लखनवी चिकनकारी के प्रकार

लखनऊ

 07-10-2017 06:52 PM
स्पर्शः रचना व कपड़े
लखनऊ, चिकनकारी के प्रमुख केंद्र के रूप में जाना जाता है। यदि चिकनकारी के रूप पर ध्यान दें तो यह पता चलता है कि- चिकनकारी की सुंदरता इसके महीन टाँकों पर निर्भर करती है। चिकनकारी की कढाई की विशेष बात यह है कि यह हाँथ में उठाकर अच्छी तरीके से बनती है ना की किसी साँचे में डालकर। चिकनकारी का काम सफेद कच्चे धागों से किया जाता है ना कि किसी अन्य रंगीन धागे से। कच्चा धागा प्रयोग करने से कई फायदे हैं पहला तो यह की धागा सिकुड़ता या फैलता नही है और दूसरा यह की धुलाई के बाद कच्चे धागे में चमक आ जाती है। यदि चिकनकारी की तकनीकी पर नजर डालें तो यह पता चलता है कि चिकनकारी में सूई-धागे के अतिरिक्त यदि कुछ और प्रयोग है तो वह है कारीगर की आँखों की रौशनी और उच्चस्तरीय कार्यकुशलता का बोध। चिकनकारी में कई प्रकार की जटिल जालियों का निर्माण होता है जो तरह-तरह के टाँको के संयोग से बनती है। विभिन्न जालियों व प्रकारों के अपने नाम होते हैं। मुर्रे, बखिया, जाली, तेपची, फंदा आदि 36 प्रकार चिकन की शैलियों में शामिल हैं। चिकन की 36सों प्रकार निम्नलिखित हैं- मुर्री, बखिया, जाली, तेपची, फंदा, जंजीरा, स्टेम स्टिच, दरज, तुरपाई, कंगन, जोड़ा, चने की पत्ती, धूम, गोल मुर्री का टाँका, काज का स्टिच, घास पत्ती टाँका, धनिया पत्ती टाँका, कील टाँका, चाँद, रोजन, करन टाँका, फूलचमेंली, कौड़ी टाँका, बाल्दा, पेंचनी टाँका, करन फूल, कपकपी, माहरकी, बाँक जाली, हथकटी, सिधौल, मकड़ा, मन्दराजी, बुलबुल, ताजमहल, फूलबाजी इत्यादि। यह सभी चिकनकारी के विविध प्रकार हैं। चिकनकारी का प्रत्येक प्रकार अपनी निर्माण शैली पर आधारित है तथा यह अपनी जाली के आकार पर भी टिके होते हैं। जैसे की चाँद, धनिया पत्ती या चने की पत्ती आदि का आकार चने की पत्ती और धनिया के पत्ती की तरह होता है तथा इनकी महीन व उत्कृष्ट आकृतियाँ कपड़ों पर बनाई जाती हैं। 1. लखनऊ के चिकन कारीगरों का जीवन: सीमा अवस्थी 2. एशियन एम्ब्रायडरी: जसलीन धमीजा 3. मार्ग- लखनऊ- देन एंड नाउ, संस्करण 55-1, 2003

RECENT POST

  • स्पर्श भावना में होने वाले परिवर्तन और उनकी संवेदनशीलता
    स्पर्शः रचना व कपड़े

     22-02-2019 11:36 AM


  • जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना क्या है
    जलवायु व ऋतु

     21-02-2019 11:44 AM


  • महात्मा गांधी जी के राष्ट्रभाषा पर विचार
    ध्वनि 2- भाषायें

     20-02-2019 11:59 AM


  • अवश्य करें इन योग पथों का अनुसरण
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     19-02-2019 12:17 PM


  • अवध की विशेष चित्रकला शैली
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     18-02-2019 12:29 PM


  • क्यों फेकता है स्कंक बदबूदार स्प्रे
    गंध- ख़ुशबू व इत्र

     17-02-2019 10:00 AM


  • जीवन की प्रणाली “दंड और पुरस्कार”
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     16-02-2019 11:31 AM


  • लखनऊ का स्वादिष्ट व्यंजन “शीरमाल”
    स्वाद- खाद्य का इतिहास

     15-02-2019 10:04 AM


  • कॉमिक “लव इस” की प्रेरणादायक कहानी
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     14-02-2019 12:55 PM


  • लखनऊ का रौज़ा काज़मैन
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     13-02-2019 03:07 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.