क्‍या वास्‍तव में है लखनऊ के ओइएल हाउस में भूतों का साया?

लखनऊ

 22-03-2019 09:01 AM
विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

हम बचपन से भूत प्रेतों की कहानी सुनते हुए आ रहे हैं, यदि आप भी भूतों पर विश्‍वास करते हैं, तो आप ऐसे अकेले व्‍यक्ति नहीं हैं, आज भी विश्‍व के अधिकांश हिस्‍सों में बड़ी संख्‍या में लोग भूत प्रेतों पर विश्‍वास करते हैं। पर वास्‍तव में भूत है क्‍या? हमारे मन का भ्रम या कोई अलौकिक शक्ति। हिंदू धर्म के अनुसार जिन व्‍यक्तियों की अकाल मृत्‍यु हो जाती है या उनकी कोई अभिलाषा शेष रह जाती है तो वे भूत बन जाते हैं। यह मान्‍यता आज से नहीं वरन् पीढ़ियों चली आ रही है, किंतु क्‍या यह एक वास्‍तविकता है या सिर्फ एक कहानी। इसके पीछे भी दुनिया के बड़े-बड़े शोध चल रहे हैं, जिसमें इस विचारधारा के अनेक पीछे अनेक मनोवैज्ञानिक कारण भी उभरकर सामने आये।

भूत-प्रेतों की अनुभूति कराने में हमारे दिमाग की अहम भूमिका होती है, इसकी कल्‍पना शक्ति इतनी प्रबल होती है कि यह किसी कल्‍पना को वास्‍तविकता में परिवर्तित कर देता है। भूतों को हमेशा विचित्र परिस्थितियों में ही देखा जाता है, जैसे कम रोशनी में या जब हम अर्ध निंद्रा की स्थिति में होते हैं तथा हमारी इंद्रियां निष्‍क्रिय अवस्‍था में होती हैं। ऐसी स्थिति में हमारा मन अमूर्त बातों को मूर्त करने का प्रयास कर रहा होता है और हमें अपने आस पास किसी के होने का आभास होने लगता है। जो लोग भूतों में विश्‍वास करते हैं, उन्‍हें यह सब दिखने लगता है, ऐसी घटनाएं अक्‍सर प्रेतवाधित घरों में देखने को मिलती हैं।

ऊपर दी गयी तस्वीर लखनऊ के ओइएल हाउस (OEL House) की है। यह घर लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति का पूर्व निवास था। लखनऊ का ओइएल हाउस भी एक ऐसा ही प्रेतवाधित घर घोषित किया गया है, जिसे कबूतर खाना भी कहा जाता है। यह पुराना और जीर्ण घर कभी वाजिद अली शाह का घर हुआ करता था। बाद में 1857 के विद्रोह के दौरान कई ब्रिटिश सैनिक मारे गए जिन्‍हें इस घर के कुएं में फेंक दिया गया था। युद्ध समाप्‍त होने के बाद भी इन सैनिकों का मृत शरीर कुएं में ही खराब हो गया। मान्‍यता है कि उन लोगों की आत्‍माएं इसी घर में भटकने लगी। बाद में यह घर लखनऊ के विश्वविद्यालय के कुलपति को दे दिया गया। कुछ समय बाद इनके परिवार वालों को घर में विचित्र गतिविधियां महसूस होने लगी। इन्‍होंने इन भयावह गतिविधियों पर विशेष ध्‍यान नहीं दिया। एक दिन कुलपति के बेटे ने खेल खेल में इस कुएं में कंकड़ डालने प्रारंभ कर दिये, जिस कारण इसमें सो रही आत्‍माएं जागृत हो गयी और अगले ही दिन इनके पुत्र की असमय मृत्‍यु हो गयी। इसके बाद कुलपति ने पवित्र तरीके से इस कुएं को सील (seal) कर दिया। तामसिक भूतों की उपस्थिति के कारण, लोग इस जगह से दूर रहते हैं। अब इस कहानी में कितनी सच्चाई है यह तो कोई नहीं कह सकता, परन्तु सालो से इस घर के बारे में लोगों का यही कहना है।

