अनिश्चित काल के लॉकडाउन (lockdown) से उबरने के लिए शहर कर सकते हैं, बुनियादी ढांचे में परिवर्तन

लखनऊ

 07-04-2020 05:00 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

वर्तमान समय में पूरा विश्व कोरोना (corona) महामारी से जूझ रहा है। यह संक्रमण बहुत तेजी से फैल रहा है, जिसे रोकने के लिए सभी शहरों को अनिश्चित काल के लिए लॉकडाउन (lockdown) कर दिया गया है। इसने शहरी व्यापार केंद्रों और उपनगरीय मॉल्स (malls) को भूतिया शहरों में बदल दिया है अर्थात यहां की चहल-पहल लॉकडाउन के चलते समाप्त हो चुकी है। इस लॉकडाउन ने अर्थव्यवस्था के विभिन्न पहलूओं को कई तरह से प्रभावित किया है। जब तक इस महामारी को रोकने के लिए कोई वैक्सीन (vaccine) या अन्य उपाय तैयार नहीं किया जाता है, तब तक इस महामारी के बार-बार फैलने की संभावना बनी रहेगी। यदि लॉकडाउन इसी प्रकार से आगे भी चलता रहता है, तो अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है, जिससे महामंदी के प्रभावों को आसानी से देखा जा सकेगा। यह सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल विश्व-अर्थव्यवस्था को हिला रहा है तथा इस अवस्था में शहरों को और अधिक बंद रखना, एक स्थायी उपाय नहीं हो सकता। यदि शहरों को और अधिक बंद रखा गया तो इसके प्रभावों को लंबे समय तक सहन करना पड़ेगा। इस समस्या से उबरने के लिए कुछ ऐसे बदलाव आवश्यक हैं, जो विभिन्न लॉकडाउन हुए शहरों या क्षेत्रों को करने चाहिए।

जहां शहर इस महामारी के पहले चरण से निपटने के लिए आवश्यक स्वास्थ्य और चिकित्सा संसाधनों के पूर्ण-विकास पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, वहीं यह भी महत्वपूर्ण है कि वे सुरक्षित भविष्य के लिए भी तैयार हो जायें। ऐसे कई महत्वपूर्ण परिवर्तन हैं जिन पर राज्यों, शहरों, महापालिका अध्यक्षों, राज्यपालों और सामुदायिक नेताओं को ध्यान केंदित करना चाहिए। जैसे परिवहन अवसंरचना, अर्थव्यवस्था की संचार प्रणाली आदि बहुत महत्वपूर्ण हैं। हवाई अड्डे जहां शहरों को जोड़ते तथा दुनिया भर में लोगों और वस्तुओं के प्रवाह को सक्षम बनाते हैं, वहीं शहरी अर्थव्यवस्थाओं के प्रमुख चालक भी हैं। इसलिए इन्हें अनिश्चित काल के लिए निष्क्रिय नहीं किया जा सकता। कुछ सुरक्षा उपायों जैसे तापमान जांच और आवश्यक स्वास्थ्य जांच की मौजूदा सुरक्षा को बढ़ाकर समस्या को कम किया जा सकता है तथा भविष्य के लिए तैयार किया जा सकता है। अत्यधिक भीड़-भाड़ को कम करके, प्रतीक्षा वाले क्षेत्रों में फर्श और छतों पर पर्याप्त चित्रित स्थानों, मास्क (masks) और सैनिटाइजर (sanitizers) को उपलब्ध करवाकर सोशियल डिस्टेंसिंग (social distancing) को बढ़ावा दिया जा सकता है। संक्रमण को कम करने के लिए एयरलाइंस (airlines) अपने यात्रियों की संख्या को कम कर सकता है तथा बीच की सीटें खुली रख सकता है। इसी प्रकार से बस और ट्रेन स्टेशनों के डिजाइन (design) तथा सीटों की व्यवस्था को भी संक्रमण को देखते हुए परिवर्तित किया जा सकता है।

सड़कों के लिए भी जो सुरक्षा सुविधाएं पहले नहीं बनाई गयी थीं, उन्हें निर्मित किया जाना चाहिए जैसे - बाइक लेन (bike lane) का विस्तार और बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना। आवश्यक सोशियल डिस्टेंसिंग को बढ़ावा देने के लिए भीड़-भाड़ वाले व्यावसायिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में चलने के लिए बनाए गये मार्गों का भी विस्तार होना चाहिए। दूसरा यह कि, बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे के अन्य रूपों स्टेडियम (stadium), कन्वेंशन सेंटर (convention center), प्रदर्शन कला केंद्र, विश्वविद्यालय, स्कूल आदि में परिवर्तन के लिए उचित रणनीतियों की आवश्यकता है, ताकि इनका फिर से उपयोग किया जा सके। चूंकि यहां लोगों का बड़ा समूह एकत्रित होता है, इसलिए ये सभी विषाणु संक्रमण के जोखिम को बढ़ा सकते हैं। इन सभी को जितना सम्भव हो उतना महामारी से बचने के लिए तैयार किया जाना चाहिए। इसके लिए कक्षाओं में छात्रों की तथा सिनेमाघरों में दर्शकों की संख्या को कम करने की आवश्यकता हो सकती है। स्कूलों के लिए ऑनलाइन शिक्षण (online education) की सुविधा भी दी जा सकती है।

संक्रमण को कम करने के लिए सिनेमाघरों की कई सीटों को खाली भी छोड़ा जा सकता है। तापमान जांच तथा मास्क उपलब्ध करवाने जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। जितनी जल्दी ये सभी सुविधाएं या सुरक्षा उपाय अपनाए जाएंगे उतनी जल्दी इन लॉकडाउन शहरों को खोला जा सकेगा तथा उतनी ही तेज़ी से हमारी शहरी अर्थव्यवस्थाएँ पटरी पर आयेंगी। रोजगार उत्पन्न करने वाले छोटे व्यवसायों को किराए और कर से राहत, शून्य-ब्याज ऋण आदि के रूप में जो भी सहायता मिल सकती है, उपलब्ध करवायी जानी चाहिए। कला दीर्घाओं, संग्रहालयों, सिनेमाघरों और संगीत स्थलों के साथ-साथ कलाकारों, संगीतकारों और अभिनेताओं की रचनात्मक अर्थव्यवस्था भी गंभीर जोखिम में है। इनकी सांस्कृतिक पृष्ठ्भूमि को जीवित रखने के लिए आवश्यक वित्त पोषण प्रदान करना योजना का हिस्सा हो सकता है। इन अर्थव्यवस्थाओं और स्थानों को जीवित रखने वाले लोगों की सुरक्षा के लिए भी सक्रिय कदम उठाने चाहिए। सख्त सीमाओं पर नियंत्रण (tighter borders controls), व्यापक बीमा कवरेज (insurance coverage) और काम करने तथा आने-जाने के पैटर्न (patterns) में स्थायी बदलाव ऐसे कुछ सूक्ष्म आर्थिक बदलाव होंगे, जो लंबे समय तक रहेंगे।

संदर्भ:
1.
https://bit.ly/2JI69hA
2. https://bit.ly/2RifsZH
चित्र सन्दर्भ:
1.
unsplash.com - modified Image
2. picseql.com -



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