लखनऊ में बाल गंगाधर तिलक के स्वागत पे क्यों किया कुछ लोगो ने उनके गाड़ी का टायर पंचर

लखनऊ

 14-03-2019 09:00 AM
उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

29-30 दिसबंर, 1916 लखनऊ के लिए ऐतिहासिक दिन थे। इन दिनों यहां लखनऊ समझौते पर हस्‍ताक्षर करने के लिए भारतीय स्‍वतंत्रता आंदोलन के अनेक महानायक एकत्रित हुए। लखनऊ के कांग्रेस अधिवेशन पर चरमपंथी और नरमपंथी दोनों दलों ने अपने आंतरिक कलह को भूलाकर एक साथ भाग लिया। इस अधिवेशन में बालगंगाधर तिलक प्रमुख थे। लखनऊ के चारबाग रेलवे स्टेशन पर, दोनों गुटों के नेता राष्ट्रीय आंदोलन के वरिष्ठ नेताओं का स्वागत करने के लिए प्रतीक्षा कर रहे थे। बालगंगाधर तिलक प्रमुखतः चरमपंथी दल से थे किंतु इनके स्‍वागत के लिए यहां दोनों गुटों के मध्‍य प्रतिस्‍पर्धा लगी हुयी थी।

लखनऊ में कांग्रेस सत्र के लिए सभी व्यवस्था, प्रशासन और प्रबंधन नरमपंथियों द्वारा की गयी थी। इन्‍होंने तिलक को चारबाग रेलवे स्टेशन से कार्यक्रम स्थल तक ले जाने के लिए कार की व्‍यवस्‍था की थी। किंतु चरमपंथी युवा इन्‍हें अपने कंधों पर बैठाकर कार्यक्रम स्थल तक ले जाना चाहते थे, इसलिए इन्‍होंने कार के टायर पंचर कर दिये। चरमपंथी दल में अधिकांशतः युवा शामिल थे जो तिलक जी को अपना भगवान मानते थे। इन युवाओं में से एक शाहजहाँपुर के किशोरी राम प्रसाद (जिन्‍हें बाद में क्रांतिकारी राम प्रसाद 'बिस्मिल' के नाम से जाना गया) भी थे। इनके द्वारा काकोरी काण्‍ड का नेतृत्‍व भी किया गया था। चरमपंथी युवाओं ने तिलक जी के लिए घोड़े के रथ की व्‍यवस्‍था कर दी, जिसमें से इन्‍होंने घोड़ों को हटाकर रथ को स्‍वयं खिंचने का निर्णय लिया। तिलक जी के रथ को खिंचने वालों में राम प्रसाद 'बिस्मिल' जी प्रमुख थे। तिलक जी मधुमेह के रोगी थे तथा काफी देर तक रथ में बैठने के बाद उनका शरीर सुन्‍न होने लगा। रथ से उतरते ही उन्‍होंने तुरंत अपनी दवा ली। युवाओं के एक झुण्ड ने उनके पैर छुकर आर्शीवाद लेने के लिए उन्‍हें घेर लिया। युवाओं द्वारा किया गया तिलक जी के स्‍वागत को देखकर सभी निःशब्‍द रह गये।

1916 में आयोजित इस अधिवेशन के 101 वर्ष पूरे होने की खुशी में लखनऊ में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें तिलक जी के प्रपौत्र शैलेश को आमंत्रित किया गया। यह कार्यक्रम तिलक जी से सम्‍मान में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में तिलक जी के जीवन से संबंधित तस्‍वीरों और लेखों को प्रदर्शित किया गया।

संदर्भ:
1. https://bit.ly/2HfNIBU
2. https://bit.ly/2JaJA7Q
3. Image Reference - wikicommons



RECENT POST

  • देववाणी संस्कृत को आज भारत में एक से भी कम प्रतिशत आबादी बोल व् समझ सकती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:08 AM


  • बाढ़ नियंत्रण में कितने महत्वपूर्ण हैं, बीवर
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:36 PM


  • प्रारंभिक पारिस्थिति चेतावनी प्रणाली में नाजुक तितलियों का महत्व, लखनऊ में खुला बटरफ्लाई पार्क
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:09 AM


  • लखनऊ सहित विश्व में सबसे पुराने और शानदार स्विमिंग पूलों या स्नानागारों का इतिहास
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:41 AM


  • भारत में बढ़ती गर्मी की लहरें बन रही है विशेष वैश्विक चिंता का कारण
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:10 PM


  • लखनऊ में रहने वाले, भाड़े के फ़्रांसीसी सैनिक क्लाउड मार्टिन का दिलचस्प इतिहास
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     11-05-2022 12:11 PM


  • तेजी से उत्‍परिवर्तित होते वायरस एक गंभीर समस्‍या हो सकते हैं
    कीटाणु,एक कोशीय जीव,क्रोमिस्टा, व शैवाल

     10-05-2022 09:02 AM


  • 1947 से भारत में मेडिकल कॉलेज की सीटों में केवल 14 गुना वृद्धि, अब कोविड लाया बदलाव
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     09-05-2022 08:55 AM


  • वियतनामी लोककथाओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है, कछुआ
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     08-05-2022 07:38 AM


  • राष्ट्र कवि रबिन्द्रनाथ टैगोर की कविताएं हैं विश्व भर में भारतीय संस्कृति की पहचान
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     07-05-2022 10:52 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id