क्या आधुनिक मिक्सर ग्राइंडर से अच्छा विकल्प है, प्राचीन सिल-बट्टा

लखनऊ

 25-06-2020 01:40 PM
नगरीकरण- शहर व शक्ति

देशव्यापी स्तर पर प्रचलित पत्थर के ग्राइंडर (Grinder) या सामान्य तौर पर ‘ सिलबट्टा’ नाम से मशहूर एक तरह का देसी ग्राइंडर कुछ साल पहले तक भारतीय रसोई का अपरिहार्य हिस्सा होता था लेकिन स्वचालित मिक्सर ग्राइंडर के आते ही सिलबट्टा की लोकप्रियता घटने लगी। संपूर्ण भारत में सिलबट्टा के इतिहास और इसकी बनावट में खासी विविधता दिखाई देती है। इस पर उकेरे गए छिद्रों का वैज्ञानिक महत्व तो है ही, विभिन्न मसालों और पत्तों को एक समान पीसकर सिलबट्टा उनका वास्तविक स्वाद भी बरकरार रखता है।

लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिरकार भारतीय रसोई में सदियों से चला आ रहा यह सिलबट्टा किसने डिजाइन किया यह हमारे पूर्वजों में से किसी एक ने महज एक पत्थर को उठाकर दूसरे पत्थर पर किसी चीज को पीसने के लिए प्रयोग किया और शायद यही से यह विचार इंसानी दिमाग में घर कर गया और इसकी तकनीक पर काम हुआ। इसका आकर और डिज़ाइन इतना बेहतरीन होता है कि हाथ में बड़ी सुगमता से सेट हो जाता है, वही सिल की सतह पर जो छोटे-छोटे छेद खुदे होते हैं, वह महज इत्तेफाक नहीं बल्कि घर्षण की मदद से बारीक पीसने के लिए बनाए जाते हैं।लगातार इस्तेमाल होने पर यह छेद घिस जाते हैं, तब इन्हें कारीगर द्वारा खुदवाना होता है। सिल पर ये छोटे छोटे गड्ढे बनाने की प्रक्रिया को सिल खुटाई कहते हैं। सिलबट्टा भी कमाल की चीज़ है, ना मिक्सी की तरह कोई तामझाम, बिजली की बचत, ना कोई रंगा पुता डिजाइन, आसानी से काम आने वाला, हर वक्त प्रयोग के लिए तैयार होता है हमारा देसी सिलबट्टा।

भारत के अलग-अलग प्रांतों में सिलबट्टा अलग-अलग डिजाइन का होता है, इसकी वजह लोगों की व्यक्तिगत पसंद या क्षेत्रीय आवश्यकता भी है। जैसे कि बंगाल में यह बट्टा अंडाकार आकृति का होता है और उत्तर भारत में आते-आते यह हल्का तिकोना हो जाता है। लेकिन हर डिज़ाइन अपने में अनोखी है और उसकी अपनी खास पहचान है। अगर आप एक क्षण रुककर सोचे कि साधारण से दिखने वाले इस सिलबट्टे और मिक्सी में कौन बेहतर है तो आप हैरान हो जाएंगे जब आपको पता चलेगा कि मिक्सी के मुकाबले सदियों से चला आ रहा यह सिलबट्टा ज्यादा प्रगतिशील, आधुनिक और एनवायरनमेंट फ्रेंडली (Environment Friendly) होता है। आज इसको पत्थर से तराशे जाते वक्त भले ही बिजली का प्रयोग होता हो लेकिन इसको बनाने का ज्यादातर काम हाथ से होता है और प्रशिक्षित पत्थर के कारीगर इसे बनाते हैं और इसमें किसी तरह का कोई प्रदूषण नहीं होता। मिक्सी भले सूखे मसालों को जल्दी पीस देती है, लेकिन ज्यादा ऊर्जा के कारण चीजों के स्वाद और पौष्टिक तत्व नष्ट हो जाते हैं। आधुनिक व्यस्तता के अलावा मिक्सी भारतीय समाज में वैसे ही प्रतिष्ठा का प्रतीक (Status Symbol) है जैसे कि पक्का मकान जो भारतीय परिवेश के एकदम अनुपयुक्त है, जाड़े में ठंडा और गर्मियों में गरम।

