क्या लॉकडाउन खुलने के बाद रेलों, बसों और विमानों में यात्रा करना सुरक्षित रहेगा?

लखनऊ

 08-06-2020 11:20 AM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

हम सब जानते ही हैं कि अब धीरे धीरे सरकार द्वारा लॉकडाउन (Lockdown) खोला जा रहा है। ऐसी स्थिति में अधिकांश लोगों द्वारा इस बात पर विचार किया जा रहा है कि क्या रेलों, बसों और विमानों में यात्रा करना सुरक्षित रहेगा और सार्वजनिक यातायात में सफर कब और कैसे शुरू करें? वहीं बड़ी मात्रा में उभरने वाली मूलभूत श्रमिकों की भीड़, सार्वजनिक यातायात का उपयोग करने वाले श्रमिकों के लिए एक बड़ा खतरा उत्पन्न कर सकती है।

इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को एक सार्वजनिक यातायात में यात्रा करते समय कुछ सावधानियाँ बरतनी होगी, निम्न आपके लिए कुछ सुझाव हैं :
1) दूसरों से उचित दूरी बनाए रखें : किसी भी यातायात में सफर करते समय हमेशा याद रखें कि दूसरे व्यक्ति से एक उचित दूरी (लगभग छह-फीट की) बनाए रखें। एक अहम सवाल यह उठता है कि एक सार्वजनिक वाहन में दूसरे व्यक्ति से संक्रमित होने की कितनी संभावनाएं हैं, इसका स्वाभाविक जवाब यह है कि एक वाहन में जीतने ज्यादा लोग बैठेंगे और जितनी देर तक एक दूसरे के संपर्क में रहेंगे, उनके संक्रमित होने का जोखिम उतना ही अधिक होगा। विमानों में सफर करते समय इस प्रकार के संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। लेकिन यदि आप बस या रेल में सफर कर हैं तो संक्रमण की ये चिंता विशेष रूप से महत्वपूर्ण नहीं है। साथ ही इस बात का अवश्य ध्यान रखें कि दूरी बनाए रखने से यह तात्पर्य नहीं है कि आप केवल बीमार व्यक्ति से दूरी बनाए रखें, बल्कि आपको प्रत्येक व्यक्ति से सावधान रहने की आवश्यकता है। साथ ही जहां तक संक्रमण के प्रसार की बात आती है तो संक्रमण का फैलाव केवल खाँसते या छींकते वक्त नहीं होता है, बल्कि वार्तालाप करते समय भी होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि जब एक व्यक्ति बोलता है तो वो वतिलयन का उत्पादन करता है, ऐसे में जितनी जोर से एक व्यक्ति बोलता है, वो उतना अधिक वतिलयन का उत्पादन करता है, इसलिए वाहन में जोर से बोलने वाले लोग वास्तव में जीवाणु के सबसे बड़े प्रसारकर्ता हैं। इस तरह के निकटता के जोखिम को मास्क (Mask) पहन कर कम किया जा सकता है। यदि हर कोई मास्क पहनता है, तो सुरक्षा दो-तरफ़ा हो जाती है, जिसमें जीवाणु के प्रसार को रोक जा सकता है और दूसरी ओर सांस लेते समय दूसरों के बाहरी जीवाणु से बचा जा सकता है।

2) संक्रमण के फैलाव में वायुसंचार मायने रख सकता है : यदि आपके मन में निकटता अभी भी एक भारी मुद्दा है, तो उससे अधिक विचार करने वाला मुद्दा वायुसंचार है, रेल या बस पर वायुसंचार कितना प्रभावी है? वाहन में वायुसंचार प्रणाली से जीवाणु के फैलने की संभावना कम-से-कम है, लेकिन खराब वायुसंचार प्रणाली से जीवाणु के फैलने का जोखिम अधिक माना जाता है। वायुसंचार इतना शक्तिशाली होना चाहिए कि वो हमारे मुंह से आने वाली हवा को जल्द ही बाहर की ओर खींच ले। ऐसा वायुसंचार आपको किसी बंद कमरे या बंद जगह में नहीं प्राप्त हो सकता है।

3) सतहों को छूने से बचें : जब भी आप किसी वाहन में सफर कर रहे हैं या बाहर निकलते हैं तो किसी भी सतहों के साथ अनावश्यक संपर्क से बचें। क्योंकि हमारे मुंह से निकलने वाली छींटें आमतौर पर सतह पर जा गिरती है। इसलिए नियमित रूप से हैन्ड सेनिटाइज़र (Hand Sanitizer) का उपयोग करें और दस्ताने पहन कर स्वयं को संक्रमण से बचाएं।

चूंकि भारत के कई प्रमुख शहर महामारी से सबसे अधिक रूप में संक्रमित हुए हैं, इसलिए यहां सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों को लॉकडाउन खुलने की स्थिति पर संक्रमण से बचाव के लिए क्या करना चाहिए?

