पूर्व चुनावी विश्‍लेषण का चुनाव में प्रभाव

लखनऊ

 29-05-2019 12:05 PM
विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

आज विश्‍व के अधिकांश राष्‍ट्र लोकतांत्रिक हो गए हैं, जहां शासक वर्ग का चयन जनता द्वारा किया जाता है। अतः राजनीतिक परिदृश्‍य में चुनावों का विशेष महत्‍व हो गया है। हाल ही में विश्‍व के सबसे बड़े लोकतंत्र में चुनाव आयोजित कराए गये, जिसने आने वाले पांच साल के लिए भारत का भविष्‍य निर्धारित किया। लगभग एक सौ तीस करोड़ जनसंख्‍या वाले हमारे देश में चुनावों का सुचारू आयोजन कराना भारतीय चुनाव आयोग के लिए एक बड़ी चुनौती थी, जिसे पूरा करने में पिछले चुनावी आंकड़ों ने अहम भूमिका निभाई। राजनीति में पूर्व चुनावी आंकड़ों का विश्‍लेषण सेफॉलॉजी (Psephology) कहलाता है। इसके अंतर्गत पूर्व चुनावों के मतदान, जनमत सर्वेक्षण, चुनावी अभियानों की वि‍त्‍तीय जानकारी इत्‍यादि के सांख्यिकीय आंकड़ें एकत्रित कर, उनका विश्‍लेषण किया जाता है। जिसके आधार पर वर्तमान चुनावों के भावी परिणामों की भविष्‍य वाणी की जाती है।

भारत में हुए वर्तमान चुनावों को क्रियांवित कराने के लिए चुनाव आयोग द्वारा विभिन्‍न आंकड़े एकत्रित किए गए जो इस प्रकार थे:
मतदाताओं की संख्‍या- पिछले चुनावों में 83 करोड़ मतदाता थे, जिनमें से 55 करोड़ मत पड़े। जिसके आधार पर चुनाव अधिकारियों द्वारा अनुमान लगाया गया कि इन चुनावों में लगभग 90 करोड़ मतदाता होंगे।
कुल सीटों की संख्‍या - लोकसभा सीटों की संख्या 545 है। यह तो सर्वविदित है अधिकांश सीटें जीतने वाली पार्टी ही सरकार बनाती है। यदि कोई एक पार्टी पर्याप्त सीटें नहीं जीत पाती, तो विभिन्‍न छोटे दलों का एक गठबंधन शासन करने और प्रधानमंत्री चुनने के लिए एकजुट हो सकता है।
चुनाव केंद्रों की व्‍यवस्‍था - लगभग 90 करोड़ मतदाताओं के मतदान हेतु मतदान केंद्र की व्‍यवस्‍था करना अपने आप में एक चुनौतीपूर्ण कार्य है। जिसे पूरा करने के लिए देश में लगभग दस लाख मतदान केंद्रों की स्‍थापना की गयी। ताकि देश का प्रत्‍येक मतदाता अपना मत दे सके।
मतदान प्रक्रिया में पारदर्शिता - मतदान प्रक्रिया को पारदर्शी रूप से कराने के लिए, विशाल मानव संसाधनों की तैनाती की आवश्‍यकता होती है। जिसमें चुनाव अधिकारियों का एक बड़ा जत्‍था शामिल होता है। चुनाव अधिकारियों का कहना था कि 1 करोड़ से अधिक चुनाव अधिकारी मतदान का प्रबंधन करेंगे क्योंकि यह कई हफ्तों तक चलने वाले हैं।
राजनीतिक दलों की संख्‍या - भारत के पिछले चुनाव (2014 में) में भाग लेने वाले राजनीतिक दलों की कुल संख्या 464 थी। त्रिशंकु सभा की स्थिति में, गठबंधन सरकार के गठन हेतु विभिन्‍न क्षेत्रों के छोटे दल एक निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
कुल उम्‍मीदवारों की संख्‍या – 2014 के चुनावों में संपूर्ण भारत से विभिन्‍न राजनीतिक दलों ने कुल 8,251 उम्मीदवार खड़े किए। यह संख्या भारत की राजनीतिक प्रणाली की विशालता और विविधता दोनों को दर्शाती है, जिसमें सैकड़ों दल शामिल हैं – जो अलग-अलग संस्कृतियों और रीति-रिवाजों वाले लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
जीती गयी सीटें - 2014 में, बीजेपी ने लोकसभा में 282 सीटें जीतीं, यह पिछले 30 साल में बहुमत से जीती गयी सबसे ज्‍यादा सीटें थी।

मतदाताओं के व्‍यवहार का अध्‍ययन गणितीय परिप्रेक्ष्‍य के माध्‍यम से किया जाता है। इसमें मत, व्यक्तियों की प्राथमिकताओं को संयोजित करने की प्रक्रिया है, जिसके द्वारा एक पूरे समूह की प्राथमिकताओं का वर्णन करने का प्रयास किया जाता है। कोंडोरसेट विधि (Condorcet Method) व्यक्तिगत पसंद से समग्र वरीयता निर्धारित करने के लिए एक मजबूत विधि है, जो दो विकल्पों के बीच हर संभव तुलना करके, विजेता का अनुमान लगाती है, और फिर समग्र कार्यविधि बनाने के लिए युग्मक परिणामों को एक साथ रखती है। सांख्यिकीविदों ने प्रभावशाली तरीके से दुनिया के राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। उन्नत आंकड़ों के एकत्रिकरण के माध्यम से, विश्लेषक चुनाव के गूढ़ और अनिवार्य हिस्सा बन रहे हैं।

संदर्भ:
1. https://edition।cnn।com/2019/02/16/asia/india-election-numbers-intl/index।html
2. https://en।wikipedia।org/wiki/Psephology
3. https://brilliant।org/wiki/mathematics-of-voting/
4. https://www।statisticsviews।com/details/feature/6931581/How-statisticians-have-changed-elections।html



RECENT POST

  • क्या बंदर केवल शाकाहारी होते हैं?
    स्तनधारी

     17-06-2019 11:08 AM


  • समय के साथ स्वाभाविक होते पिता
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-06-2019 10:30 AM


  • क्या महानगरों में एसी के बिना प्राकृतिक रूप से जीवन यापन करना संभव है?
    व्यवहारिक

     15-06-2019 10:55 AM


  • क्यों कर रहे हैं भारतीय किसान आत्महत्या?
    ध्वनि 2- भाषायें

     14-06-2019 10:59 AM


  • लखनऊ के क्‍लबों का इतिहास तथा इनकी वर्तमान स्थिति
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     13-06-2019 10:38 AM


  • कंपनी शैली का भारतीय पारंपरिक शैली तथा अवध शैली पर प्रभाव
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     12-06-2019 11:58 AM


  • लखनऊ में जुम्‍मे की नमाज़ 1857 से पहले और उसके बाद
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     11-06-2019 10:49 AM


  • कोमल और मोहक सुगंध वाले ग्रीष्म ऋतु के प्रमुख मौसमी फूल
    बागवानी के पौधे (बागान)

     10-06-2019 12:20 PM


  • भारत के 10 सबसे रहस्यमयी मंदिर
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-06-2019 10:21 AM


  • किसी के मान को ठेस ना पहुँचाने के लिए इंद्रजाल कॉमिक्स ने उठाया था फैंटम में ये कदम
    ध्वनि 2- भाषायें

     08-06-2019 11:03 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.