भारतीय संस्कृति में पादुका का धार्मिक महत्व

लखनऊ

 19-03-2019 07:10 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

भारतीय संस्कृति में पादुका का अत्यंत धार्मिक महत्व है और पादुका शब्द हमें वैदिक शब्दावली में भी मिलता है। प्राचीन भारतीय काल के भिक्षु, जैसे कि भैरवचार्य या सन्यासी या ऋषियों द्वारा पादुकाएं पहनी जाती थी, क्योंकि पादुका चमड़े, हाथी के दांत या कोई भी अन्य धातु की नहीं बनी होती थी। पादुका संपूर्ण लकड़ी की बनी होती थी, और इसे केवल पैरों की सुरक्षा के लिए उपयोग किया जाता था।

कवि बाना के नाटक हर्षचरित्र (सातवीं शताब्दी के मध्य) में भी एक हिंदू भिक्षु का वर्णन किया है, जिसने अपने कंधों पर एक दुपट्टा, एक लुंगी और अपने पैरों पर पादुका पहनी हुई थी। बाटा शू म्यूज़ियम के संग्रह में पादुकाओं की एक समृद्ध विविधता भी देखने को मिलती है, जिन्हें खडाओं के नाम से भी जाना जाता है। वहीं श्री कृष्ण और राम भगवान को भी अक्सर पादुका पहने हुए चित्रण किया जाता है।

धार्मिक क्षेत्र में भी पुजारियों और धार्मिक अनुष्ठान करने वाले स्वामी द्वारा भी अनुष्ठान करते वक्त पादुका पहनी जाती है। तेलुगू के मदीगा जाति (चमड़े के श्रमिकों की एक जाति) के स्वामी उत्सव का आयोजन करते समय चाकू लेकर, पैरों में पादुका पहन और हाथों में एक त्रिशूल को धारण कर देवताओं की वंदना करते हैं।

वहीं पादुका के धार्मिक महत्व का स्पष्ट उदाहरण हमें रामायण से भी मिलता है, जब दशरथ ने विवश होकर भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास दे दिया था, तब उनके साथ उनकी पत्नी सीता और उनके भाई लक्ष्मण भी साथ गए थे। राज्य के शासन की बागडोर भगवान राम के छोटे भाई भरत को शौंप दी गई थी। राज्य में भगवान राम की उपस्थिति के संकेतक के रूप में भरत द्वारा भगवान राम की स्वर्ण पादुका को सिंहासन पर रखा गया था। हालांकि भगवान राम राज्य में शारीरिक रूप से मौजूद नहीं थे, लेकिन भगवान राम का प्रतिनिधित्व उनकी पादुका ने किया था। ऐसा माना जाता है कि पादुका राजा के समान ही लोगों को सुरक्षा प्रदान कर सकती थीं।

पादुका मूल रूप से लकड़ी से बनी होती है और एक पदचिह्न के आकार की होती है जिसके आगे के हिस्से में एक घुंडी होती है, जिसको अंगुठे और पैर की दूसरी उंगली से पकड़ा जाता है। इन पादुकाओं में अधिक विस्तृत डिजाइन के लिए चांदी और पीतल सहित कीमती लकड़ियों, हाथी दांत, और धातुओं से सुसज्जित की जाती हैं। कीमती, आलीशान सामग्री से बनी हुई पादुकाएं कई दुल्हनों द्वारा भी पहनी जाती हैं।

संदर्भ :-
1. Neubauer,Jutta Jain Feet & Footwear in Indian Culture(2000) The Bata Shoes Museum,Toronto Canada



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