हेडफोन के ज्यादा उपयोग से खो सकते हैं आप अपनी सुनने की क्षमता

लखनऊ

 03-06-2019 11:30 AM
संचार एवं संचार यन्त्र

प्रौद्योगिकी एक वरदान और अभिशाप दोनों ही है। एक तरफ जहां यह हमारे जीवन को इतना आसान और सुविधाजनक बना देती है, तो वहीं दूसरी तरफ इसकी कई कमियां और बुरा प्रभाव भी होता है। आज हम तकनीक की एक सुविधाजनक वस्‍तु यानी कि ईयरफोन (Earphones), ईयरबड्स (Earbuds) या हेडफोन (Headphone) की बात कर रहे हैं। जिसने लोगों की बेतहाशा मदद की है, परंतु हेडफोन के नुकसान भी बेहद गंभीर होते हैं। आप इनका कितना उपयोग करते हैं और किस प्रकार के हेडफोन का उपयोग करते हैं, मायने रखता है, क्योंकि इनके ज्यादा उपयोग से आपको अपने कानों से सम्बन्धित समस्या का सामना करना पड़ सकता है और यदि आप सस्ते हेडफोन इस्तेमाल करते हैं तो परिणाम और भी गंभीर हो सकते हैं।

वर्तमान में हेडफोन के कई प्रकार आपको दुकानों में देखने को मिलेंगे। यहां तक कि आपको लखनऊ में डब्ल्यू. के. लाइफ (ये विशिष्ट रूप से डिज़ाइन किए गए इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स (electronic gadgets) और सहायक उपकरण की एक अति-आधुनिक सूची प्रस्तुत करते हैं) जैसी दुकानों पर भी इनके आधुनिक प्रकार मिलेंगे। यहां के ब्लूटूथ ईयरपॉड्स (Bluetooth EarPods) लखनऊ में काफी बिक रहे हैं। ये देखने में काफी अच्छे और सुविधाजनक है। परंतु जैसा कि हमने बताया है कि हर सिक्के के दो पहलू होते हैं। उसी प्रकार हेडफोन सुविधाजनक तो होते हैं परंतु इनके ज्यादा उपयोग से कानों में अनेक प्रकार की समस्या हो सकती है, यहां तक कि आप अपने सुनने की क्षमता भी खो सकते हैं।

एक गैर-लाभकारी हियरिंग हेल्थ फाउंडेशन (Hearing Health Foundation) के आंकड़ों के अनुसार, लगभग 4.8 करोड़ अमेरिकियों को सुनने में समस्या होती है, और 20% बच्चे स्थायी रूप से उच्च-ध्वनि के कारण अपनी सुनने की क्षमता खो चुके हैं। हालांकि हेडफोन की ध्वनि कम करके सुनने से आप कुछ हद तक इस नुकसान से बच सकते हैं। आपने अक्सर महसूस किया होगा कि जब आप तेज़ आवाज में हेडफोन से गाने सुनते हैं और कुछ देर बाद इन्हें उतारते हैं तो आपको अपने आस-पास की आवाज़ें कम सुनाई देती हैं। तो यह एक संकेत है कि आपको अपने हेडफोन की आवाज़ कम करने की आवश्यकता है। एक शोध से यह भी पता चला है कि यदि आप हेडफोन से तेज़ आवाज सुनते हैं तो अपने कान में 80 से 90% तक तंत्रिका तन्तु खो देते हैं।

