लखनऊ के आसपास स्थि‍त बड़हल के वृक्ष के उपयोग और फायदे

लखनऊ

 11-07-2019 12:54 PM
पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें

लखनऊ के ला मार्टिनियर गर्ल्स कॉलेज (La Martiniere Girl’s College) के प्रांगण में स्थित बड़हल का वृक्ष, गर्मियों के मौसम में पक्षियों की चहचहाट से भरा रहता है। इसे बंदरों का फल भी कहा जाता है। यह भारत के शहरी क्षेत्रों में पाया जाने वाला एक दुर्लभ वृक्ष है, जो शहरों में प्रायः विलुप्ति की कगार पर खड़ा है। किंतु इसे लखनऊ के कई क्षेत्रों में आज भी देखा जा सकता है। यह वृक्ष अपने बहुमुखी उपयोगों के लिए जाना जाता है।

बड़हल मोरेशिए (Moraceae) कुल का एक उष्णकटिबंधीय सदाबहार वृक्ष है। जो मुख्‍यतः दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पाया जाता है। मध्यम से बड़े आकार के इस पर्णपाती वृक्ष की लंबाई लगभग 10-15 मीटर तक हो सकती है। यह वृक्ष तराई पहाड़ी जंगलों, खुले प्रदेशों और कभी-कभी गांवों में 300 मीटर की ऊँचाई पर पाए जाते हैं। सुअपवाहित और नमी को भलि-भांति अवशोषित करने वाली मृदा इसके लिए उपयुक्‍त है।

इसकी पत्तियां बड़ी और चौड़ी होती हैं तथा इसके फूल एकलिंगी होते हैं, जिसमें नर फूल पीले-नारंगी रंग के तथा मादा फूल लाल रंग के होते हैं। इसके फल हरे से धुंधले पीले रंग के होते हैं। जब यह पूर्णतः पक जाते हैं तो इनका रंग गुलाबी-भूरा-पीला हो जाता है। इसका गूदा स्‍वाद में खट्टा-मीठा होता है। इसमें बीजों की संख्‍या अनियमित होती है। बीटा-कैरोटीन (beta-carotene) और विटामिन सी (Vitamin C) के एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) गुणों से युक्‍त यह फल अत्यधिक पौष्टिक होता है। इसका एंटीऑक्सीडेंट मुख्‍यतः मानव स्वास्थ्य के रखरखाव में सहायता करता है तथा हृदय रोगों को भी रोकता है।

बड़हल के फूल और कच्‍चे फलों का उपयोग सब्ज़ी बनाने के लिए या विभिन्‍न प्रकार की सब्ज़ियों में किया जाता है। स्‍वाद में खट्टा होने के कारण कई स्‍थानों पर इसे इमली के स्‍थान पर एक विकल्‍प के रूप में उपयोग किया जाता है। पंजाब में इसे ‘धू’ के नाम से जाना जाता है, जिसका अचार (धू दा आचार) भी बनाया जाता है। पंजाब, राजस्थान और हरियाणा में धू को सुखाकर कढ़ी में भी उपयोग किया जाता है। असम में इसकी छाल को सुपारी की तरह चबाया जाता है।

बड़हल के वृक्ष की लकड़ी मज़बूत होती है, जिसका उपयोग घर के निर्माण कार्य, मध्यम वज़न के फर्नीचर (Furniture) और नाव बनाने में किया जाता है। पूर्वोत्तर थाईलैंड में, इसकी लकड़ी का उपयोग स्थानीय पारंपरिक वाद्ययंत्र पोंग लैंग (Pong lang) बनाने के लिए किया जाता है। बड़हल के बीजों से नए वृक्षों का अंकुरण किया जा सकता है।

संदर्भ:
1. http://www.anandway.com/article/541/Badhal-Tree-in-Lucknow-India
2. https://www.healthbenefitstimes.com/monkey-fruit/
3. https://en.m.wikipedia.org/wiki/Artocarpus_lacucha



RECENT POST

  • क्या है मधुमेह टाइप 1 और टाइप 2
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     14-11-2019 12:03 PM


  • शोक मनाने के लिए बनवाया गया था कैसरबाग स्थित सफेद बारादरी
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-11-2019 11:34 AM


  • लखनऊ के ऐतिहासिक यहियागंज गुरुद्वारे का इतिहास
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     12-11-2019 12:25 PM


  • क्या पौधों में भी हो सकता है कैंसर
    कोशिका के आधार पर

     11-11-2019 12:47 PM


  • चित्रकला के इतिहास में स्पेन के कुछ मुख्य कलाकार
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     10-11-2019 03:09 AM


  • क्यों मनाया जाता है, "ईद-ए-मिलाद उन नबी" का त्यौहार
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     09-11-2019 11:30 AM


  • किराना उद्योग में ई-कॉमर्स के बढते कदम
    संचार एवं संचार यन्त्र

     08-11-2019 11:22 AM


  • वायु प्रदूषण के कारण, संकट में है जीवन
    जलवायु व ऋतु

     07-11-2019 11:44 AM


  • देश में चिकित्सकों की कमी और उससे होने वाली परेशानियां
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     06-11-2019 01:04 PM


  • भारत में क्यों नहीं आते हैं अधिक बवंडर?
    जलवायु व ऋतु

     05-11-2019 11:29 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.