स्तनधारियों और मछलियों का शिकार किया जाता है।

मोरलेट का मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस मोरेलेटि- Crocodylus moreletii): यह एक मध्यम आकार का मगरमच्छ है जो ग्वाटेमाला, बेलीज और मैक्सिको के अटलांटिक क्षेत्रों में मीठे पानी के स्थानों में रहता है। इस मगरमच्छ की लंबाई 9.8 फीट तक होती है, यह गहरे भूरे रंग का होता है और इसकी थूथन चौड़ी होती है।

फिलीपीन मगरमच्छ (क्रोकोडाइलस मिन्डोरेंसिस- Crocodylus mindorensis): यह फिलीपीन की स्थानीय और लुप्तप्राय प्रजातियों में से एक है। व्यावसायिक उद्देश्यों के कारण इनका शिकार काफी किया गया परंतु फ़िलिपीन सरकार द्वारा कड़े नियमों ने इनके शिकार पर रोक लगा दी है।

ओरिनोको मगरमच्छ (क्रोकोडायलस इंटरमेड्यूस- Crocodylus intermedius): यह प्रजाति दक्षिण अमेरिका में वेनेजुएला और कोलम्बिया के मीठे पानी के स्थानो में पायी जाती है। यह अमेरिका के सबसे बड़े मगरमच्छों में से एक है और 13 फीट तक लम्बा हो सकता है।

सुडौल थूथन वाला मगरमच्छ (मेकिस्टॉप्स कैटाफ्रेक्टस- Mecistops cataphractus): यह पश्चिमी और मध्य अफ्रीका के मीठे पानी के स्थानों में पाया जाता है। एक वयस्क लगभग 8.2 फीट लम्बा और 125 से 325 किलोग्राम वजनी होता है।

दुखद बात ये है कि लगातार मनुष्य द्वारा मगरमच्छ के शिकार और इनके प्राकृतिक निवास स्थान में हस्तक्षेप के कारण इनकी तमाम प्रजातियां लुप्त की कगार पर है और बहुत सी तो लुप्त हो चुकी हैं। यह उन जानवरों में से हैं जो इंसानों से भी पहले से धरती पर हैं पर शायद मनुष्य के लाभ के कारण इनके बढ़ते हुए शिकार की वजह से यह समय से पहले ही धरती से गायब हो जाएंगे। परंतु आज दुनिया सहित भारत में भी इन मगरमच्छों को बचाने के लिये कई कदम उठाये गये है, जिनमें से एक है मद्रास क्रोकोडाइल बैंक ट्रस्ट, यह भारत में पहला मगरमच्छ प्रजनन केंद्र है और भारतीय लुप्तप्राय प्रजातियों को बचाने के लिए प्रयास कर रहा है। गुजरात के वडोदरा शहर की विश्वामित्र नदी भी मगरमच्छों का घर है। यहाँ पर कोई भी शिकार नहीं करता है, इसलिये यहाँ सरीसृपों की जनसंख्या 260 से बढ़कर 450 हो गई है।

संदर्भ:

1.https://www.crocoworld.com/types-of-crocodiles/
2.https://www.worldatlas.com/articles/how-many-types-of-crocodiles-live-in-the-world-today.html
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Crocodilia_in_India
4.http://www.walkthroughindia.com/wildlife/5-best-places-see-3-crocodiles-species-india/



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