क्या आप जानते हैं कि जब आप हेडफोन लगा कर तेज़ आवाज़ में संगीत सुनते हैं तो ध्वनि तरंगें हमारे कानों तक पहुँचती हैं और हमारे कान में कंपन पैदा करती हैं? ये कंपन कई छोटी हड्डियों के माध्यम से आंतरिक कान में पहुंचता है, और जहां से यह कर्णावर्त तक पहुंचता है। कर्णावर्त आपके कान में एक तरल पदार्थ से भरा कक्ष होता है जिसमें कई हजारों छोटे सूक्ष्म रेशे होते हैं। जब ध्वनि कंपन कर्णावर्त से रेशों तक जाती है तो इससे ये सूक्ष्म रेशे हिलने लगते हैं। उच्च ध्वनियों में अधिक कंपन होता है, जिसके कारण सूक्ष्म रेशे अधिक हिलते हैं और जब आप ऐसी आवाजें सुनते हैं जो बहुत लंबे समय तक बहुत तेज़ होती हैं, तो ये कोशिकाएं कंपन के प्रति अपनी संवेदनशीलता खो देती हैं। जिस कारण आप अपने सुनने की क्षमता खो देते हैं।

हेडफोन को कितना उपयोग करना चाहिये
आपके कान में कितनी मात्रा में ध्वनि पहुंच रही है और कितने समय के लिये पहुंच रही है यह बात भी मायने रखती है। आपके कानों को केवल उच्च ध्वनि से ही नुकसान नहीं पहुंचता है बल्कि अधिक समय तक मध्यम मात्रा में हेडफोन से आवाज सुनने से भी पहुंचता है। निम्न तालिका में आप देख सकते हैं कि किस स्तर पर कितने समय के बाद आपके कानों को नुकसान पहुंचता है:

कान सिर्फ 65 डेसिबल (Decibel) तक की आवाज़ को सहन कर सकता है लेकिन कुछ लोग उच्च आवाज में गाने सुनते हैं जिससे कम सुनाई देने लगता है। यदि आप लगातार 25 घंटे तक 80 डेसीबल के स्तर पर ईयरफोन का इस्तेमाल करेंगे तो बहरेपन की शिकायत भी हो सकती है। इसके अलावा यह बात भी मायने रखती है कि आप ध्वनि के स्रोत के जितना करीब होंगे उतना ही नुकसान आपके कानों को होगा। आपको ध्यान देना चाहिए कि डेसीबल दूरी के साथ कम हो जाता है - आप ध्वनि के स्रोत के जितना करीब होंगे, उतनी ही जोर से ध्वनि आपके कानों को नुकसान पहुंचाएगी। ईयरफोन का ज्यादा इस्तेमाल करने से बहरेपन के अलावा भी काफी तरह के गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। ईयरफोन का काफी ज्यादा इस्तेमाल करने से आप आसानी से बाहर की आवाजों को अनसुना कर सकते हैं। हम आपको बता दें कि आजकल होने वाली कई सारी दुर्घटनाएं संगीत सुनने के कारण ही होती हैं। इसलिए विशेष रूप से सड़क के आस-पास और बाहर जाते समय ईयरफोन का इस्तेमाल न करना ज्यादा उचित होगा।

कैसे बचें इसके नुकसान से
• इससे बचने के लिए ईयरफोन का इस्तेमाल कम से कम करने की आदत डालें।
• आवाज़ को हमेशा कम रखें।
• जिस ईयरफोन में आप ध्वनि को नियंत्रित कर सकें उनका ही उपयोग करें।
• अच्छी गुणवत्ता के ही हेडफोन्स या ईयरफोन्स का प्रयोग करें और ओवर-द-ईयर (Over-the-ear) हेडफोन का प्रयोग करें क्योंकि यह बाहरी     कान में लगे होते हैं। ओवर-द-ईयर हेडफोन्स दो प्रकार के होते हैं: खुले और बंद।
•खुले हेडफोन्स में इयर कप होते हैं जो कुछ मात्रा में ध्वनि को बाहर निकलने देते हैं और कुछ मात्रा में बाहर की ध्वनि को कान में जाने की अनुमति देते हैं।
• बंद हेडफोन्स में आप ध्वनि स्तर को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में सक्षम होते हैं क्योंकि इसमें बाहरी शोर काफी कम हो जाता है।
• अगर आपको ईयरफोन लगाकर लगातार गाने सुनने की आदत है, तो अपनी आदत में सुधार लायें और 60-60 नियम का पालन करें। इस नियम के अनुसार दिन में एक बार 60 मिनट से अधिक समय तक गाने न सुनें और ध्वनि की मात्रा 60% से अधिक न रखें।

