तितलियाँ भी करती है परागण में मदद

लखनऊ

 13-03-2019 09:00 AM
तितलियाँ व कीड़े

हममें से अधिकांश लोग यही जानते हैं कि परागण केवल मधुमक्खियों द्वारा ही किया जाता है और प्रागण का सारा श्रेय हमारे द्वारा मधुमक्खियों को दे दिया जाता है। लेकिन वास्तव में परागण में तितलियों का भी सहयोग रहता है, कुछ फूल विशेष रूप से तितलियों द्वारा परागित होते हैं। वैसे तो हम जानते ही हैं कि फलों और सब्जियों के व्यावसायिक विकास में मधुमक्खियाँ महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन वे एक छोटे से क्षेत्रों में ही परागण करती हैं। वहीं तितलियां लंबी दूरी तक सफर करने में सक्षम होती हैं, और वे फूलों के पौधों में पराग को समान मात्रा में कवर कर लेती हैं।

विश्व भर में 1350 से अधिक विभिन्न प्रकार के पौधें होते हैं, जो हमें खाद्य पदार्थों, पेय, दवाओं के अलावा भी कई प्रकार के पदार्थ प्रदान करते हैं। इनमें से लगभग 1000 पौधें परागण पर निर्भर रहते हैं। परागण पर निर्भर खाद्य पदार्थों के उदाहरणों में सेब, जामुन, टमाटर, बीन्स, अनाज, मिर्च, चेरी, एवोकाडो और कॉफी शामिल हैं। हमारे पारिस्थितिक तंत्र के सुचारू रूप से चलने के लिए भी परागण महत्वपूर्ण है।

मधुमक्खी और तितली के अलावा भी कई अन्य परागण कर्ताएं भी हैं, जैसे चमगादड़, पतंगे और पक्षी आदि। परंतु इन परागणकर्ताओं की संख्या शहरीकरण और कीटनाशकों के अति प्रयोग की वजह से कम होती जा रही हैं। तितलियाँ भोजन की खोज करते समय बड़े फूलों के मकरंद का सेवन करती हैं और तभी उसके पैरों और शरीर पर पराग इकट्ठा हो जाता है। तितलियां मकरंद का सेवन अपनी शुंड का उपयोग कर के करती हैं। तितलियों के पैर और शुंड लंबे होते हैं, जिस कारणवश फूलों के पराग मधुमक्खियों की तुलना में इनके शरीर के हिस्सों पर कम इकट्ठा होता है, लेकिन फिर भी वे बहुत प्रभावी परागणक होती हैं।

मधुमक्खियां फूलों के शीर्ष के अंदर और बाहर उड़ती हैं, जिससे उनके शरीर के सभी हिस्सों पर पराग इकट्ठा हो जाता है। साथ ही तितलियाँ दिन के दौरान परागण करती हैं जब फूल खुले होते हैं और उनमें रंगों को समझने की समझ मधुमक्खियों से ज्यादा बेहतर होती हैं। वे अपना पसंदीदा रंग लाल को देख सकते हैं, जो मधुमक्खियाँ नहीं देख सकती हैं। साथ ही तितलियाँ पराबैंगनी प्रकाश को देखने में सक्षम होने के कारण मकरंद का आसानी से पता लगा लेती हैं। जब स्वल्लोटैल तितलियाँ रेड ऑफ़ पैराडाइस फूल के मकरंद का सेवन करते हैं तो उनके पंखों पर पराग लग जाते हैं। इसके बाद जब तितलियाँ दूसरे रेड ऑफ़ पैराडाइस फूल में मकरंद का सेवन करती हैं तब वे उन्हें वहाँ परागित कर देती हैं। तितलियों द्वारा परागित अन्य फूलों में फ़ॉक्स, डेज़ी (एस्टर्स, ज़िनियास, इत्यादि) और मिल्कविड्स शामिल हैं।

निम्नलिखित कुछ चीजें हैं जो आप अपने घर पर एक परागण-अनुकूल वातावरण बनाने के लिए कर सकते हैं:
• आप तितली के अनुकूल फूलों का बाग लगा सकते हैं
• एक वनस्पतियों का बाग भी लगा सकते हैं
• अपने घर के अंदर और बाहर देशी पौधों का उपयोग करें
• रसायनों का उपयोग न करने का प्रयास करें और जैविक तरीकों का उपयोग करें

संदर्भ :-
1. https://bit.ly/2m6J4Id
2. http://blog.growingwithscience.com/2015/04/pollination-by-butterflies/
3. https://abutterflyrelease.com/blog/butterflies-pollinate/



RECENT POST

  • इंजीनियरिंग का एक अद्भुत कारनामा है, कोलोसियम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     25-07-2021 02:23 PM


  • आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के पश्चात अब लाना है फिर से भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर
    द्रिश्य 2- अभिनय कला य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-07-2021 10:21 AM


  • मौन रहकर भी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने की कला है माइम Mime
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-07-2021 10:11 AM


  • भारत में यहूदि‍यों का इतिहास और यहां की यहूदी–मुस्लिम एकता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-07-2021 10:37 AM


  • पश्चिमी और भारतीय दर्शन के अनुसार भाषा का दर्शन तथा सीखने और विचार के साथ इसका संबंध
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-07-2021 09:40 AM


  • विश्व के इतिहास में सामाजिक समूहों के लिए गहरा महत्व रखता रहा है बलिदान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-07-2021 10:20 AM


  • शहर के मास्टर प्लान में शामिल किया जाना चाहिए मलिन बस्तियों का विकास
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-07-2021 06:09 PM


  • 1857 में लखनऊ से संबंधित एक मूक ब्लैक एंड वाइट फिल्म है, द रिलीफ ऑफ लखनऊ
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     18-07-2021 02:23 PM


  • विभिन्न धर्मों सहित दुनियाभर में मिल जाएंगे, महाबली हनुमान के मंदिर और उपासक
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-07-2021 10:12 AM


  • लखनऊ के मिर्जा हादी रुसवा का प्रसिद्ध 19वीं सदी उर्दू उपन्यास उमराव जान अदा
    ध्वनि 2- भाषायें

     16-07-2021 09:43 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id