क्यों मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस?

लखनऊ

 08-03-2019 11:27 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

हर साल 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। आपके दिमाग में ये सवाल जरूर उठता होगा कि इस परंपरा की शुरुआत कब से हुई? साथ ही महिला दिवस मनाने के पीछे मकसद क्या है और ये 8 मार्च को ही क्यों मानाया जाता है? इस दिवस का मकसद महिलाओं के प्रति सम्मान, उनकी प्रशंसा और उनके प्रति अनुराग व्यक्त करना है। इस दिन खासकर उन महिलाओं के प्रति सम्मान प्रकट किया जाता है जिन्होंने आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक क्षेत्रों में अहम उपलब्धियां हासिल की हैं और इसके इतिहास की बात करें तो सबसे पहले इसे साल 1909 में मनाया गया।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस वैश्विक उत्सव का एक सामूहिक दिन है और लैंगिक समानता का आह्वान करता है। इतिहास के अनुसार आम महिलाओं द्वारा समानाधिकार की यह लड़ाई शुरू की गई थी। 1900 का शुरुआती दौर औद्योगिक दुनिया में विस्तार तथा अशांति का समय था, इस समय जनसंख्या वृद्धि और कट्टरपंथी विचारधाराओं के उदय को भी देखा गया। फिर 1908 में, बढ़ती हुई अशांति और महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार, उत्पीड़न और असमानता को रोकने के लिये महिलाओं ने आंदोलन की शुरुआत की। 15,000 महिलाओं के समूह ने वरसेल्स में इस दिन एक मोर्चा निकाला, इसका उद्देश्य बेहतर वेतन और मतदान के अधिकार की मांग थी।

अमेरिका में सोशलिस्ट पार्टी के आह्वान पर, यह दिवस सबसे पहले 28 फ़रवरी 1909 को मनाया गया। इसके बाद यह 1913 तक फरवरी के आखिरी रविवार के दिन मनाया जाने लगा। उस समय इसका प्रमुख ध्येय महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिलवाना था, क्योंकि उस समय अधिकतर देशों में महिला को वोट देने का अधिकार नहीं था। 1910 में महिलाओं का दूसरा अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया था। यहाँ पर क्लारा ज़ेटकिन नामक एक महिला ने कामकाजी औरतों को एक अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाने का सुझाव दिया, उस समय सम्मेलन में 17 देशों की 100 औरतें मौजूद थीं और उन सभी ने इस सुझाव का समर्थन किया।

कोपेनहेगन में सहमति के निर्णय के बाद, 19 मार्च को पहली बार साल 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्ज़रलैंड में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया गया था। इस रैली में मताधिकार, महिलाओं के अधिकारों के लिए प्रचार करने, शिक्षित होने, सार्वजनिक पद संभालने और भेदभाव समाप्त करने आदि जैसे मुद्दों की मांग उठी। 1913-14 प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, रूसी महिलाओं द्वारा पहली बार शांति की स्थापना के लिए फरवरी माह के अंतिम रविवार को महिला दिवस मनाया गया। 1913 के बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को 8 मार्च को स्थानांतरित कर दिया गया। 1914 में यूरोप भर में महिलाओं ने युद्ध के खिलाफ अभियान चलाने और महिलाओं की एकजुटता व्यक्त करने के लिए रैलियां निकाली।

1917 तक विश्व युद्ध में रूस के 20 लाख से ज्यादा सैनिक मारे गए, रूसी महिलाओं ने फिर रोटी और शांति के लिए इस दिन हड़ताल की। हालांकि राजनेता इस आंदोलन के खिलाफ थे, फिर भी महिलाओं ने अपना आंदोलन चार दिन तक जारी रखा और इसके फलस्वरूप महिलाओं को वोट देने का अधिकार प्राप्त हुआ। उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था। जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी वो तारीख़ 23 फरवरी थी। ग्रेगेरियन कैलेंडर के अनुसार यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा। अब तो आप जान ही चुके होंगे की ये 8 मार्च को ही क्यों मनाया जाता है।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा 1975 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस को मनाया गया और मान्यता प्रदान की गयी। 1996 में संयुक्त राष्ट्र ने अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस को वार्षिक तौर पर एक थीम के साथ मनाना शुरू किया जोकि “अतीत का जश्न, भविष्य की योजना” थी। इसके बाद प्रत्येक वर्ष अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस एक खास थीम का इस्तेमाल कर मनाया जाता है। नीचे कुछ वार्षिक आधार दिये गये थीम हैं:

इस साल 2019 में भी इस दिन के लिये तैयारियां शुरू हो गई हैं, और इस साल की थीम "बैलेंस फॉर बैटर" (Balance for Better) अर्थात बेहतर के लिए संतुलन है। इस साल इस थीम का उद्देश्य नई सोच के साथ लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। आज व्यावसायिक अर्थव्यवस्था और समुदायों को फलने-फूलने के लिये समाज में महिलाओं की समान साझेदारी और सहयोग आवश्यक है। इसलिये बैलेंस फॉर बैटर अभियान पूरे साल चलाया जायेगा, ये केवल अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस तक सीमित नही रहेगा।

संदर्भ:
1. https://www.internationalwomensday.com/About
2. https://www.internationalwomensday.com/Theme
3. https://en.wikipedia.org/wiki/International_Women%27s_Day



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