वजन को नियंत्रित रखने के लिए आवश्यक है वात, पित्त और कफ का संतुलन

लखनऊ

 17-06-2020 12:25 PM
सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

21 वीं सदी में मोटापे से होने वाले रोगों के साथ भारत मोटापा महामारी के अनुपात तक पहुँच गया है जिसके चलते देश की लगभग 5% आबादी मोटापे की समस्या से ग्रसित है। भारत अन्य विकासशील देशों की प्रवृत्ति का अनुसरण कर रहा है जहां के नागरिक लगातार और अधिक मोटे होते जा रहे हैं। वैश्विक खाद्य बाजारों में भारत के निरंतर एकीकरण के बाद से अस्वास्थ्यकर, प्रसंस्कृत भोजन बहुत अधिक सुलभ हो गया है। अनेकों बीमारियों के साथ मोटापा हृदय रोग के लिए जोखिम का एक प्रमुख कारक है। मोटापा एक चिकित्सीय स्थिति है जिसमें शरीर में अतिरिक्त वसा इस हद तक जमा हो जाती है कि इसका स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने लगता है। आमतौर पर वे लोग मोटे माने जाते हैं जिनका शरीर द्रव्यमान सूचकांक (Body Mass Index-BMI) 30 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर से अधिक होता है। 25–30 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर की सीमा पर व्यक्ति को अधिक वजन वाला माना जाता है। शरीर द्रव्यमान सूचकांक, किसी व्यक्ति के द्रव्यमान (वजन) और ऊंचाई से प्राप्त मूल्य है। इसे शरीर द्रव्यमान और शरीर की ऊंचाई के वर्ग के रूप में परिभाषित किया जा सकता है तथा सार्वभौमिक रूप से किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर में व्यक्त किया जाता है।

शरीर द्रव्यमान सूचकांक, एक सुविधाजनक नियम है जिसका उपयोग मोटे तौर पर किसी व्यक्ति को कम वजन, सामान्य वजन, अधिक वजन के रूप में या ऊतक द्रव्यमान (मांसपेशियों, वसा और हड्डी) और ऊंचाई के आधार पर मोटापे को वर्गीकृत करने के लिए किया जाता है। आमतौर पर स्वीकृत शरीर द्रव्यमान सूचकांक सीमा अल्प वजन (18.5 किग्रा प्रति वर्ग मीटर), सामान्य वजन (18.5 से 25), अधिक वजन (25 से 30), और मोटापा (30 से अधिक) हैं। दक्षिणी प्रशांत एक ऐसा क्षेत्र है, जहां मोटापा दर पूरी दुनिया में सबसे अधिक है जिसके साथ कई पुरानी बीमारियां भी जुडी हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार, प्रशांत द्वीप देशों ने वैश्विक मोटापे की सूची में शीर्ष सात स्थानों पर कब्जा किया है, जिसका मुख्य कारण देश के नागरिकों द्वारा खाया जाने वाला असंतुलित तथा अस्वास्थ्यकर आहार है। जो लोग पहले मछली, नारियल और पौष्टिक सब्जियां खाते थे, वे अब आयातित प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ खाते हैं, जिनमें चीनी और वसा की मात्रा उच्च होती है। तालिका में प्रथम स्थान पाने वाले नॉरू में 97 फीसदी पुरुष और 93 फीसदी महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं। यहां की 95% से अधिक जनसंख्या को मोटापे का सामना करना पड़ रहा है। इस क्षेत्र में मधुमेह दर की स्थिति दुनिया में सबसे खराब है। यहां मोटापे की वजह से हुए हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियां अक्सर मृत्यु का कारण बनती हैं। वयस्कों में मधुमेह अब दुनिया की तीसरी समस्या है। निश्चित रूप से यह एकमात्र जगह नहीं है जहां वजन और रोग एक बड़ा मुद्दा हैं। संयुक्त राज्य अमेरिका में 78 प्रतिशत से अधिक लोग अधिक वजन वाले या मोटे हैं जबकि ब्रिटेन में यह आंकड़ा 61 फीसदी से ज्यादा है।

