रेस्तरां एग्रीगेटर्स (Restaurant Aggregators) का अर्थशास्त्र

लखनऊ

 05-12-2019 01:40 PM
सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

हाल ही के दशक में ऑनलाइन बिजनेस मॉडलों में कई बदलाव आये हैं और इनमे एक बड़ी आबादी जुड़ना शुरू हो गयी है। सस्ता इन्टरनेट और इन्टरनेट की बढती लोकप्रियता का सबसे बड़ा सबूत यही है की यहाँ पर गावों से लेकर शहरों और महानगरों तक एक बड़ी आबादी ने ऑनलाइन खरीददारी करना शुरु कर दिया है। आज की बात करें तो टिकट से लेकर कपडे खाने आदि ऑनलाइन ही आर्डर होने लगे हैं और इनका सबसे बड़ा फायदा यह निकल कर सामने आया कि लोगों को बाहर निकलने की जरूरत ही नहीं पड़ती बल्कि गरम खाना घर तक पहुच जाता है वो भी एकदम कम समय में। वर्तमान समय में खाने को लेकर यदि देखा जाए तो ज़ोमेटो, स्विगी, ऊबर इट्स आदि ऐसे ऑनलाइन तरीके हैं जिनसे खाना मंगाया जा सकता है। ये ऐसे भी तरीके हैं जहाँ पर कई बार तो होटल के भी निर्धारित दर से भी कम दर में खाना आपके घर तक पहुँचा देते हैं। ऐसा कैसे होता है इसके बारे में इस लेख में पढ़ते हैं और यह भी पढते हैं कि आखिर इनके व्यापार का मॉडल क्या है।

इन सभी ऑनलाइन उद्योगों का मॉडल अंडरकट के रूप में जाना जाता है जोकि एक मूल्य निर्धारण रणनीति है जिसमे नए ग्राहकों की प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही कम कीमत का निर्धारण किया जाता है। यह मूल्य निर्धारण कम से कम कीमत पर अधिक से अधिक ग्राहकों को अपनी और आकर्षित करती है और साथ ही साथ यह यह भी तय करती है कि कोई नया व्यक्ति इस व्यापार में न आ सके। क्यूंकि यदि कोई नया व्यक्ति इस धंधे में आया तो उसे और भी कम कीमतों का निर्धारण करना पड़ेगा।

अब जब कोई नया प्रतिद्वंदी इस प्रकार के व्यापार में नहीं आता तो इससे उन्ही चंद कंपनियों का एकाधिकार स्थापित हो जाता है। कई तरह से यह व्यापार एक प्रतिस्पर्धा माना जाता है और कई तरीकों में यह अवैध भी है जिससे कई छोटे व्यापारियों का भारी नुक्सान हो जाता है। हाल ही में भारत की खाद्य की दो सबसे बड़ी कंपनियों के विलय की बात चल रही थी और ये डो कम्पनियां थी स्विगी और ज़ोमेटो। दोनों ही कंपनिया वर्तमान काल में शीर्ष पर हैं और इन अटकलों पर ज़ोमेटो ने कहा की विलय की बात गलत है। वर्तमान काल में भारत में जिस प्रकार से ये उद्योग उठ रहा है वह करीब 15 बिलियन डॉलर के करीब पहुँच रहा है।

खाद्य जगत में यदि यह देखा जाए की जोमेटो और स्विगी एक हो जाते तो ये भारत के शीर्ष के व्यापारिक कंपनी में बदल जाते हांलाकि यह भी एक महत्वपूर्ण प्रश्न है की आखिर खाने के खेल में मात्र बड़े व्यवसाई या उद्यमी ही क्यूँ है। इसका सीधा सा जवाब यही है की जिस प्रकार से अंडरकट की धारणा इस क्षेत्र में है तो उस प्रकार से नए ग्राहकों को खीचने के लिए एक अत्यंत ही बड़े इन्वेस्टमेंट या खर्च की जरूरत होती है जिसे की छोटा व्यापारी शायद ही सह पाए। यह एक मुख्या कारण है इस व्यापार का।

सन्दर्भ:-
1.
https://bit.ly/33wisVQ
2. https://bit.ly/34xnNxc
3. https://bit.ly/33wMAQI
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Predatory_pricing
5. https://bit.ly/33xN35c



RECENT POST

  • तीव्रता से बढ़ती जा रही कृत्रिम मांस की मांग
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     24-01-2021 10:56 AM


  • लखनऊ विश्‍वविद्यालय का संक्षिप्‍त इतिहास
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     23-01-2021 12:18 PM


  • विश्व युद्धों को समाप्त करने में लखनऊ ब्रिगेड का महत्व
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     22-01-2021 03:35 PM


  • जर्मप्लाज्म सैम्पलों (Sample) पर लॉकडाउन का प्रभाव
    स्तनधारी

     21-01-2021 01:41 AM


  • पहला वाहन लेने से पहले ध्यान में रखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण बातें
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     20-01-2021 11:53 AM


  • भारत की जनता की नागरिकता और उससे जुडे़ विशेष नियम
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     19-01-2021 12:32 PM


  • आदिवासी समूहों द्वारा आज भी स्वदेशी रूप में संजोयी गयी हैं, आभूषणों की प्राचीन कलाएं
    सिद्धान्त I-अवधारणा माप उपकरण (कागज/घड़ी)

     18-01-2021 12:47 PM


  • मदद करने से मिलती है खुशी
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     17-01-2021 12:14 PM


  • क्या मिक्सर ग्राइंडर से बेहतर है भारत भर में प्रचलित सिलबट्टा
    वास्तुकला 2 कार्यालय व कार्यप्रणाली

     16-01-2021 12:32 PM


  • वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण पेश करती है, लखनऊ की तारे वाली कोठी शाही वेधशाला
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     15-01-2021 12:56 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id