क्या वन आवरण पर भारत में नीति संशोधन की है आवश्यकता

लखनऊ

 20-11-2019 12:00 PM
जंगल

भारत न केवल अपने विविध वन्यजीवों, आकर्षक वास्तुकलाओं और संस्कृति व सभ्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने घने और विशाल वन आवरण के लिए भी विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यहां की अनुकूल जलवायु के कारण विविध प्रकार की वनस्पतियों और जीवों की विविधता को इसके क्षेत्रों में विशेष रूप से देखा जा सकता है। कृषि के बाद वन विविधता ही भारत में दूसरा सबसे बड़ा भूमि उपयोग है। यहां का वन आवरण लगभग 6.783 करोड़ हेक्टेयर में फैला हुआ है, जो देश के भौगोलिक क्षेत्र का 20.64% है। इन वनों में 45,000 से भी अधिक फूलों और 81,000 से भी अधिक जानवरों की प्रजातियां देखी जा सकती हैं।

भारत में वनों को मुख्य रूप से निम्नलिखित प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:
नम उष्णकटिबंधीय वन: ऐसे वन वहां पाये जाते हैं जहां वार्षिक वर्षा की मात्रा 200 से 250 से.मी. के बीच होती है तथा औसत वार्षिक तापमान 24 और 27 के बीच होता है। इस तरह के क्षेत्र में आर्द्रता 80% होती है। ये वन प्रायः पश्चिमी तट पर, ऊपरी असम में, पूर्वी हिमालय की निचली ढलान, उड़ीसा तट आदि स्थानों में पाए जाते हैं। इनकी महत्वपूर्ण पौधों की किस्मों में बांस, एपिफाइट्स (Epiphytes), सेमल, शीशम, हलदु, कंजू, बिजसाल, कुसुम, चम्पा आदि शामिल हैं।

शुष्क उष्णकटिबंधीय वन: इस प्रकार के वन मुख्य रूप से भारतीय उत्तरी पहाड़ी क्षेत्रों और दक्षिणी भारत के कुछ राज्यों में पाए जाते हैं। मूल रूप से, ये वन वहां उत्पन्न होते हैं, जहाँ औसत वार्षिक वर्षा सीमा 51 से.मी. से 151 से.मी. तक होती है। शुष्क उष्णकटिबंधीय वन के कुछ महत्वपूर्ण पेड़ हैं साल, बबूल, आम, जामुन इत्यादि।

मोंटेन समशीतोष्ण वन (Montane temperate forest): इस प्रकार के वन मुख्य रूप से उत्तरी मध्य हिमालय पर्वतमाला (1801 से 3001 मीटर) और दक्षिणी नीलगिरि पर्वत श्रृंखलाओं में पाये जाते हैं। ऐसे वन उन स्थानों में पाये जाते हैं जहां औसत वार्षिक वर्षा 201 से.मी. होती है। मोंटेन समशीतोष्ण वन के कुछ महत्वपूर्ण पेड़ रोडोडेंड्रोन (Rhododendron), फर्न (Fern), ओक (Oak), मेपल (Maple), देवदार इत्यादि हैं।

मोंटेन उपोष्णकटिबंधीय वन: इस प्रकार के वन मुख्य रूप से असम राज्य, नागालैंड, मिज़ोरम, मेघालय, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश आदि में पाये जाते हैं। पश्चिमी घाट की पर्वत श्रृंखलाएँ भी इन प्रकार के वनों का निवास स्थान हैं। मोंटेन के उप-उष्णकटिबंधीय वन के कुछ महत्वपूर्ण पेड़ पूंसपार, दालचीनी, रोडोडेंड्रोन, साल, अनार, जैतून, ओलियंडर (Oleander) इत्यादि हैं।

अल्पाइन वन (Alpine forest): ये वन प्रायः हिमालयी क्षेत्रों में लगभग 3,000 मीटर की ऊँचाई पर पाये जाते हैं। अर्थात बर्फ रेखा के ठीक नीचे। यहां पायी जाने वाली मुख्य वनस्पतियों में जुनिपर (Juniper), ड्रूपिंग (Drooping) जुनिपर आदि शामिल हैं।

वन एक स्वस्थ वातावरण बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और वायु प्रदूषण को कम करते हैं। यहां जीवों की विविध प्रजातियों को आवास तथा भोजन की भी सुविधा प्राप्त होती है जिससे देश में जीव-जंतुओं की विभिन्न प्रजातियों में विविधता उत्पन्न होती है। कुल भारतीय क्षेत्रों का लगभग 19.26% भाग वनों से आच्छादित है। भारत के प्रमुख वनों में अबूजमढ़, एनेकल आरक्षित वन, बैकुंठपुर वन, भावनगर अमरेली वन, भितरकनिका मैंग्रोव (Bhitarkanika Mangroves), द्वैत वन, जकनारी आरक्षित वन, काम्यका वन, कुकरैल आरक्षित वन, मधु वन, मोलाई वन, मुलाई कैथोनी आदि शामिल हैं।

पूर्वोत्तर क्षेत्र के वर्तमान मूल्यांकन में 630 वर्ग किलोमीटर तक वन आवरण की वास्तविक कमी दिखाई दी है। इंडियन स्टेट फोरेस्ट रिपोर्ट (Indian State Forest Report -ISFR) के अनुसार, जनसंख्या और पशुधन के दबाव के बाद भी 2015 से 2017 के बीच समग्र वन और वृक्ष आवरण में एक प्रतिशत (8,021 वर्ग किमी) की बढ़ोतरी हुई। 2015 और 2017 के बीच, भारत के वन आवरण में 6,778 वर्ग किमी का फैलाव हुआ। जिससे पूरी दुनिया में भारत वन आवरण के संदर्भ में 10वें स्थान पर रहा। यहां 24.4% भूमि क्षेत्र वन और वृक्षों से आच्छादित है। इस आच्छादन को बढ़ाने में तीन दक्षिणी राज्यों आंध्र प्रदेश (2,141 वर्ग किमी), कर्नाटक (1,101 वर्ग किमी) और केरल (1,043 वर्ग किमी) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

क्षेत्रफल के लिहाज़ से, मध्य प्रदेश में देश का सबसे बड़ा (77,414 वर्ग किमी) वन आवरण है। जिसके बाद क्रमशः अरुणाचल प्रदेश (66,964 वर्ग किमी) और छत्तीसगढ़ (55,547 वर्ग किमी) में वन आवरण सबसे अधिक है। किंतु इन राज्यों में वन आवरण में गिरावट दर्ज की गयी। कुल भौगोलिक क्षेत्र के संबंध में वन आवरण लक्षद्वीप (90.33%) में सबसे अधिक है तथा इसके बाद मिज़ोरम (86.27%) और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (81.73%) हैं।

भारत सरकार ने राष्ट्रीय वन नीति के मसौदे में तत्काल सुधार की आवश्यकता महसूस की है क्योंकि वर्तमान में लागू राष्ट्रीय वन नीति 1988 की है जब भारत का आर्थिक उदारीकरण शुरू हुआ था। यह नीति कॉर्पोरेट (Corporate) निवेश में गिरावट को बढ़ावा दे रही है जिस कारण इस पर संशोधन की आवश्यकता महसूस की गयी है।

संदर्भ:
1.
https://en.wikipedia.org/wiki/List_of_forests_in_India
2. https://bit.ly/2O6TUyh
3. https://bit.ly/37ozmsn
4. https://www.theearthsafari.com/forests-of-india.php
5. http://www.frienvis.nic.in/KidsCentre/Types-of-Indian-Forest_1811.aspx



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