ग़दर के समय लखनऊ में स्थित ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का वर्णन करती एक पेंटिंग

लखनऊ

 12-07-2019 01:02 PM
द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

सदियों पहले से ही चित्रकला ने विभिन्न देशों में अपना विशिष्ट स्थान बनाया हुआ है। विभिन्न चित्रकार किसी घटना को चित्रित कर उसे पुनः जीवित कर देते हैं। भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के वर्ष 1857 में हुई कई घटनाओं को भी विभिन्न विदेशी चित्रकारों ने अपने चित्रों के माध्यम से जीवंत किया। इनमें से कई चित्र 1857 के सैनिक विद्रोह पर आधारित हैं जिन्हें लंदन में रॉयल आर्ट अकादमी (Royal Art Academy) में दर्शाया गया। विदेश में इस तरह के भारतीय विद्रोह के चित्रों को शामिल करने से यह पता चलता है कि वहां भारत में होने वाली घटनाओं पर ध्यान दिया जाता था। इन चित्रों में से एक चित्र मशहूर ब्रिटिश चित्रकार अब्राहम सोलोमन का भी है जो विद्रोह के दौरान लखनऊ में ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का वर्णन करता है।

अब्राहम सोलोमन एक ब्रिटिश चित्रकार थे जिनका जन्म 7 मई 1823 को लंदन के बिशप्सगेट (Bishopsgate) में हुआ था। उनके पिता लंदन शहर की स्वतंत्रता में भागीदारी देने वाले पहले यहूदियों में से एक थे। 13 वर्ष की आयु में अब्राहम ने ब्लूम्सबरी (Bloomsbury) में स्थित सैस स्कूल ऑफ़ आर्ट (Sass’s School of Art) में दाखिला लिया। 1838 में एक मूर्ति की ड्राइंग (Drawing) बनाने के लिए उन्हें सोसाइटी ऑफ आर्ट्स (Society of Arts) के द्वारा आइसिस (Isis) रजत पदक दिया गया। 1839 में वे रॉयल एकेडमी (Royal Academy) के छात्र के रूप में भर्ती हुए जहां उन्होंने उसी वर्ष एक और रजत पदक प्राप्त किया। 1843 में जीवित प्राणी का चित्र बनाने के लिए उन्हें पुनः एक रजत पदक से सम्मानित किया गया।

1857 के सैनिक विद्रोह पर आधारित उनके एक प्रसिद्ध ऑयल चित्र को ‘द फ्लाइट फ्रॉम लखनऊ’ (The Flight from Lucknow) के नाम से जाना जाता है जिसे उन्होंने 1858 में कैनवास (Canvas) पर बनाया था। इसे एक विशिष्ट पेंटिग माना जाता है क्योंकि यह 1857 में हुई लखनऊ घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का बखूबी वर्णन करती है।

यह चित्र लखनऊ के निष्क्रमण का प्रतिनिधित्व करता है। लखनऊ की घेराबंदी भारत में ब्रिटिश शासन के खिलाफ विद्रोह के प्रमुख कार्यों में से एक थी जो 1857 में शुरू हुई थी। लखनऊ में ब्रिटिश आबादी के साथ 240 महिलाओं को जून से नवंबर 1857 तक रेजीडेंसी (Residency) परिसर में सीमित कर दिया गया था। सोलोमन की पेंटिंग में दो ब्रिटिश महिलाओं को विशेष रूप से दिखाया गया है जिन्होंने बहुत महंगे और अत्यधिक सजावटी कपड़े पहने हुए हैं। उनके पीछे एक भारतीय आया भी दिखती है जो एक ब्रिटिश बच्चे को संभालते हुए उनके पीछे-पीछे भाग रही है। इन तीनों के पीछे और भी ब्रिटिश महिलाएं हैं जो अपने बच्चों को साथ लिये भाग रही हैं। जहां यह चित्र अचानक हुए खतरे की स्पष्ट समझ देता है वहीं ब्रिटिश महिलाओं और भारतीय आया के बीच देखभाल और संरक्षण के सम्बंध को भी दर्शा रहा है। इस भयावह घटना को ब्रिटिश महिलाओं ने अपनी डायरी में भी वर्णित किया। पेंटिंग में पहली दो महिलाओं ने काफी महंगे कपड़े पहने हुए हैं, जो यह दर्शाते हैं कि वे इन भयानक घटनाओं के लिए तैयार नहीं थी किंतु लखनऊ में अचानक हुई घेराबंदी के कारण वे बहुत भयभीत अवस्था में हैं तथा अपनी जान को बचाते हुए भाग रही हैं। सोलोमन ने उनकी हताश हालत को अच्छी तरह से समझा है। इस विद्रोह के परिणामस्वरूप कई लोग मारे गए हालांकि इनमें विद्रोहियों की घातक संख्या अधिक थी।

हालांकि यह चित्र विद्रोह के समय ब्रिटिश महिलाओं की स्थिति का वर्णन करता है किंतु यह भारतीय महिलाओं और ब्रिटिश महिलाओं के बीच उस सम्बंध को भी दर्शा रहा है जिसमें भारतीय महिलाएं इनका संरक्षण और देखभाल करती नज़र आ रही हैं।

सन्दर्भ:
1. http://www.victorianweb.org/painting/solomona/paintings/2.html
2. https://bit.ly/2GaCU5C
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Abraham_Solomon



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