चिनहट के मिट्टी के बर्तन: लखनऊ

लखनऊ

 12-10-2017 07:59 PM
म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण
लखनऊ के हस्त शिल्पों में मिट्टी के बर्तनों का भी नाम आता है। वर्तमान काल में कई संग्रहालयों जैसे इंदिरा गाँधी मानव संग्रहालय से लेकर संस्कृति संग्रहालय दिल्ली तक कई प्रकार की प्रदर्शनियाँ मिट्टी के बर्तनों पर लगाई गयी हैं। मिट्टी के बर्तनों की एक खास अहमियत होती है। पुरातात्विक दृष्टिकोण से यही एक ऐसा साधन है जिससे विभिन्न प्रकार के संस्कृतियों पर प्रकाश पड़ता है तथा तकनीकी विकास का भी ज्ञान प्राप्त होता है। पुरातात्विक भाषा में मिट्टी के बर्तनों को मृदभांड नाम से जाना जाता है। प्राचीनकाल से ही इनके कई रूप हमे देखने मिलते हैं जैसे- लाल, धूसर, चित्रित, कृष्ण (काला) मृदभांड आदि। मिट्टी के बर्तनों के कालक्रम को इनके रिम या सरल भाषा में किनारा या छल्ले के प्रकारों को देखने मात्र से ही बताया जा सकता है क्यूँकी हर काल की अपनी एक अलग निर्माण शैली होती थी। लखनऊ कि बात की जाये तो यह कहना सर्वथा गलत नही होगा कि यहाँ के चिनहट में बनने वाले मिट्टी के बर्तन एक नही अपितु अनेक प्रकारों को अपने मे समाहित किये हुये हैं। यहाँ पर विशिष्ट चमकदार बर्तनों को बनाया जाता है। यहाँ के बने मिट्टी के बर्तनों की अपनी एक अलग शैली व प्रकार होता है। यहाँ पर मिट्टी के बर्तन के अलावा मिट्टी से अन्य वस्तुओं का भी निर्माण किया जाता है। यहाँ के कारिगरों की कुल संख्या करीब 200 है। 1. एन आउटलाइन ऑफ़ इंडियन प्रीहिस्ट्री: डी.के. भट्टाचार्य

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