लखनऊ का स्वादिष्ट व्यंजन “शीरमाल”

लखनऊ

 15-02-2019 10:04 AM
स्वाद- खाद्य का इतिहास

लखनऊ में मुगलई खाने का प्रभाव हमेशा से ही अधिक रहा है। यहां की मेहमान नवाजी दिलों के बीच का फासला चुटकियों में मिटा देती है और चौराहों पर सुबह की चाय की चुस्की दिन बना देती है। वहीं यहाँ के लजीज मुगलई और अवधि व्यंजन पूरे देश में मशहूर है। लोग यहाँ दूर-दूर से लखनवी कबाब और बिरयानी का स्वाद चखने आते हैं। अवधियों के व्यंजन में शाकाहारियों के लिए भी एक बहुत ही स्वादिष्ट व्यंजन है और वह है “शीरमाल (शीर का अर्थ दूध और माल का अर्थ घी है)”।

शीरमाल को रमजान के दिन शाम को उपवास तोड़ने के लिए मसालेदार कोरमा और कबाब के साथ खाया जाता है। शीरमाल नवाबी रसोई और अवध अभिजात वर्ग के इतिहास को दर्शाती है। शीरमाल एक मीठी नान है, जिसे मैदा और खमीरा के साथ तंदूर या ओवन में पकाया जाता है। शीरमाल को पारंपरिक रूप से रोटी की तरह बनाया जाता था, लेकिन आजकल इसे नान की तरह तैयार किया जाता है। बस अंतर इतना है कि इसमें गर्म पानी के बजाए गर्म दूध के साथ चीनी डालकर मीठा किया जाता है साथ ही केसर और इलायची के साथ इसमें स्वाद डाला जाता है। ईरान में शीरमाल को कुछ मामूली बदलाव के साथ तैयार किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि नसीरुद्दीन हैदर के शासनकाल के में महमूद नामक एक विदेशी ने फिरंगी महल में एक छोटा सा रेस्तरां खोला था। नाहरी को बनाना उनकी खासियत थी और उसकी इस खासियत की लोकप्रियता दूर-दूर तक फैली थी। उन्होंने नाहरी के साथ खाने के लिए शीरमाल का अविष्कार किया और यह भोजन लखनऊ की एक विशिष्ट विशेषता बन गया।

भारत में फारसियों द्वारा तंदूर को पेश किया गया था, जिसमें बिना घी की सादी रोटियों और पूरियों को बनाया जाता था। पूरियों से प्रभावित होकर मुस्लिमों ने आटे में घी को मिश्रित करके पाराठों का अविष्कार किया। वहीं पराठों में अधिक सुधार करते हुए बाकरखानी का अविष्कार हुआ। हम में से अधिकांश लोग शीरमाल और बाकरखानी को एक समान समझते हैं, लेकिन ये दोनों एक दूसरे से भिन्न हैं।

तो आइए जानते हैं इनके मध्य अंतर को :‌‌-
बाकरखानी के आटे को दूध, देसी घी, ज़ाफ़रान (केसर), खोया, मलाई और सूखे मेवों को मिश्रित करके बनाया जाता है। वहीं बाकरखानी हैदराबादी है और शीरमाल अवधी है। बाकरखानी में कुछ अतिरिक्त तत्व (जैसे कि खसखस और तरबूज के बीज) होते हैं। दोनों में बहुत मामूली सी भिन्नता है, जिससे हम दोनों में पहचान कर सकते हैं।

संदर्भ :-
1.https://bit.ly/2BxsaMm
2.https://lucknowobserver.com/breaking-bread-with-amitabh-bachchan/
3.https://en.wikipedia.org/wiki/Sheermal



RECENT POST

  • देश के आर्थिक विकास और वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं प्रवासी भारतीय
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     20-10-2021 08:20 AM


  • मौलिद ईद उल मिलाद अर्थात पैगंबर मुहम्मद के जन्मदिन की दोहरी विचारधारा
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     18-10-2021 11:43 AM


  • दुनिया के सबसे बदसूरत जानवर के रूप में चुना गया है, ब्लॉबफ़िश
    शारीरिक

     17-10-2021 11:58 AM


  • क्या राजस्थान के रामगढ़ में मौजूद गड्ढा उल्कापिंड प्रहार का प्रभाव है
    खनिज

     16-10-2021 05:35 PM


  • उत्तरप्रदेश के लोकप्रिय व्यंजन ताहिरी की साधारणता में ही इसकी विशेषता निहित है
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-10-2021 05:22 PM


  • आजकल हो रहे हैं दशानन की छवियों के रचनात्मक प्रयोग
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-10-2021 05:58 PM


  • कई बार जानवर या पौधे की एकमात्र प्रजाति ही पाई जाती है पूरे भारत में
    निवास स्थान

     13-10-2021 05:57 PM


  • वृक्षों में इच्छाशक्ति‚ संवेदनशीलता व बुद्धिमत्ता का व्यवहार
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     12-10-2021 05:43 PM


  • हमें बढ़ते शहरीकरण नहीं, बेहतर शहरीकरण चाहिए
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     11-10-2021 02:15 PM


  • पृथ्वी पर सबसे महत्वाकांक्षी निर्माण परियोजना में से एक है,डायनेमिक टॉवर
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     10-10-2021 01:54 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id