बिज़नेस इनसाइडर के अनुसार हमें भूतों के विषय में बताने के लिए हमारे भिन्‍न-भिन्‍न धर्म और संस्‍कृतियों की भी अहम भूमिका होती है, जो हमें अलौकिक शक्तियों के विषय में बताती हैं। इन अलौकिक शक्तियों पर हमारा विश्‍वास होने के कारण यह हमारे जीवन को नियंत्रित करने लगती हैं। फिर हमें ऐसी दुनिया के विषय में आभास होने लगता है, जहां असंभव घटनाएं भी संभव लगने लगती है, जो सच में डरावनी होती हैं। गैलप पोल ने अपने एक सर्वेक्षण में पाया कि उप-सहारा अफ्रीका में आधे से अधिक लोग जादू-टोना में विश्वास करते हैं और वे अविश्‍वासियों की तुलना में ज्‍यादा परेशान रहते हैं। 2008 के एक शोध में पाया गया है कि अकेले रहने वाले लोगों को आलौकिक शक्तियों में ज्‍यादा विश्‍वास होता है।

कुछ लोग मनोरंजन के लिए डरावनी फिल्‍में देखते हैं और ब्‍लडी मेरी से संबंधित डरावने खेल खेलते हैं, क्‍योंकि उन्‍हें विश्‍वास है कि वास्‍तविकता में इनसे कोई खतरा नहीं है। रेडफोर्ट के अनुसार भूत वास्‍तव में हमारे हृदय का अंतर विरोध है। जिस कारण कुछ लोग विश्‍वास करते हैं कि भूत डरावने होते हैं और हमें हानि पहुंचाने का प्रयास करते हैं, तो वहीं कुछ लोग उन्‍हें ढूंढने का प्रयास करते हैं। रेडफोर्ड ने कहा है जो लोग भू‍तों को नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं वे उन्‍हें एक शैतान के रूप में नहीं वरन् एक आत्‍मा के रूप में देखते हैं जो अपने मार्ग से भटक गयी है।

संदर्भ:

1. https://bit.ly/2UFxaGe
2. https://bit.ly/2TEsoMY


RECENT POST

  • हम लखनऊ वासियों को समझनी होगी प्रदूषण, अतिक्रमण से पीड़ित जल निकायों व नदियों की पीड़ा
    नदियाँ

     25-05-2022 08:16 AM


  • लखनऊ के हरित आवरण हेतु, स्थानीय स्वदेशी वृक्ष ही पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सबसे उपयुक्त
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

     24-05-2022 07:37 AM


  • स्वास्थ्य सेवा व् प्रौद्योगिकी में माइक्रोचिप्स की बढ़ती वैश्विक मांग, क्या भारत बनेगा निर्माण केंद्र?
    खनिज

     23-05-2022 08:50 AM


  • सेलफिश की गति मछलियों में दर्ज की गई उच्चतम गति है
    व्यवहारिक

     22-05-2022 03:40 PM


  • बच्चों को खेल खेल में, दैनिक जीवन में गणित के महत्व को समझाने की जरूरत
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-05-2022 11:09 AM


  • भारत में जैविक कृषि आंदोलन व सिद्धांत का विकास, ब्रिटिश कृषि वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉवर्ड द्वारा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:03 AM


  • लखनऊ की वृद्धि के साथ हम निवासियों को नहीं भूलना है सकारात्मक पर्यावरणीय व्यवहार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:47 AM


  • एक समय जब रेल सफर का मतलब था मिट्टी की सुगंध से भरी कुल्हड़ की स्वादिष्ट चाय
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:47 AM


  • उत्तर प्रदेश में बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:52 AM


  • देववाणी संस्कृत को आज भारत में एक से भी कम प्रतिशत आबादी बोल व् समझ सकती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:08 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id