दिल्ली मेट्रो : दिल्ली मेट्रो लगभग 348 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 310 रेलों के डिब्बों में फरवरी में औसतन 5.7 मिलियन यात्रियों ने सफर किया था। मार्च में, मौसमी विविधताओं और कोरोनावायरस के प्रकोप के कारण यात्रियों की संख्या घटकर 4.6 मिलियन हो गई थी। हाल ही में यह बताया गया है कि दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने नई रेलों और कोचों की संख्या को बढ़ाया है और रेलों की आवृत्ति (यात्री घनत्व छह व्यक्ति प्रति वर्ग मीटर से अधिक) में वृद्धि करके सेवाओं में वृद्धि की है। साथ ही प्रभावी रूप से सामाजिक दूरी के मानदंडों (लगभग एक मीटर की दूरी) को लागू करने के लिए, मेट्रो कंपनी द्वारा सेवाओं को कम से कम छह गुना बढ़ाने की आवश्यकता होगी।

मुंबई की उपनगरीय रेल : मुंबई में उपनगरीय रेल एक और बड़ी चुनौती है। 427 किलोमीटर के सफर में ये रेल प्रतिदिन 7.5 मिलियन से अधिक यात्रियों को सफर कराती है। रेलों के अंदर अति व्यस्त समय घनत्व 14-16 यात्री प्रति वर्ग मीटर होता है। वहीं यदि सामाजिक दूर के मानदंडों की बात की जाएं तो उपनगरीय रेलवे को अपनी क्षमता से 14 से 16 गुना अधिक सेवाओं के विस्तार की आवश्यकता है। रेलों के अलावा रेलवे स्टेशनों के चारों ओर अति व्यस्त समय का घनत्व प्रति वर्ग मीटर चार-पांच यात्रियों से अधिक होता है। तदनुसार, रेलवे स्टेशनों पर पैदल चलने की सुविधा प्रदान करने वाली बुनियादी सुविधाओं को इसकी वर्तमान क्षमता से पाँच गुना बढ़ाया जाना चाहिए।

बैंगलोर की बसें : बेंगलुरु में अग्रणी सार्वजनिक परिवहन प्रदाता बैंगलोर नगर परिवहन निगम है। 6,000 बसों के साथ, यह सामूहिक रूप से प्रति दिन लगभग पाँच मिलियन लोगों को अपनी सेवा प्रदान करती है। इसका मतलब है कि प्रत्येक बस प्रतिदिन लगभग 833 यात्रियों को ले जाती है। 12-मीटर बस के अंदर का यात्री क्षेत्र लगभग 20 वर्ग मीटर है। जबकि अति व्यस्त समय के दौरान, औसत घनत्व चार यात्री प्रति वर्गमीटर होता है। सामाजिक दूरी मानदंडों को ध्यान में रखते हुए, बैंगलोर नगर परिवहन निगम को 24,000 से अधिक बसों का विस्तार करना होगा।

जैसा कि यह स्पष्ट है कि देश का मौजूदा सार्वजनिक परिवहन सामाजिक दूरी को सुनिश्चित करते हुए मौजूदा मांग को पूरा नहीं कर सकता है। इसके अलावा, परिवहन के निजी साधनों तक पहुंच की उम्मीद करना हर किसी के लिए अवास्तविक है। इसका एक संभावित विकल्प लॉकडाउन को धीरे-धीरे खोलना या वैकल्पिक आवागमन प्रणाली को विकसित करना है। कई अन्य देशों द्वारा भी वैकल्पिक आवागमन प्रणाली का उपयोग करना शुरू कर दिया गया है, जैसे, कोलम्बिया की राजधानी बोगोटा ने अपने बस प्रणाली पर भार को कम करने के लिए 100 किमी पर शहर की सड़कों को साइकिल मार्ग में बदल दिया है। वहीं मैक्सिको सिटी अपने मेट्रो पर दबाव को कम करने के लिए अपने साइकिल मार्ग को चौगुना करने की योजना बना रहा है। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट, आवागमन के लिए एक सुरक्षित विकल्प के रूप में साइकिल मार्ग का निर्माण कर रहा है, क्योंकि शहर के सार्वजनिक परिवहन उपयोग में 90% की गिरावट देखी गई है।

वैसे जितना संभव हो सकें सार्वजनिक यातायात का उपयोग करते समय सुरक्षा उपायों का अवश्य पालन करें। साथ ही कोशिश करें कि आप ज्यादा भीड़ भाड़ वाले समय पर यात्रा न करें, इससे आप केवल स्वयं को ही सुरक्षित नहीं रखेंगे, बल्कि आवश्यक श्रमिकों के लिए अधिक स्थान बना सकते हैं, जो कम भीड़ भाड़ वाले समय का इंतजार नहीं कर सकते हैं।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में लखनऊ मेट्रो और लखनऊ में फैले कोरोना के प्रकोप को जोड़कर दिखाया गया है। (Prarang)
2. दूसरे चित्र में रेलवे स्टेशन पर अव्यवस्थित भीड़ है जो सोशल डिस्टेंसिंग को दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। (Pikist)
3. तीसरे चित्र में मास्क और दस्ताने (Gloves) चित्रित हैं। (Pixabay)
4. चौथे चित्र में सेनेटाइजर और मास्क हैं। (Needpix)
5. पांचवे चित्र में दिल्ली मेट्रो के अंदर का दृस्य है। (Youtube)
6. छठा चित्र मुंबई लोकल ट्रैन में भीड़ को दिखा रहा है। (Publicdomainpictures)
7. सातवां चित्र बेंगलुरु बस सर्विस पर भार दिखा रहा है। (Youtube)
8. अंतिम चित्र जन यातायात की इकाई को प्रदर्शित कर रहा है। (Freepik)

संदर्भ :-
1. https://bit.ly/30kVoeS
2. https://bit.ly/2XFJhXJ
3. https://bit.ly/2MFt66I



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