बढ़िया हेडफोन कैसे ख़रीदें
यदि आप अपने स्वास्थ्य को ठीक रखना चाहते हैं तो आपको अच्छा हेडफोन खरीदना बहुत ही जरूरी है। यहां पर दाम मायने नहीं रखता है क्योंकि अगर आप अच्छी गुणवत्ता का कोई हेडफोन खरीदते हैं तो वह आपके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए बनाया जाता है। ताकि वह आपके स्वास्थ्य पर ज्यादा नुकसान ना कर सके। तो यदि आप हेडफोन खरीदना चाहते हैं तो निम्न बातों का ध्यान जरूर रखें।
• कोई भी हेडफोन खरीदने से पहले उसको एक बार अपने कानों में लगाकर जरुर देखें, ताकि आपको यह पता लग जाए कि वह कितना आरामदायक है और उसकी ध्वनि अधिक तीव्र तो नहीं।
• जब भी आप कोई हेडफोन खरीदने जाएँ तो उसकी आवाज की गुणवत्ता का ध्यान ज़रूर रखें क्योंकि अगर आपके हेडफोन की आवाज़ की गुणवत्ता ठीक नहीं है तो आपको बहुत ज्यादा परेशानी हो सकती है।
• हेडफोन खरीदने से पहले यह ज़रूर निश्चय कर लें कि आपको किस चीज़ के लिए हेडफोन चाहिए। अगर आप घर में गाने सुनना चाहते हैं या फिर किसी भीड़-भाड़ वाले इलाके में किसी से बात करनी है या बाहर गाने सुनने के लिए आपको हेडफोन चाहिए तो यह सब चीज़ें आप ध्यान में रखकर ही अपना हेडफोन खरीदें।

संदर्भ:
1.http://time.com/5066144/headphones-earbuds-hearing-loss/
2.https://global.widex.com/en/blog/which-headphones-are-the-safest
3.https://www.audiorecovery.com/blog/do-headphones-increase-your-risk-hearing-loss
4.https://www.popsci.com/headphones-hearing-loss#page-4
5.https://bit.ly/2HPSCnT



RECENT POST

  • असीमित नोटों की छपाई करके, क्यों भारत सरकार नहीं बना देती सबको अमीर
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-08-2019 10:30 AM


  • महासागरों का रंग क्यों होता है भिन्न?
    समुद्र

     17-08-2019 01:46 PM


  • स्‍वतंत्रता के बाद भारतीय रियासतों का भारतीय संघ में विलय
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     16-08-2019 05:39 PM


  • अगस्त 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन से कुछ दुर्लभ चित्र
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     15-08-2019 08:34 AM


  • व्‍यवसाय के रूप में राखी बन रही है एक बेहतर विकल्‍प
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-08-2019 02:52 PM


  • क्या कोरिया से आया है उत्तर प्रदेश का राजकीय प्रतीक?
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-08-2019 12:33 PM


  • विभिन्‍न धर्मों में पशु बलि का महत्‍व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-08-2019 04:07 PM


  • इतिहास का महत्वपूर्ण पहलु, मोहनजोदड़ो नगर
    सभ्यताः 10000 ईसापूर्व से 2000 ईसापूर्व

     11-08-2019 12:18 PM


  • क्या है पारिस्थितिकी और कैसे जुड़ी है ये जलवायु परिवर्तन से?
    जलवायु व ऋतु

     10-08-2019 10:59 AM


  • क्यों दो बार बदला गया लखनऊ स्थित हज हाउस की दीवारों का रंग
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     09-08-2019 03:28 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.