काफी दिक्कतों के बाद हुआ था लखनऊ के लोहे के पुल का निर्माण

लखनऊ

 01-04-2019 07:05 PM
द्रिश्य 1 लेंस/तस्वीर उतारना

अवधों के समय में इंजीनियरिंग (engineering) विद्या की कमी के कारण लखनऊ के लोहे के पुल का निर्माण आधा-अधुरा रहा गया था, जिसे अंत में बंगाल के इंजीनियरों द्वारा 40 वर्षों के समय-अंतराल के बाद पूरा किया गया था। यह ऊपर दी गयी तस्वीर द लखनऊ एल्बम: फिफ्टी फोटोग्राफिक व्यूज ऑफ़ लखनऊ (The Lucknow Album: Fifty Photographic Views of Lucknow) से ली गयी है जिसे दारोगा अब्बास अली दवाला एकत्रित किया गया था।

20 वीं शताब्दी तक लखनऊ की गोमती नदी में कुछ ही पुल थे। सर जॉन रेनी (Sir John Rennie) द्वारा डिज़ाइन किया गया लोहे का पुल नवाब सआदत अली खान द्वारा खरीदा गया था, लेकिन इंग्लैंड से लाने के बाद भी 40 साल तक इस पुल पर कोई भी काम नहीं किया गया। इसके पीछे विभिन्न कारण हैं और 40 साल बाद इसका किसने निर्माण किया, उस बारे में भी कई मान्यताएं हैं। जब बिशप हीबर (Bishop Heber) ने 1824 में लखनऊ का दौरा किया था, तब उन्होंने अपनी डायरी में लिखा था कि अवध के नवाबों के विचारों में पुल के संबंध में अंधविश्वासी प्रासंगिकता बसी हुई है। क्योंकि पुल के आने के बाद ही सआदत अली खान की मृत्यु हो गई थी और लोहे के पुल को अशुभ मान लिया गया था। नवाब मानते थे कि यदि उन्होंने इस पुल का निर्माण करवाया तो उनकी भी मृत्यु हो जाएगी।

अंत में नवाब अमजद अली शाह (1842-7) द्वारा कर्नल फ्रेजर की मदद से रेजीडेंसी (Residency) के उत्तर-पश्चिम में इस पुल को लगवाया गया था। वहीं कई मानते हैं कि अवध के कारीगरों के इंजीनियरिंग विद्या की कमी के कारण पुल के निर्माण में विलम्ब हुआ था और अमजद अली ने ईस्ट इंडिया कंपनी से मदद मांगी और पुल का कर्नल फ्रेजर, बंगाल के इंजीनियर द्वारा निर्माण करवाया गया था। 'प्रोफेशनल पेपर्स ऑन इंडियन इंजीनियरिंग (वॉल्यूम 3)' पुस्तक में बताया गया है कि पुल के चिनाई और निर्माण की लागत लगभग 1,80,000 रुपये तक रही होगी।

संदर्भ :-

1. http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/other/019xzz000000270u00024000.html
2. http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/other/019xzz000000270u00023000.html
3. https://www.oldindianphotos.in/2013/06/iron-bridge-lucknow-c1870s.html
4. https://collection.nam.ac.uk/detail.php?acc=1965-11-113-19
5. https://medium.com/@pastmaster77/the-curious-case-of-lucknows-iron-bridge-26c06aa67836


RECENT POST

  • महासागरों का रंग क्यों होता है भिन्न?
    समुद्र

     17-08-2019 01:46 PM


  • स्‍वतंत्रता के बाद भारतीय रियासतों का भारतीय संघ में विलय
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     16-08-2019 05:39 PM


  • अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से कुछ दुर्लभ चित्र
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-08-2019 08:34 AM


  • व्‍यवसाय के रूप में राखी बन रही है एक बेहतर विकल्‍प
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-08-2019 02:52 PM


  • क्या कोरिया से आया है उत्तर प्रदेश का राजकीय प्रतीक?
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-08-2019 12:33 PM


  • विभिन्‍न धर्मों में पशु बलि का महत्‍व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-08-2019 04:07 PM


  • इतिहास का महत्वपूर्ण पहलु, मोहनजोदड़ो नगर
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     11-08-2019 12:18 PM


  • क्या है पारिस्थितिकी और कैसे जुड़ी है ये जलवायु परिवर्तन से?
    जलवायु व ऋतु

     10-08-2019 10:59 AM


  • क्यों दो बार बदला गया लखनऊ स्थित हज हाउस की दीवारों का रंग
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     09-08-2019 03:28 PM


  • घड़ियालों को संरक्षण प्रदान करता लखनऊ का कुकरैल संरक्षण वन
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     08-08-2019 03:43 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.