लखनऊ मेट्रो के लिए पतंगबाजी बनी एक चुनौती

लखनऊ

 24-04-2020 10:10 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

पतंगें उड़ाने का शौक़ बहुतों के लिए ख़ाली वक़्त का मनोरंजन हो सकता है, लेकिन बिजली विभाग के लिए यह एक बुरा सपना साबित हो रहा है हालाँकि बिजली की सप्लाई में रुकावट डालने और बिजली उपकरण को नुक़सान पहुँचाने के मामलों में बिजली ऐक्ट में सज़ा की व्यवस्था है।
लॉकडाउन के दौरान लखनऊ मेट्रो के लिए पतंगबाज़ी एक चुनौती बन गई है। कोरोना वायरस के दौर में मेट्रो के ऊँचे रेलवे ट्रैक के पास पतंगें उड़ाने से उनका चीनी मांझा (पतंग का धागा) बिजली सप्लाई के तारों को नुक़सान पहुँचा रहा है। उ. प्र. मेट्रो रेल कॉर्परेशन लिमिटेड (UPMRC) के अनुसार लॉकडाउन की वजह से समस्त बंद चल रहे हैं। निशातगंज, बादशाहनगर, IT क्रॉसिंग, परिवर्तन चौक और आलमबाग़ क्षेत्रों में, जो मेट्रो कोरिडोर के काफ़ी नज़दीक हैं, भारी मात्रा में पतंगें उड़ाई जाती हैं। हाल ही में चीनी मांझा ने बादशाह नगर स्टेशन के नज़दीक लखनऊ मेट्रो की भूमि के ऊपर बिजली के उपकरण (OHE) को नष्ट कर दिया। बाद में मरम्मत करने वाली टीम को OHE से एक बड़ा गुच्छा पतंग की डोरी का मिला। UPMRC ने पतंगबाज़ों को कोविड़ 19 महामारी के लिए लागू लॉकडाउन के उल्लंघन का दोषी करार दिया और लखनऊ पुलिस में उनके विरूद्ध FIR दर्ज की। हालाँकि मेट्रो सेवा जनसाधारण के लिए बंद है फिर भी सरकार ने मेट्रो प्रशासन से हॉट स्टैंडबाई (Hot Standby) पर रहने को कहा है। इसका तात्पर्य है छोटे नोटिस पर मेट्रो सेवा चालू करने के लिए तैयार रहना।

पतंगबाज़ी के लिए मशहूर लखनऊ शहर के पतंबाज़ों को यह भी समझाया गया कि इस तरह की दुर्घटना में पतंगबाज़ की जान भी ख़तरे में पड़ सकती है। यह ग़ौरतलब है कि मेट्रो प्रशासन ने 2018 में भी कम-से-कम दो FIR पुलिस में पतंगबाज़ों के विरुद्ध दायर की थीं। इस तरह के पतंगी धागे ने 25000 वोल्ट की लाइंस में मेट्रो ट्रैक के ऊपरी बिजली आपूर्ति वाली तारों में शॉर्ट सर्किट किया था। नवम्बर 2015 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उ.प्र. में चीनी मांझा की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था।बाद में राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण ने भी चीनी माँझे की बिक्री को प्रतिबंधित किया था।इस बीच UPMRC ने लोगों से अपील की है कि लॉकडाउन की अवधि में सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर कोविड़-19 के प्रसारण को रोकें और मेट्रो को नुक़सान से बचाएँ।
ज़मीन से ऊपर फैले बिजली के तारों से मुक्ति के लिए नई तकनीक का विकास हो रहा है जो तारों के विकल्प देगी। 37 मील लम्बे स्ट्रीटकार सिस्टम पर DC में निर्माण चल रहा है। इस समय इस मुद्दे पर चर्चा होनी है कि हमें पुरानी तकनीक से तारों के जंजाल में जीना है या नई तकनीक से जिसमें ज़मीन से ऊपर तार नहीं होते। भूमि के ऊपर के तारों को 1889 से प्रतिबंधित किया गया था। नतीजे में वॉशिंगटन दुनिया का पहला शहर है जहां ज़मीन के ऊपर तार नहीं हैं। यह ख़ुशी की बात है कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमारे पास कई विकल्प हैं। बैटरी और अल्ट्रा कैपेसिटर टेक्नोलॉजी तेज़ी से विकास कर रही है। स्पेन(Spain), बैटरी और अल्ट्रा कैपेसिटर दोनों का उपयोग करता है जिससे ऊर्जा की उत्पत्ति और संग्रह से बिना बिजली की ज़्यादा खपत के तेज़ गति प्राप्त होती है। शेर्लोट (Charlotte) सम्मेलन ने यह दिखाया कि कोलम्बिया ज़िले में एक प्रभावकारी, 21 वीं शताब्दी की भूमिगत तार स्ट्रीटकार प्रणाली स्थापित हो सकती है। इस सुरक्षित प्रणाली से यहाँ के निवासी, व्यवसाय और पर्यटक इस शहर का यादगार आनंद ले सकेंगे।

