क्या है एक घर के लिए उचित प्रकाश प्रबंधन?

लखनऊ

 28-10-2019 12:19 PM
घर- आन्तरिक साज सज्जा, कुर्सियाँ तथा दरियाँ

प्रकाश किसे नहीं अच्छा लगता? यह सौंदर्य को प्रदर्शित करने का एक महत्वपूर्ण ज़रिया है। प्रकाश प्राचीन काल से ही अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है। कई पुरातात्त्विक गुफाओं में इसके अवशेष दिखाई देते हैं। वर्तमान काल में हम अपने घरों में विभिन्न प्रकार के प्रकाश के बल्बों (Bulbs) आदि को लगाते हैं। तो आइये पढ़ते हैं इन विभिन्न प्रकाश व्यवस्थाओं के बारे में और इनके तमाम रंगों के महत्व के बारे में भी जानने की कोशिश करते हैं। अब यह जानना इस लिए भी आवश्यक है क्यूंकि विभिन्न रंगों का मानव शरीर और मस्तिष्क पर भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ता है। प्रकाश का संयोजन एक घर के आतंरिक साज सज्जा का विषय है। यह कमरे के अन्दर के रंग, प्राकृतिक प्रकाश आदि के आधार पर आधारित होता है। यदि फर्नीचर (Furniture), सामान, कमरे का आकार, उसमें भरा गया रंग आदि सही संयोजन में हो तो सही प्रकाश का संयोजन उसमें चार चाँद लगा जाता है।

किसी भी घर या कमरे में रंग संयोजन एक महत्वपूर्ण बिंदु है। यदि किसी कमरे को गहरे रंग से रंगा गया हो तो वह कमरा छोटा और तंग महसूस होता है और वहीं हल्का रंग इसे विपरीत अनुभव कराता है। एक कमरे के सम्पूर्ण कोनों में यदि रोशनी पहुंचती है तो वह कमरा बड़ा और खुला हुआ प्रतीत होता है। ऐसे प्रकाश के लिए छत से लटका कर रौशनी करने की आवश्यकता होती है। इसके अलावा दीवारों आदि पर रखी गयीं या लगायी गयीं विभिन्न वस्तुओं जैसे कि पेंटिंग (Painting) आदि के लिए स्वतंत्र प्रकाश का इंतज़ाम किया जा सकता है। इस प्रकार के प्रकाश को दिशा सूचक प्रकाश के संयोजन की संज्ञा दी जा सकती है। आतंरिक घर के प्रकाश संयोजन में विभिन्न प्रकाश के बल्बों आदि को ऐसी स्थिति में लगाया जाना चाहिए जो कि अपने निहित कार्य को पूरा कर सके बजाय उसके कि बिजली की बर्बादी हो। इस प्रकार के संयोजन में प्रकाश को एक प्रस्तुत दिशा में निर्देशित किया जाता है।

स्थान का संयोजन भी प्रकाश के संयोजन में अत्यंत ही महत्वपूर्ण है। ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार यह सामने आया है कि विभिन्न प्रकार के प्रकाश हमारी नींद पर भी विभिन्न प्रकार के प्रभाव डालते हैं। विभिन्न शोधों से पता चला है कि व्यक्ति करीब 1 करोड़ रंगों में भेद कर सकता है।
इन रंगों को तीन मुख्य रंगों में बांटा जा सकता है जैसे कि पीला, लाल और नीला। इन रंगों के अलावा तीन द्वितीयक रंग होते हैं जैसे कि नारंगी, बैंगनी और हरा। इन सभी रंगों का अपना एक अर्थ होता है। लाल रंग ऊर्जा के लिए होता है तथा यह यौन इच्छाओं को भी बढ़ाता है। पीला रंग मानसिक तनाव को दूर करता है। नीला रंग लोगों को शांत करता है तथा यह रक्तचाप को कम करता है जो कि लाल रंग से बढ़ जाता है। हरा रंग प्रकृति का रंग है। यह विकास के लिए आवश्यक होता है तथा हारमोन (Hormones) के निर्माण में यह अहम भूमिका निभाता है। बैंगनी रंग नींद और शांति का प्रतीक है। यह रंग मानसिक तनाव कम करता है तथा यह यौन इच्छाओं को कम करता है। नारंगी रंग रचनात्मक है, यह नए विचारों को प्रदान करता है तथा इसका सम्बन्ध श्वसन प्रक्रिया से भी है।

संदर्भ:
1. https://homeguides.sfgate.com/importance-lighting-interior-design-56751.html
2. http://anj.co.in/idea-at-anj/importance-of-lighting/
3. http://applications.nam.lighting.philips.com/blog/index.php/2015/08/06/the-subconscious-effect-of-colored-lighting/
4. https://www.dmlights.com/blog/effect-coloured-light-on-human-body/
5. https://www.sciencedaily.com/releases/2016/06/160608154233.htm


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