मोटापा और उपापचयी सिंड्रोम (Syndrome) की व्यापकता भारत और अन्य दक्षिण एशियाई देशों में भी तेजी से बढ़ रही है, जिसके कारण टाइप 2 डायबिटीज मेलिटस (Type 2 Diabetes Mellitus- T2DM) और हृदय रोग बढते जा रहे हैं और रोगों की संख्या और मृत्युदर में वृद्धि हो रही है। पिछले 4 वर्षों से भारत में मोटापे में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालांकि भारत 191 देशों में से 187 वें पायदान पर है लेकिन अभी भी मोटापे की व्यापकता है और उपापचयी सिंड्रोम तेजी से बढ़ रहा है। भारत में उत्तर प्रदेश पुरुषों और महिलाओं के मोटापे के मामले में 16 वें स्थान पर है। उपापचयी सिंड्रोम और सम्बंधित हृदय जोखिम कारकों का एक उच्च प्रसार न केवल शहरी दक्षिण एशियाई और एशियाई भारतीय वयस्कों और बच्चों में देखा गया है, बल्कि शहरी झुग्गियों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले आर्थिक रूप से वंचित लोगों में भी देखा गया है जिसके प्रमुख कारक पोषण, जीवन शैली और सामाजिक आर्थिक बदलावों में तीव्रता है। ये कारक संपन्नता, शहरीकरण, मशीनीकरण और ग्रामीण-से-शहरी प्रवास का कारण बनते हैं और शहरी जीवन में मनोवैज्ञानिक तनाव, आनुवंशिक पूर्वानुकूलता, प्रतिकूल प्रसवकालीन वातावरण, बचपन में ही होने वाले मोटापे को जन्म देते हैं।

मोटापे और दोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन का सामना करने के लिए आयुर्वेद ने भी एक दृष्टिकोण प्रदान किया है। आयुर्वेद में, मोटापे को मेदोरोग (Medoroga) के रूप में जाना जाता है, जोकि मेदा धातु (Meda Dhatu) का विकार है, जिसमें वसा ऊतक और वसा उपापचय शामिल हैं। आयुर्वेद के अनुसार मोटापा दोषों (वात, पित्त और कफ) के असंतुलन, अग्नि (पाचन अग्नि) के असंतुलन, मल (असंतुलित उत्पादों) के असंतुलन या श्रोतों (सूक्ष्मसंचार तंत्र) के असंतुलन से शुरू होता है। असंतुलन का यह संग्रह ऊतकों या धातु के निर्माण में हस्तक्षेप करता है और ऊतक असंतुलन को उत्पन्न करता है, जिसे हम अतिरिक्त वजन के रूप में अनुभव करते हैं। आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से, संतुलन को बाधित करने वाले कारक जीवनशैली और आहार विकल्पों में निहित हैं। आयुर्वेद वजन असंतुलन और मोटापे को एक ऐसी चीज मानता है, जिसे अन्य स्वास्थ्य समस्या में योगदान करने से पहले ठीक किया जाना चाहिए।

आयुर्वेदिक दृष्टिकोण से वजन बढ़ने का कारण चक्रीय है। यह आहार और जीवन शैली में संतुलन को कम करने के साथ शुरू होता है जो पहले पाचन अग्नि को कमजोर करता है फिर शरीर में विषाक्त पदार्थों की मात्रा को बढाता है, संचार तंत्र को अवरूद्ध करता है और ऊतकों के निर्माण को बाधित करता है। खराब रूप से गठित ऊतक परतें मेदा धातु और कफ दोष में असंतुलन को बढ़ाती हैं। यह बदले में विषाक्त पदार्थों के संचय को बढ़ाता है, जिससे मेदा धातु में असंतुलन उत्पन्न होता है। यह स्वाभाविक रूप से बहने वाली वात ऊर्जा में असंतुलन का कारण बनता है। प्रतिबंधित या असंतुलित वात ऊर्जा बढ़ती अग्नि - पाचन अग्नि के साथ समाप्त होती है जिससे भूख और प्यास में वृद्धि होती है। इस प्रकार कफ दोष और मेदा धातु में वृद्धि होती है और पूरा चक्र फिर से शुरू होता है।

