लखनऊ में जन्में महान उर्दू साहित्यकार आज भी प्रसिद्ध हैं पकिस्तान में

लखनऊ

 30-04-2019 07:00 AM
ध्वनि 2- भाषायें

रतन नाथ सरशार उर्दू के उन विशिष्ट साहित्यकारों में से एक हैं जिनकी रचनाएँ उत्कृष्ट ग्रंथों की कोटि में आती हैं। उन्होंने 19वीं शताब्दी में उर्दू भाषा में उपन्यास विधा को समृद्ध किया और उससे लखनऊ की मिटती हुई पुरानी संस्कृति का दर्पण बनाया। रतन नाथ सरशार का जन्म लखनऊ में ही सन 1846 में हुआ था। इनके दो अन्य उपन्यास ‘जाम-ए-सरशार’ और ‘सैर-ए-कोहसर’ भी काफी मशहूर हैं जो कि क्रमश: 1887 और 1890 में प्रकाशित हुए थे। रतन नाथ सरशार के बारे में और अधिक आप प्रारंग के इस लिंक पर जा कर भी पड़ सकते हैं।

सरशार कश्मीरी पंडितों के खानदान से थे, जो किसी वक्त ज़रिया-ए-माश की तलाश करते हुए लखनऊ में आ बसे थे। चार वर्ष की उम्र में ही सरशार के पिता का देहांत हो गया था। उनके पिता के देहांत के बाद उनकी परवरिश उनकी मां द्वारा की गई थी। उस समय के तमाम बच्चों की तरह ही सरशार की शिक्षा फ़ारसी और अरबी के साथ शुरू हुई थी। घर के आस-पड़ोसियों के यहां स्वतंत्र आना जाना होने की वजह से उन्हें उनकी भी भाषा या जुबान सीखने का अवसर मिला, जिसकी झलक सरशार के अफ़सानों, ख़ासकर 'फ़साना-ए-आज़ाद' में भी देखने को मिलती है।

उन्होंने कई सारी अंग्रेज़ी किताबों का अनुवाद किया, जिनमें विज्ञान की एक किताब 'शमशुज़्ज़ुहा' भी शामिल है। इन अनुवाद वाली किताबों की सूची में स्पेनिश लेखक सरवांतीज़ (Cervantes) की किताब 'डॉन कीओटे' (Don Quixote) भी शामिल है, जो 'ख़ुदाई फ़ौजदार' के नाम से 1894 में मुंशी नवल किशोर प्रेस, लखनऊ से छपकर आम जनता के समक्ष आई थी। इनकी रचना ‘फ़सान-ए-आजाद’ सबसे उम्दा लेखों में से एक मानी जाती है तथा यही कारण है कि इनके इस लेख का उर्दू से हिंदी रूपांतरण मुंशी प्रेमचंद्र ने किया था। फ़सान-ए-आजाद में आकर्षक और मजेदार कहानियों का मिश्रण करने के लिए सरशार ने स्पैनिश (Spanish) डॉन क्विगज़ोट से प्रेरणा ली थी।

फिराक़ गोरखपुरी कहते हैं कि ''सरशार उर्दू के पहले यथार्थवादी कलाकार हैं। 'फ़साना-ए-आज़ाद' में उन्होंने लखनऊ का ही सजीव चित्रण नहीं किया, बल्कि उन्नीसवीं सदी के उतर भारत की पूरी सभ्यता का ऐसा पूर्ण चित्र उपस्थित किया है और प्रकारांतर से अंतरराष्ट्रीय मामलों को भी इस तरह पेश कर दिया है कि देखकर आश्चर्य होता है कि एक ही उपन्यास के अंदर यह सब कैसे आ गया। वहीं जेनिफर डब्रो (Jenifer Dubrow) (जो की वाशिगटन विश्वविद्यालय में सह-प्राध्यापक हैं और दक्षिण एशियाई भाषाओं और सभ्यता में पी.एच.डी. धारक हैं।) का मानना है कि फ़साना-ए-आज़ाद सामाजिक प्रकारों, पात्रों, बोलने की शैली, कपड़े, आदि की एक विस्तृत विविधता का मज़ाक उड़ाती है। वह साथ में यह भी कहते हैं कि यह एक व्यंगात्मक कार्य के रूप में है, जो लखनऊ की पुरानी नवाबी संस्कृति और पश्चिम की अलोकतांत्रिक अनुकरण दोनों की आलोचना करती है।

ऊपर दिए गये चित्र में रतन नाथ सरशार की रचना ‘फ़सान-ए-आजाद’ का मुखपृष्ट दिखाई दे रहा है।

संदर्भ :-
1. http://pahalpatrika.com/frontcover/getdatabyid/207?front=27&categoryid=13
2. https://www.youtube.com/watch?v=luqQasMPW70&feature=youtu.be
3. https://bit.ly/2Vw98RF
4. https://bit.ly/2GL3emk
5. https://lucknow.prarang.in/1807041513
चित्र सन्दर्भ :-
1. https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Fasan-e-Azad.jpg



RECENT POST

  • आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के पश्चात अब लाना है फिर से भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर
    द्रिश्य 2- अभिनय कला य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-07-2021 10:21 AM


  • मौन रहकर भी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने की कला है माइम Mime
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-07-2021 10:11 AM


  • भारत में यहूदि‍यों का इतिहास और यहां की यहूदी–मुस्लिम एकता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-07-2021 10:37 AM


  • पश्चिमी और भारतीय दर्शन के अनुसार भाषा का दर्शन तथा सीखने और विचार के साथ इसका संबंध
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-07-2021 09:40 AM


  • विश्व के इतिहास में सामाजिक समूहों के लिए गहरा महत्व रखता रहा है बलिदान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-07-2021 10:20 AM


  • शहर के मास्टर प्लान में शामिल किया जाना चाहिए मलिन बस्तियों का विकास
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-07-2021 06:09 PM


  • 1857 में लखनऊ से संबंधित एक मूक ब्लैक एंड वाइट फिल्म है, द रिलीफ ऑफ लखनऊ
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     18-07-2021 02:23 PM


  • विभिन्न धर्मों सहित दुनियाभर में मिल जाएंगे, महाबली हनुमान के मंदिर और उपासक
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-07-2021 10:12 AM


  • लखनऊ के मिर्जा हादी रुसवा का प्रसिद्ध 19वीं सदी उर्दू उपन्यास उमराव जान अदा
    ध्वनि 2- भाषायें

     16-07-2021 09:43 AM


  • पहले भारतीय स्‍वतंत्रता संग्राम की साक्ष्‍य रही है भव्‍य राजसी दिलकुशा कोठी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     15-07-2021 07:54 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id