दबिस्तान-ए-दिल्ली और दबिस्तान-ए-लखनऊ में फ़र्क

लखनऊ

 06-07-2019 12:05 PM
द्रिश्य 2- अभिनय कला

लखनऊ और दिल्ली दोनों ही शहर अपने 'शायर' और 'शायरी' के लिए प्रसिद्ध हैं। लेकिन इन दोनों शहरों की शायरी में अंतर है। दिल्ली के शहर की शायरी में आह - ग़म / दुःख है जबकि लखनऊ की शायरी में वाह - हर्ष / खुशी है।

क्या कोई शहर एक विशिष्ट साहित्यिक शैली विकसित कर सकता है? लंबे समय से चली आ रही परंपरा ने उर्दू ग़ज़ल परंपरा को "दबिस्तान-ए-दिल्ली" और "दबिस्तान-ए-लखनऊ" या दिल्ली और लखनऊ की शैलियों में विभाजित किया है। उर्दू साहित्य में दोनों शहरों की भूमिका विवाद से परे है लेकिन हम प्रतिद्वंद्वी शैलियों के मध्य अंतर कैसे कर सकते हैं?

दबिस्तान-ए-दिल्ली आह रंग (भाव) वाली शैली थी, अर्थात दर्द, ग़म, परेशानियों और संघर्ष वाली ज़ुबान थी। यहाँ के शायरों की ज़ुबां और कलम दोनों से हिजरत या महरूमी के लफ्ज़ निकलते थे। जबकि दबिस्तान-ए-लखनऊ इससे वंचित रहा, वहाँ की नवाबी शान में तायुष पैदा हुआ।

यही कारण रहा कि लखनऊ के शायर की ज़ुबां में वाह के लफ्ज़ रहे अर्थात वहाँ के शायर महबूब के हुस्न, शरापे और उसकी ज़ुल्फों आदि पर कशीदे लिखते थे।

उर्दू के विद्वान फ्रांसिस प्रिचेट का मानना है कि विभाजन उर्दू साहित्य के कुछ शुरुआती इतिहासकारों द्वारा बनाया गया था। एक दृष्टिकोण यह था कि दिल्ली के कवियों के कार्य सरल, आत्मीय, चैतन्य रूप में प्रतिष्ठित थे और लखनऊ के तामसिक, कामुक और पतनशील के रूप में।

मुंशी अहमद खान (अहमद लखनवी)
हश्र तक भूलों ना एहसां मैं तेरा बाद-ए-सबा
मुझको पहुंचा दे उड़ा कर मेरे यार के पास,
साबित हुआ है बाग़ में जा जा के ऐ सनम
रुख ने तेरे उड़ाया गुल-ए-यास्मीन के तर्ज़!!

मिर्ज़ा मोहम्मद ताकी खान (हवस लखनवी)
ज़ब्त का दावा था आखिर हिज्र में चिल्ला उठे
ऐ हवस! क्या हो गयी शेखी तुम्हारी इन दिनों,
दुःख पहुंचे जो कुछ तुम्हारी ये सज़ा है
क्यूँ उसके हवस आशिक जांबाज़ हुए तुम!!

मीर औसत अली (रश्क लखनवी)
लुफ्त पीरी में जवानी का कहाँ ऐ रश्क
हैरत आती है कि क्या हो गये हम क्या होकर,
रश्क! नादां हुए जाते हो दाना होकर
सामना कतरों का करने लगे दरिया होकर!!

खुशबीर सिंह (शाद लखनवी)
साहिल पे देखते हैं सभी गौर से मुझे
जिस दिन से हो गया समंदर मेरे खिलाफ,
ज़रा सी बात पे आँखें छलकने लगती हैं
ज़रा सी बात पे कितना मलाक करते हो!!

सन्दर्भ:-
1. https://bit.ly/2LHDxqX
2. https://vahshatedil.wordpress.com/2010/12/18/dabistan-e-lakhnau-ki-ek-sair/
3. https://www.youtube.com/watch?v=1ZOEtJiIcSw



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