तारों और खम्बों का शहर के बीचोबीच खड़ा होना शहरी वास्तुशास्त्र पर एक बदनुमा दाग़ लगता है। इसी वजह से ऐसी तकनीक विकसित की गईं हैं कि ट्राम बिना ज़ंजीर के चलकर शहरों के सौन्दर्य को बनाए रख सकें। ट्राम के लिए एक यात्रा सम्बन्धी ऊर्जा प्रणाली, जो बहुत तीव्रता से, हरेक स्टेशन पर और पटरी के ख़त्म होने तक उसकी बैटरी के द्वारा संचालित होती है। एक भूमिगत विद्युत ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली, जो एक तीसरी ट्रेन से संचालित होती है। वह दो मुख्य ट्रेन के बीच, पटरियों के नीचे स्थित बॉक्स द्वारा काम करती है।
मार्टिन जेंस (Martin Janes), रोलिंग स्टॉक (Rolling Stock) के निदेशक का मानना है कि बैटरी रेल के लिए इंतज़ार करने का कोई कारण नहीं है। यह एक ग़लत धारणा है कि यह तकनीक अभी पूरी तरह से विकसित नहीं हुई है। बैटरी रेल अपेक्षाकृत जल्दी और सस्ती क़ीमत पर तैयार होती हैं। यह डीज़ल रेल और विद्युतीकरण का अच्छा विकल्प है।

विवारेल (Vivarail)
2015 में इसकी शुरुआत ब्रिटेन की युवा कम्पनी ने की थी। इसमें रेलवे क्षेत्र के विशेषज्ञ शामिल थे। विवारेल ने जल्दी रिटायर हुई D-78 रेल को ख़रीदकर उसे नई मोड्यूलर रेल का आधार बनाया और उसे नियमित पटरी पर बिना ज़ंजीर के चलने लायक़ बनाया। एकदम नई ट्रेन तैयार करने के बजाय रोलिंग स्टॉक (Rolling Stock) की पुनर्सज्जा में कम समय लगता है। यह गुणवत्ता में भी बेहतर होती हैं।

विवारेल ने 8 ट्रेन बनाई और बेची हैं और शुरुआती दौर सफलता से पार कर लिया है।तीन डीज़ल ट्रेन उत्तर-पश्चिमी रेलवे लंदन को बेची हैं। स्ट्रूक्टन (Structon) के लिए यह मील का पत्थर है कि ये ट्रेन यात्रा शुरू करने जा रही हैं। मार्टिन जेंस का मानना है कि हम फ्लाईव्हील इफ़ेक्ट (Flywheel Effect) की उम्मीद करते हैं। ऐलिस गिलमैन (Alice Gillman), विवारेल के मार्केटिंग हेड बताते हैं-‘हम मानते हैं कि भविष्य बैटरी ट्रेन का है। डीज़ल से बैटरी ट्रेन में बदलाव से भारी मात्रा में Co2 की कमी होती है। हमारी पेटेंट तीव्र-चार्ज प्रणाली से ऑपरेटर्स की सेवा सम्बन्धी सभी ज़रूरतें पूरी हो जाती हैं।’ स्ट्रूक्टन और विवारेल के बीच गठबंधन लम्बा चलने वाला है क्योंकि दोनों मिलकर एक नए अनुबंध - शेष मेट्रो कार के ऊर्जा इलेक्ट्रॉनिक्स के निर्माण का काम शुरू करने जा रहे हैं।

चित्र (सन्दर्भ):
1.
मुख्य में लखनऊ मेट्रो और उसके आस पास उड़ती हुई पतंगों का क्रियात्मक चित्र प्रस्तुत किया गया है।, Prarang
2. दूसरे चित्र के पार्श्व में लखनऊ के रूमी दरवाजे के साथ लखनऊ मेट्रो को पेश किया गया है।, Prarang
3. तीसरे चित्र में एक ट्राम का दृस्य पेश किया गया है।, Pixabay
4. अंतिम चित्र में विवारेल को दिखाया गया है।, Flickr
सन्दर्भ:
1.
https://www.thehindu.com/news/cities/Delhi/Kites-snapping-the-power-lines/article16812243.ece
2. https://bit.ly/2XkGdR0
3. https://bit.ly/2Y07jgF
4. https://bit.ly/3cGrncc
5. https://ggwash.org/view/4779/new-technologies-provide-alternatives-to-overhead-wires
6. https://3minutesstop.alstom.com/infographie/tram-operate-without-overhead-wires/



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