चक्र को तोड़ने के लिए, आयुर्वेदिक विशेषज्ञ (वैद्य) व्यक्ति की अद्वितीय प्रकृति (प्रकृति) और असंतुलन (विकृति) की प्रकृति को निर्धारित करते हैं जिसके अंतर्गत पाचन को मजबूत करना (संतुलन अग्नि), विषाक्त पदार्थों को दूर करना, आहार की आदतों में सुधार करना, अनुचित दैनिक दिनचर्या को समायोजित करना और तनाव को कम करना शामिल होता है। एक संतुलित वात रचनात्मक, कलात्मक, संवेदनशील, आध्यात्मिक होता है। जब यह असंतुलित होता है तो बेचैनी और चिंता बढ जाती है जिसके परिणामस्वरूप नींद की कमी, चिंता, थकान और अवसाद उत्पन्न होते हैं। वात वायु और अन्य तत्वों से जुड़ा होता है, जो अस्थिर मन और दिमाग और परिणामस्वरूप अनियमित भूख का कारण बनता है।

पित्त चालित, प्रतिस्पर्धी, महत्वाकांक्षी और लक्ष्य का लगातार पीछा करने वाला होता है। पित्त में भूख बहुत तीव्र होती है। इसमें मनुष्य जो कुछ भी करता है, वह अपने कार्य में लीन हो जाता है। जब कुछ खाने का समय होता है तो वह जरूरत से ज्यादा उसका सेवन करता है और तृष्णा से भर जाता है। वह ऐसे भोज्य पदार्थों को खाने का आदी हो जाता है जिससे उसे संतुष्टि प्राप्त होती है-जैसे चीनी, कॉफी और लाल मांस आदि। इस प्रकार मांसपेशियों का वजन बढता है और शरीर में कमजोरी आती है। कफ पृथ्वी और जल तत्वों से जुड़ा हुआ है। जब यह संतुलन में नहीं होता है तो मोटापे, धीमी उपापचय, वजन बढ़ना, निरंतर भूख लगना, हार्मोनल (Hormonal) स्थितियां पैदा करना आदि के लिए सबसे सामान्य दोष बन जाता है जो वजन बढने का कारण बनता है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए वात, पित्त और कफ का संतुलित होना आवश्यक है।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में मोटापे को नियंत्रित करने के लिए दौड़ते हुए महिलाये।
2. दूसरे चित्र में मोटापे को प्रदर्शित करते हुए एक कलात्मक चित्रण।
3. तीसरे चित्र में बॉडी मास इंडेक्स का सांकेतिक सूचना चित्र है।

संदर्भ:
1. https://en.wikipedia.org/wiki/Obesity_in_India
2. https://bit.ly/3fCIpJT
3. https://pubmed.ncbi.nlm.nih.gov/19900153/
4. https://en.wikipedia.org/wiki/Body_mass_index
5. https://ayurveda-seminars.com/pdfs/An-Ayurvedic-Approach-to-Obesity.pdf



RECENT POST

  • मनुष्य को सांसारिक चक्र से मुक्ति का मार्ग बतलाती है, विष्णु भक्त गजेंद्र की कथा
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     28-07-2021 10:15 AM


  • भारत में विलुप्‍त होती मगरमच्‍छ की प्रजातियाँ
    रेंगने वाले जीव

     27-07-2021 10:00 AM


  • हमारे देश में घर बनाया है लुप्तप्राय मिस्र गिद्ध ने
    पंछीयाँ

     26-07-2021 09:32 AM


  • इंजीनियरिंग का एक अद्भुत कारनामा है, कोलोसियम
    वास्तुकला 1 वाह्य भवन

     25-07-2021 02:23 PM


  • आठ ओलंपिक स्वर्ण पदक के पश्चात अब लाना है फिर से भारतीय हॉकी को विश्व स्तर पर
    द्रिश्य 2- अभिनय कला य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     24-07-2021 10:21 AM


  • मौन रहकर भी भावनाओं की अभिव्यक्ति करने की कला है माइम Mime
    द्रिश्य 2- अभिनय कला

     23-07-2021 10:11 AM


  • भारत में यहूदि‍यों का इतिहास और यहां की यहूदी–मुस्लिम एकता
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     22-07-2021 10:37 AM


  • पश्चिमी और भारतीय दर्शन के अनुसार भाषा का दर्शन तथा सीखने और विचार के साथ इसका संबंध
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     21-07-2021 09:40 AM


  • विश्व के इतिहास में सामाजिक समूहों के लिए गहरा महत्व रखता रहा है बलिदान
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     20-07-2021 10:20 AM


  • शहर के मास्टर प्लान में शामिल किया जाना चाहिए मलिन बस्तियों का विकास
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     18-07-2021 06:09 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id