कभी पृथ्वी पर पैरों से विचरण करता था, सबसे विशाल जीव समुद्री व्हेल

लखनऊ

 29-11-2019 12:05 PM
शारीरिक

क्या आप जानते हैं कि इस पृथ्वी पर आकार में सबसे बड़ा जीव कौन सा है? आप इसका अंदाजा बहुत सहज में ही लगा सकते हैं। वह जीव और कोई नहीं बल्कि समुद्र में पायी जाने वाली विशाल व्हेल (whale) है। कई लोग यह सोचते हैं कि इस पृथ्वी पर सबसे बड़ा जीव डायनासौर था। किंतु व्हेल उससे भी बडी है जो मिलियन वर्ष पूर्व उस रूप में नहीं थी जिस रूप में आज हम उसे देखते हैं। वे भोजन की तलाश में गहरे नीले समुद्र में घूमती रहती हैं किंतु हमेशा ऐसा नहीं होता था।

लाखों साल पहले व्हेल अन्य चार पैरों वाले जीवों की तरह भूमि पर ही निवास करती थी। किंतु यह घटना एक जिज्ञासा उत्पन्न करती है कि आखिर यह जीव समुद्र में आयी कैसे और कैसे इसका शरीर इतना विशाल हो गया। 50 मिलियन वर्ष पहले समुद्र में इस तरह का कोई जीव नहीं पाया जाता था। इस समय व्हेल धरती पर ही अपने चार पैरों के साथ विचरण करती थी। समुद्र में पायी जाने वाली पहली व्हेल पैकिसीटस (Pakicetus) थी।

50 से 40 मिलियन साल पहले व्हेल ने अपने चार पैरों को पंखों में रूपांतरित करने के लिए बहुत लम्बा सफर तय किया। कुछ व्हेल में आज भी पैरों की हड्डियां आंशिक रूप से दिखायी देती हैं। दरअसल भोजन की तलाश में ये जीव भूमि से जल में उतरे जिससे इनके पैर पंखों में रूपांतरित हो गये और इनका आकार सैद्धांतिक रूप से भारी अनुपात में बढने लगा।

आज की ब्लू (Blue) व्हेल पैकिसीटस की तुलना में 10 हजार गुना अधिक भारी है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ब्लू व्हेल अब तक की सबसे विशाल व्हेल है जिसका वजन 173 टन है और इसकी लंबाई 29.9 मीटर तक बढ़ सकती है। भोजन की तलाश में व्हेल ने बहुत मीलों तक यात्रा की जिसका प्रभाव इनकी लम्बाई पर भी पडा। शोधकर्ताओं के अनुसार व्हेल का विकास हिम युग की शुरुआत में होने लगा था।

ब्लू (Blue), फिन (Fin), हम्प्बैक (Humpback), मिंके (minke), सेई (sei), मेलोन हेडेड (melon headed), पिज्मी ब्लू (pygmy blue), स्पर्म (sperm) आदि व्हेल की ऐसी प्रजातियां हैं जो भारतीय महासागर में पायी जाती हैं।

भारत में व्हेल के संरक्षण के लिए हिंद महासागर व्हेल अभयारण्य बनाया गया है। यह हिंद महासागर का वह क्षेत्र है जहां अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग (IWC) द्वारा सभी प्रकार के वाणिज्यिक व्हेलिंग पर प्रतिबंध लगाया है। हिंद महासागर व्हेल अभयारण्य की स्थापना 1979 में हुई थी। प्रत्येक 10 वर्षों में अंतर्राष्ट्रीय व्हेलिंग आयोग द्वारा हिंद महासागर व्हेल अभयारण्य की स्थिति की समीक्षा की जाती है।

संदर्भ:-
1.
http://www.walkthroughindia.com/offbeat/10-species-whales-found-indian-ocean/
2. https://bit.ly/2KPhKME
3. https://en.wikipedia.org/wiki/Indian_Ocean_Whale_Sanctuary
4. https://bit.ly/35IFYjS
5. https://nyti.ms/2ONvn00
चित्र सन्दर्भ:-
1.
https://bit.ly/34qYmNX
2. https://es.m.wikipedia.org/wiki/Archivo:Pakicetus_BW.jpg
3. https://commons.wikimedia.org/wiki/File:Pakicetus_Canada.jpg
4. https://bit.ly/2qWInbN
5. https://bit.ly/2OvKKLO



RECENT POST

  • पहला वाहन लेने से पहले ध्यान में रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     20-01-2021 11:53 AM


  • भारत की जनता की नागरिकता और उससे जुडे़ विशेष नियम
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-01-2021 12:32 PM


  • आदिवासी समूहों द्वारा आज भी स्वदेशी रूप में संजोयी गयी हैं, आभूषणों की प्राचीन कलाएं
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:47 PM


  • मदद करने से मिलती है खुशी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 12:14 PM


  • क्या मिक्सर ग्राइंडर से बेहतर है भारत भर में प्रचलित सिलबट्टा
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:32 PM


  • वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है, लखनऊ की तारे वाली कोठी शाही वेधशाला
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:56 AM


  • अग्नि और सूर्य देवता को समर्पित है, लोहड़ी का उत्सव
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-01-2021 12:15 PM


  • क्या है आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से वजन बढ़ने का कारण?
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     13-01-2021 12:15 PM


  • अर्थव्यवस्था के सुचारू संचालन के लिए उत्तरदायी भारतीय रिजर्व बैंक
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     12-01-2021 11:40 AM


  • लॉकडाउन में बड़ी अंत:कक्ष खेलों की लोकप्रियता
    हथियार व खिलौने

     11-01-2021 10:53 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id