हिन्दू-मुस्लिम एकता में भक्ति और सूफी आंदोलन का योगदान

लखनऊ

 29-02-2020 11:30 AM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

भारत की आध्यात्मिक भूमि ने कई धर्मों को जन्म दिया है, जैसे हिंदू धर्म, जैन धर्म और बौद्ध धर्म। इन सभी धर्मों के अलावा भारत में इस्लाम और ईसाई धर्म भी आए, जिससे भारत एक विविध धर्मों वाला देश बन गया। हालांकि विगत कुछ समय से हिन्दू-मुस्लिम एकता एक चिंता का विषय बना रहा है क्योंकि समय के साथ विचारों के न मिलने के कारण इन दोनों धर्मों के बीच आपसी द्वेष और शत्रुता उत्पन्न होने लगी थी। तभी मानवीय अज्ञानता और आपसी द्वेष और शत्रुता को हटाने के लिए गंभीर धार्मिक विचारकों के समूह ने सूफी और भक्ति आंदोलन से लोगों को भगवान और धर्म के बारे में जागृत किया। उन्होंने हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भाईचारा, प्रेम और दोस्ती स्थापित करने के लिए हर संभव प्रयास करे। सूफी आंदोलन 14वीं से 16वीं शताब्दी का सामाजिक-धार्मिक आंदोलन था। इस आंदोलन के प्रतिपादक अपरंपरागत मुस्लिम संत थे जिन्होंने भारत के वेदांत दर्शन और बौद्ध धर्म का गहन अध्ययन किया था।

उन्होंने भारत के विभिन्न धार्मिक ग्रंथों को पढ़ा और भारत के महान संतों और सिद्ध पुरुषों के संपर्क में आए। साथ ही उन्होंने भारतीय धर्म को बहुत निकटता से देखने का प्रयास किया और इसके आंतरिक मूल्यों को भी महसूस किया। तदनुसार उन्होंने इस्लामिक दर्शन का विकास किया जिसने अंत में सूफी आंदोलन को जन्म दिया। सूफी आंदोलन इसलिए इस्लाम पर हिंदू प्रभाव का परिणाम था। इस आंदोलन ने मुसलमानों और हिंदुओं दोनों को प्रभावित किया और इस प्रकार, दोनों के लिए एक सामान्य मंच भी प्रदान किया। उन्हें सूफी इसलिए कहा जाता था क्योंकि वे अपनी गरीबी के कारण ‘सूफ’ (ऊन) के वस्त्र पहनते थे। इस प्रकार सूफी नाम सूफ शब्द से लिया गया। वे प्रेम को ईश्वर तक पहुंचने का एकमात्र साधन मानते हैं। पाकिस्तान और भारत में सूफी और भक्ति परंपरा क्रमशः इस्लाम और हिंदू धर्म के भीतर से दो ऐसी प्रवृत्तियाँ हैं, जो संप्रदायों के बंटवारे से ऊपर उठकर मानवता की एकता पर केंद्रित हैं। हमने कबीर, तुकाराम, नरसी मेहता, शंकर देव, लाल डेढ़ जैसे लोगों की समृद्ध परंपराओं को स्पष्ट रूप से हिंदू परंपरा के भीतर से देखा है, जबकि निज़ामुद्दीन औलिया, मोइनुद्दीन चिश्ती, ताजुद्दीन बाबा औलिया अजान पीर, नूरुद्दीन नूरानी (जिन्हें नंद ऋषि भी कहा जाता है) एक स्पष्ट सूफी परंपरा के विचारधारक थे और अन्य ऐसे ही कई महान व्यक्तियों से भक्ति और सूफी स्वयं गहरे रूप से जुड़े हुए हैं।

वहीं संत गुरु नानक देव जी द्वारा भी हिन्दू-मुस्लिम धर्म की एकता को बनाने के लिए विभिन्न प्रयास किए गए थे। उन्होंने इस्लाम के ज्ञान को जानने के लिए मक्का तक की यात्रा की और हिंदू धर्म के आध्यात्मिक नैतिक पहलुओं को जानने के लिए काशी गए थे। उनके पहले अनुयायी भाई मर्दाना थे और मियाँ मीर को पवित्र सिख तीर्थ के स्वर्ण मंदिर की नींव रखने के लिए सम्मानपूर्वक आमंत्रित किया गया था। सूफीवाद ने दक्षिण एशिया में धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन पर एक प्रचलित प्रभाव छोड़ा था। इस्लाम के रहस्यमयी रूप को सूफी संतों द्वारा पेश किया गया था। पूरे महाद्वीपीय एशिया से यात्रा करने वाले सूफी विद्वानों ने भारत के सामाजिक, आर्थिक और दार्शनिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। वहीं सूफीवाद एक "नैतिक और व्यापक सामाजिक-धार्मिक शक्ति" के रूप में उभरा, जिसने हिंदू धर्म जैसी अन्य धार्मिक परंपराओं को भी प्रभावित किया था।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/3chPIWq
2. https://www.dawn.com/news/1179527
3. https://dharmadeen.com/2015/08/20/bhaktsufiunity/
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Sufism_in_India



RECENT POST

  • बैल या सांड को वश में करने से सम्बंधित खतरनाक खेल है, बुलफाइटिंग
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     16-05-2021 12:00 PM


  • लखनऊ खजूर गांव महल का क्या है इतिहास
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     14-05-2021 09:33 PM


  • लखनऊ में ईद का जश्न कोरोना महामारी के कारण काफी प्रभावित हुआ है
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     14-05-2021 07:41 AM


  • मधुमक्खी पालने वाले कैसे अमीर हो रहे हैं और हमारी नन्ही दोस्त मधुमक्खी किस संकट में हैं?
    पंछीयाँतितलियाँ व कीड़े

     13-05-2021 05:24 PM


  • अपनी नैसर्गिक खूबसूरती के साथ भयावह नरसंहार का साक्ष्य सिकंदर बाग
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     12-05-2021 09:29 AM


  • ग्रॉसरी उत्पादों की ऑनलाइन बिक्री में सहायक हुई हैं,ई-कॉमर्स कंपनियां और कोरोना महामारी
    संचार एवं संचार यन्त्र

     10-05-2021 09:45 PM


  • शहतूत- साधारण किंतु अत्यंत लाभकारी फल
    पेड़, झाड़ियाँ, बेल व लतायें बागवानी के पौधे (बागान)साग-सब्जियाँ

     10-05-2021 08:55 AM


  • आनंद, प्रेम और सफलता का खजाना है, माँ
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     09-05-2021 12:23 PM


  • मानव सहायता श्रमिक (Humanitarian Aid Workers)कोरोना काल के देवदूत हैं।
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     08-05-2021 09:05 AM


  • नोबल पुरस्कार विजेता रबीन्द्रनाथ टैगोर का संगीत प्रेम तथा लखनऊ शहर से विशेष लगाव।
    ध्वनि 1- स्पन्दन से ध्वनिध्वनि 2- भाषायें विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     07-05-2021 10:00 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id