व्यवसाय के रुप में भारत में बर्फ कहाँ से आई?

लखनऊ

 05-02-2019 02:09 PM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

एक वह दौर भी था जब फ्रिज नहीं होते थे, और उस समय बर्फ एक कीमती वस्‍तुओं में गि‍नी जाती थी, और इसे केवल अमीर लोग ही खरीद सकते थे। लेकिन क्‍या आपने कभी यह सोचा है कि उस समय यह बर्फ आती कहाँ से थी? 19वीं सदी तक लोगों को गर्मी से निजात दिलाने वाली बर्फ के महत्‍व के बारे में नहीं पता था, बर्फ उनके समक्ष फ्रेडेरिक टुडोर द्वारा लायी गई थी।

यह उस समय की बात है जब फ्रेडेरिक टुडोर के भाई विलियम ने उनसे मजाक किया कि उन्हें घर के तालाब से बर्फ काटनी चाहिए और वेस्ट इंडीज में बेचनी चाहिए, इस बात को फ्रेडेरिक ने गंभीरता से ले लिया। उसके बाद फ्रेडेरिक ने विलियम को न्यू इंग्लैंड से कैरेबिया में बर्फ ले जाने का विचार बताया और तर्क दिया कि एक बार लोगों ने इसे आज़माया, तो वे इसके बिना कभी नहीं रहना चाहेंगे। इस विचार के बाद छह महीनों तक दोनों भाइयों ने अपने पैसे जमा करे और फ्रांसीसी द्वीप मार्टीनिक से कोई जहाज ले कर जाने का विचार किया। लेकिन बोस्टन में किसी ने उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया और ना ही कोई जहाज ले जाने को तैयार हुआ। अंत: फ्रेडरिक ने लगभग रु.3,55,337.5 का अपना खुद का एक जहाज खरीदा।

लेकिन शुरुआती दौर में बर्फ के व्यवसाय का उनका विचार विफल हो गया। हालांकि मार्टीनिक में बर्फ सही हालत में पहुंची, लेकिन वहाँ के लोगों ने बर्फ खरीदने से मना कर दिया और टुडोर द्वारा लोगों को कैरेबिया की गर्मी से निजात दिलाने में बर्फ के महत्‍व के बारे में बताने के बावजूद भी कोई भी बर्फ को खरीदना नहीं चाहता था। विफल शुरुआत के कारण विलियम इस साझेदारी से अलग हो गया और संपूर्ण व्यापार फ्रेडरिक को स्वयं ही संभालना पड़ा। कई उतार-चढ़ाव के बावजूद, फ्रेडरिक ने लगातार कार्य किया और उसके बर्फ के कारोबार को आखिरकार 1810 में मुनाफ़ा हुआ। अगले दशक के दौरान बर्फ के कारोबार में अधिक मुनाफ़े के लिए फ्रेडेरिक ने एक तरकीब का इस्‍तेमाल किया, उन्होंने लोगों को बर्फ के महत्‍व के बारे में बताने के लिए पहली बर्फ मुफ्त दी। 1819 में एक दक्षिण कैरोलिना बोर्डिंग हाउस में रहते हुए, फ्रेडरिक ने खाने की मेज पर ठंडा पेय पदार्थों शामिल किया, उनके साथी बोर्डर द्वारा एक-दो घूंट लेने के बाद वे भी इसके आदी हो गए। फ्रेडरिक ने देश भर में यात्रा की और सबको पहली बर्फ मुफ्त दी।

1821 तक, फ्रेडरिक के व्यवसाय में काफी वृद्धि हो गई थी। सावन, चार्लेस्टन, न्यू ऑरलियन्स और यहां तक कि हवाना में बर्फ की मांग होने लगी, लेकिन फिर भी उन्हें अपने संचालन को सुधारने की आवश्यकता थी। 1826 में नथानिएल वीथ को फ्रेडरिक ने अधिकर्मी के रुप में रखा, वहीं बड़े-बड़े ग्रिडों में बर्फ को काटने के लिए घोड़े की नाल का उपयोग करते हुए, वीथ द्वारा तेज़ कटाई विधि का आविष्कार किया गया। मजदूरों द्वारा बर्फ की कटाई कर, उन्हें नहरों में डुबो दिया जाता था। फिर एक कन्वेयर बेल्ट पानी से बर्फ को ऊपर खिंच के गोदाम तक ले जाती थी। वीथ के इन सरल तरीकों से कटाई में काफी सुधार हुआ। व्यापार में प्रगति के साथ-साथ उन्हें ‘आइस किंग’ के रूप में जाना जाने लगा।

फ्रेडरिक द्वारा 1833 में ब्रिटिश भारत के कलकत्ता में पहली बार बर्फ भिजवायी गयी, जब ब्रिटिश सरकार द्वारा इसकी घोषणा की गयी तो किसी को इस पर विश्‍वास नहीं हुआ किंतु जब वास्‍तव में बर्फ का जहाज कलकत्ता पहुंचा तो सब आश्‍चर्य चकित रह गये। बोस्टन से कलकत्ता तक की इस बर्फ की यात्रा को चार महीने लगे थे। इस बर्फ को पिघलने से बचाने के लिए बुरादे का इस्तेमाल किया गया था। आज भी हम सबसे पुराने सक्रिय कुछ बरफखानों को दिल्ली, लखनऊ, कराची और जयपुर जैसे शहरों में देख सकते हैं।

संदर्भ :-
1. http://mentalfloss.com/article/22407/surprisingly-cool-history-ice
2.https://www.huffingtonpost.in/sachin-garg/the-astonishing-story-of-how-ice-was-made-in-19th-century-india_a_21456920/



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