सी.आर.आई.एस.पी.आर. (CRISPR) तकनीक की मदद से किया जा सकता है कोरोनावायरस का निदान

लखनऊ

 18-09-2020 08:00 PM
डीएनए

जब कोरोनावायरस (Coronavirus) महामारी पहली बार चीन के वुहान शहर में उत्पन्न हुई थी और 2020 की शुरुआत में विश्व भर में फैलने लगी थी, तब इसके प्रति स्वास्थ्य अधिकारियों की प्रतिक्रिया उल्लेखनीय रूप से तेज हो गई थी। उनके द्वारा कोरोनावायरस की महामारी के प्रसार को समझने और नियंत्रित करने के लिए न्यूक्लिक एसिड-आधारित (Nucleic Acid) पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (Polymerase Chain Reaction) परीक्षणों का उपयोग किया जाने लगा। लेकिन, इन पीसीआर-आधारित (PCR) परीक्षण किटों में इस्तेमाल किए गए रासायनिक अभिकर्मकों की प्रारंभिक और व्यापक रूप से उपयोग के चलते इनमें कमी आने लगी, जिसके चलते कोरोनावायरस का निदान और जांच करने के लिए वैकल्पिक तकनीक का उपयोग करने पर विचार किया जाने लगा।
इन विकल्पों में से एक सबसे उल्लेखनीय सी.आर.आई.एस.पी.आर. (CRISPR - Clustered Regularly Interspaced Short Palindromic Repeats) तकनीक है। यह एक सरल लेकिन शक्तिशाली उपकरण है। यह शोधकर्ताओं को डीएनए (DNA) अनुक्रमों को आसानी से बदलने और जीन के कार्यों को संशोधित करने की अनुमति देता है। इसके उपयोग में आनुवांशिक दोषों को ठीक करना, इलाज करना और बीमारियों के प्रसार को रोकना और फसलों में सुधार करना शामिल है। सी.आर.आई.एस.पी.आर. तकनीक की डीएनए अनुक्रमों को संशोधित करने की प्रक्रिया की मदद से डीएनए के बाद के एंजाइम को हटाकर विशिष्ट अनुक्रमों का पता लगाया जा सकता है, जैसे कि SARS-CoV-2 वायरस में विशिष्ट रूप से मौजूद है। वहीं दो स्टार्टअप (Startup) कंपनियों ने विशेष रूप से तेजी से कोविड -19 (Covid-19) के निदान के लिए अपने स्वयं के सी.आर.आई.एस.पी.आर. आधारित पीओसी (PCO) परीक्षणों को विकसित करके इस क्षमता पर पूंजी लगाई है। सी.आर.आई.एस.पी.आर. तकनीक को जीवाणु और आद्य जीवाणु के प्राकृतिक रक्षा तंत्र से अनुकूलित किया गया था। ये जीव विषाणु और अन्य बाह्य निकायों द्वारा किए गए हमलों को नाकाम करने के लिए सी.आर.आई.एस.पी.आर.-प्राप्त आरएनए (RNA) और कैस 9 (Cas 9) सहित विभिन्न कैस प्रोटीन (Protein) का उपयोग करते हैं। साथ ही यह एक बाह्य आक्रमणकारी के डीएनए को काटकर नष्ट कर देते हैं। विभिन्न जीवों के जीनोम (Genome) उनके डीएनए अनुक्रमों के भीतर संदेशों और निर्देशों की एक श्रृंखला को सांकेतिक शब्दों में बदलते हैं। जीनोम संपादन में उन अनुक्रमों को बदलना शामिल है, जिससे संदेश बदलते हैं। अलग-अलग समूहों द्वारा किए गए अध्ययनों ने निष्कर्ष निकाला है कि कैस 9 को डीएनए के किसी भी क्षेत्र को काटने के लिए निर्देशित किया जा सकता है। एक बार जब डीएनए कट जाता है, तो कोशिका की प्राकृतिक सुधार तंत्र अंदर आ जाती है और जीनोम में परिवर्तन या अन्य परिवर्तन को शुरू करने के लिए कार्य करने लगती है। सी.आर.आई.एस.पी.आर.- कैस 9 हाल के वर्षों में काफी लोकप्रिय हो गया है। कुछ वर्षों पहले चीन द्वारा सी.आर.आई.एस.पी.आर. का उपयोग दो जुड़वां बच्चियों में किया गया। 