मासिक बजट में सिलबट्टा के लगातार इस्तेमाल से कई प्रकार की बचत होती है क्योंकि इस पर ताजी चीजें तुरंत पीस सकते हैं, आपको कोई जरूरत नहीं है कि बड़ी मात्रा में फ्रिज में चीजों को भरकर रखें और बासी चीजों का प्रयोग करें। इसमें कोई दो राय नहीं है कि तकनीक ने हमें सरल जीवन जीने के लिए अविश्वसनीय उत्पाद दिए हैं जिनके लिए हमें पहले खुद काम करना पड़ता था। लेकिन जहां तक हो सके हमें आंख मूंदकर टेक्नोलॉजी और गैजेट्स की दुनिया के मार्केटिंग चोचलों (Marketing Gimmick) का शिकार बनने से बचना चाहिए और अपने पारंपरिक उत्पादों का जहां जरूरी हो वहां प्रयोग करना चाहिए।

चित्र सन्दर्भ:
1. मुख्य चित्र में सिल बट्टे के साथ चटनी चटनी पीसती हुई एक महिला। (Wikimedia)
2. दूसरे चित्र में सिल बट्टे से पीसी गयी चटनी की बारीकी से ली गयी तस्वीर। (Youtube)
3. तीसरे चित्र में बेलन के आकर के बट्टे के साथ सिल का चित्र है। (Wallmart)
4. चौथे चित्र में साबुत और गरम मसलों को सिल बट्टे का प्रयोग करके पीसा जा रहा है। (Unsplash)
5. अंतिम चित्र में सिल बट्टे के साथ रसोई की सामग्री। (Pixabay)

सन्दर्भ:
1. https://anishashekhar.blogspot.com/2010/06/who-designed-sil-batta.html
2. https://en.wikipedia.org/wiki/Batan_(stone)
3. https://bit.ly/2BBYIrC



RECENT POST

  • भारत में जैविक कृषि आंदोलन व सिद्धांत का विकास, ब्रिटिश कृषि वैज्ञानिक अल्बर्ट हॉवर्ड द्वारा
    भूमि प्रकार (खेतिहर व बंजर)

     20-05-2022 10:03 AM


  • लखनऊ की वृद्धि के साथ हम निवासियों को नहीं भूलना है सकारात्मक पर्यावरणीय व्यवहार
    नगरीकरण- शहर व शक्ति

     19-05-2022 09:47 AM


  • एक समय जब रेल सफर का मतलब था मिट्टी की सुगंध से भरी कुल्हड़ की स्वादिष्ट चाय
    म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

     18-05-2022 08:47 AM


  • उत्तर प्रदेश में बौद्ध तीर्थ स्थल और उनका महत्व
    विचार I - धर्म (मिथक / अनुष्ठान)

     17-05-2022 09:52 AM


  • देववाणी संस्कृत को आज भारत में एक से भी कम प्रतिशत आबादी बोल व् समझ सकती है
    ध्वनि 2- भाषायें

     17-05-2022 02:08 AM


  • बाढ़ नियंत्रण में कितने महत्वपूर्ण हैं, बीवर
    व्यवहारिक

     15-05-2022 03:36 PM


  • प्रारंभिक पारिस्थिति चेतावनी प्रणाली में नाजुक तितलियों का महत्व, लखनऊ में खुला बटरफ्लाई पार्क
    तितलियाँ व कीड़े

     14-05-2022 10:09 AM


  • लखनऊ सहित विश्व में सबसे पुराने और शानदार स्विमिंग पूलों या स्नानागारों का इतिहास
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     13-05-2022 09:41 AM


  • भारत में बढ़ती गर्मी की लहरें बन रही है विशेष वैश्विक चिंता का कारण
    जलवायु व ऋतु

     11-05-2022 09:10 PM


  • लखनऊ में रहने वाले, भाड़े के फ़्रांसीसी सैनिक क्लाउड मार्टिन का दिलचस्प इतिहास
    उपनिवेश व विश्वयुद्ध 1780 ईस्वी से 1947 ईस्वी तक

     11-05-2022 12:11 PM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id