चाईनीज़ चेकर से मिलता जुलता भारतीय सुरबग्घी का खेल

लखनऊ

 19-09-2019 11:56 AM
हथियार व खिलौने

आपने अपने बचपन में विविध प्रकार के खेल खेले होंगे जिनमें से कुछ लोगों की खेलों की सूची में ‘सुरबग्घी’ का खेल भी शामिल रहा होगा। मोबाइल फोन (Mobile Phone) के बढ़ते चलन के कारण यह खेल समय के साथ-साथ अपनी पहचान खोता जा रहा है। पहले के समय में फर्श के बीचों-बीच सुरबग्घी की चौकोर बिसात बनाई जाती थी जो कुछ हद तक चाईनीज़ चेकर (Chinese Checker) और शतरंज खेलों से मिलती जुलती थी। चाईनीज़ चेकर एक स्ट्रेटेजी बोर्ड गेम (Strategy board game) है जिसे दो, तीन, चार या छह लोग व्यक्तिगत रूप से या भागीदारी में खेल सकते हैं। यह खेल मुख्य रूप से जर्मन मूल का है। इसके नियम सरल हैं जिस कारण इसे छोटे बच्चे भी खेल सकते हैं।

सुरबग्घी खेल में 32 गोटियों ज़रूरत पड़ती हैं, जिसमें 16 गोटियां एक खिलाड़ी के पाले में होती हैं और बाकी 16 दूसरे खिलाड़ी के पास होती हैं। दोनों पक्षों की गोटियों का रंग अलग होता है। इसे जीतने के लिए दिमाग को तेज़ी से दौड़ाना पड़ता है क्योंकि आपकी एक गलत चाल आपको हरा सकती है और इसलिए खेल खेलने वाले खिलाड़ियों को इसे बड़े ध्यानपूर्वक खेलना पड़ता है। इस खेल में बनाई गई चौकौर बिसात में प्वाइंटों (Points) के सहारे एक पंक्ति पर गोटियाँ चली जाती हैं। मान लीजिए कि आपकी और आपके विपक्षी खिलाड़ी की गोटी अगल-बगल है और तीसरा प्वाइंट खाली है। आपकी गोट बीच में है और अब चाल अगले खिलाड़ी की है। अगर विपक्षी खिलाड़ी आपकी गोटी को काट कर आगे के प्वाइंट पर अपनी गोटी रख देता है, तो आपकी गोटी कट जाएगी और दूसरा खिलाड़ी बाज़ी जीत जाएगा। सुरबग्घी का खेल न सिर्फ हमारी मानसिक शक्ति को बढ़ाने का काम करता है, बल्कि खाली समय में यह खेल मनोरंजन के अच्छे साधन की तरह भी काम करता है। पुराने समय में ग्रामीण सजावट के तौर पर लोग सुरबग्घी को अपने घर की ज़मीन या फिर दीवारों पर बनवाते थे। इससे घर के बच्चों के साथ-साथ महिलाएं भी खाली समय में यह खेल खेला करती थी।

2009 में लखनऊ के पास ग्रामीण ओलम्पिक (Olympic) खेलों का आयोजन किया गया था। इस आयोजन में कई खेल जैसे भैंस दुहना, साइकिल दौड़, नहर में तैरना, कबड्डी, वॉलीबाल (Volleyball), पतंगबाजी, रस्साकशी, शतरंज आदि का आयोजन किया गया था जिनमें सुरबग्घी भी शामिल था। इस प्रतियोगिता में उत्तर भारत के सात राज्यों ने भाग लिया तथा पुरस्कार के रूप में पदक के बजाय देसी घी के डिब्बे दिये गये। राजस्थान, उत्तराखंड, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश के लगभग 500 प्रतिभागियों ने ग्रामीण ओलंपिक खेल में भाग लिया। यह पहली बार था जब किसी गाँव में इस तरह के पैमाने पर राष्ट्रीय ग्रामीण खेलों का आयोजन किया गया था।

यह खेल काफी पुराना है, इतना पुराना कि इस खेल के साक्ष्य अकबर के शासन काल से भी प्राप्त होते हैं। अकबर और उसके अधिकारी, भीतर खेले जाने वाले खेलों के बहुत शौकीन थे। शतरंज खेलना उन्हें बहुत पसंद था। व्यक्तिगत रूप से अकबर ‘चंदल-मंदल’ और ‘पच्चीसी’ के खेल के बहुत शौकीन थे। उस समय ग्रामीण क्षेत्रों के लोग कबड्डी और सुरबग्घी खेलना बहुत पसंद करते थे। हालांकि सुरबग्घी आज अपनी लोकप्रियता खोता जा रहा है किंतु बौद्धिक विकास के लिए यह आज भी उतना ही लाभकारी है जितना पहले था।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/2QUobzn
2. https://bit.ly/2mo99aJ
3. https://en।wikipedia।org/wiki/Chinese_checkers
4. https://bit.ly/2mnoR5P
चित्र सन्दर्भ:
1.
https://www.youtube.com/watch?v=tk8fzs-LhaE
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Bagh-Chal#/media/File:Pic1146710_lg.jpg



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