25 नवंबर, 2018 को शेनज़ेन (Shenzhen) में दक्षिणी विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (Southern University of Science and Technology) में ही जियानकुई (Jiankui) के नेतृत्व में ‘द बॉम्बशैल’ (The Bombshell) नामक टीम द्वारा पहले जीन-संपादित शिशुओं को बनाने की तैयारी शुरू की गई। उन्होंने बच्चे को एचआईवी (HIV), चेचक और हैजा के प्रतिरोधी बनाने के लिए CCR5 जीन को हटाने की योजना बनाई। उनके द्वारा सात भ्रूण को बदलने का दावा किया गया, जिसके परिणामस्वरूप केवल एक सफल जुड़वा लड़कियों का जन्म हुआ। हालांकि इस प्रयोग पर कई लोगों ने नाराजगी दिखाई और कई विज्ञानिकों द्वारा इस की भारी निंदा भी की गई। केवल इतना ही नहीं चीनी अधिकारियों और उनके सहयोगियों द्वारा शोध गतिविधियों को निलंबित करने का आदेश दिया गया और उन पर चीनी कानूनों और विज्ञान नैतिकता का उल्लंघन करने का आरोप भी लगाया गया।
सी.आर.आई.एस.पी.आर. तकनीक के कई संभावित अनुप्रयोग जीनोम के साथ छेड़छाड़ की नैतिक खूबियों और परिणामों के अलावा नए अध्ययन इस बात पर संदेह कर रहे हैं कि क्या प्रौद्योगिकी मानव चिकित्सा के लिए उपयोग करने के लिए सुरक्षित है। यदि यह गलत हाथों में पड़ता है या यदि इसका दुरुपयोग होता है तो यह अराजकता पैदा कर सकता है। निम्नलिखित में से कुछ कारणों के कारण सी.आर.आई.एस.पी.आर. का कई तरह से दुरुपयोग किया जा सकता है:
• उपयोग करने में सरल : सी.आर.आई.एस.पी.आर. बहुत आसानी से सुलभ है। यहां तक कि यह किट के रूप में व्यावसायिक रूप से भी उपलब्ध है। अन्य चीजों (परमाणु और सामूहिक विनाश के अन्य हथियार) की तुलना में इसका संभावित दुरुपयोग का जोखिम अधिक है।
• सी.आर.आई.एस.पी.आर से संशोधित जीवों का आकस्मिक विमोचन : इस तकनीक को लेकर एक डर यह भी है कि यदि सी.आर.आई.एस.पी.आर तकनीक से संशोधित जीवित जीव, बैक्टीरिया या कोई बड़ा जानवर छूट जाता है तो यह निस्संदेह दुनिया के प्राकृतिक संतुलन को नष्ट कर देगा।
2014 के विज्ञान लेख में, जीन ड्राइव (Gene Drive) के उपयोग करने से कुछ संभावित पारिस्थितिक प्रभाव को इंगित किया गया। उसके अनुसार यदि कोई ऐसा जीव जिसका जीन बदला गया हो, वो आगे क्रॉसब्रीडिंग (Crossbreeding) करे, तो इससे यह बदलाव दूसरी प्रजातियों में भी फ़ैल सकता है। साथ ही जीन ड्राइव किसी जीव की आनुवंशिक विविधता को भी कम कर सकता है। भले ही सी.आर.आई.एस.पी.आर. का उपयोग विभिन्न समस्याओं को हल करने के लिए मुख्य रूप से संशोधित जीवों का उत्पादन करने के लिए किया गया हो, लेकिन क्या होगा अगर ये कोई समस्या को हल करने के बजाय उसे और बढ़ा दे? एक अध्ययन से पता चला है कि सी.आर.आई.एस.पी.आर. डीएनए में अनपेक्षित म्यूटेशन (Mutations) का कारण बनता है, तथाकथित ऑफ-टारगेट (Off-target) प्रभाव, जो समस्या को और अधिक बढ़ा भी सकता है।

संदर्भ :-
https://en.wikipedia.org/wiki/CRISPR
https://www.livescience.com/58790-crispr-explained.html
https://www.genome.gov/about-genomics/policy-issues/Genome-Editing/ethical-concerns
https://nuclineers.com/dark-side-of-crispr/
https://www.medicaldevice-network.com/comment/crispr-biotechnology-disrupt-covid-19-testing-market/
https://www.technologyreview.com/2019/02/22/103395/chinas-crispr-twins-a-timeline-of-news/

चित्र सन्दर्भ:
मुख्य चित्र में CRISPR-DR5 (RF01318) के लिए माध्यमिक संरचना छवि। न्यूक्लियोटाइड रंग इस परिवार के सदस्यों के बीच अनुक्रम संरक्षण को इंगित करता है, जिसमें स्पेक्ट्रम लेबलिंग का लाल अंत उच्चतम संरक्षण होता है।(wikimedia)
दूसरे चित्र में प्रोटीन की आणविक संकरचना का कार्टून प्रतिनिधित्व हैं।(youtube)
तीसरे चित्र में CRISPR जीन संपादन तंत्र दिखाया गया हैं।(youtube)


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