विभिन्न संस्कृतियों के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं मिट्टी के बर्तन

लखनऊ

 21-09-2020 04:13 AM
म्रिदभाण्ड से काँच व आभूषण

लखनऊ जिले में स्थित चिनहट अपने विस्तृत मिट्टी के बर्तनों और मिट्टी की वस्तुओं के लिए विशेष रूप से जाना जाता है। यहां लगभग 200 कारीगर मिट्टी से बनी वस्तुओं का निर्माण करते हैं। वर्तमान समय में, यहां निर्मित वस्तुओं में सजावटी और बागवानी बर्तन अधिक मात्रा में निर्मित होते हैं। मिट्टी के इन बर्तनों का अध्ययन पिछली संस्कृतियों के बारे में जानकारी और अंतर्दृष्टि प्रदान करने में मदद कर सकता है। मिट्टी के बर्तन टिकाऊ हैं, और इनके टुकड़े कम टिकाऊ सामग्री से बनी कलाकृतियों की तुलना में अक्सर लंबे समय तक जीवित रहते हैं। अन्य साक्ष्यों के साथ, मिट्टी के बर्तनों की कलाकृतियों का अध्ययन उन समाजों के संगठन, आर्थिक स्थिति और सांस्कृतिक विकास के सिद्धांतों के विकास में सहायक है, जिन्होंने मिट्टी के बर्तनों को उत्पादित या निर्मित किया। मिट्टी के बर्तनों के अध्ययन से एक संस्कृति के दैनिक जीवन, धर्म, सामाजिक संबंधों, पड़ोसियों के प्रति दृष्टिकोण, अपनी दुनिया के प्रति दृष्टिकोण और यहां तक कि उसने ब्रह्मांड को कैसे समझा, के बारे में भी निष्कर्ष निकाला जा सकता है।
सिरेमिक (Ceramic) बर्तन टूटने योग्य होते हैं, लेकिन छोटे टुकड़े जमीन में सैकड़ों वर्षों के बाद भी लगभग अविनाशी होते हैं। ये बर्तन खाना पकाने, परोसने और भोजन के भंडारण के लिए उपयोग किये गये थे और कलात्मक अभिव्यक्ति का एक माध्यम भी थे। प्रागैतिहासिक कुम्हारों ने विभिन्न प्रकार से अपने बर्तनों को बनाया और सजाया। अक्सर एक समुदाय या क्षेत्र के कुम्हारों ने कुछ विशेष प्रकार के बर्तन बनाए. क्योंकि बर्तनों और इनकी शैलियों को समूहों के बीच साझा किया गया था, इसलिए पुरातत्वविद अक्सर साइटों (Sites) को समय और स्थान से संबंधित कर सकते हैं। जब किसी स्थल पर मिट्टी के पात्र पाए जाते हैं, तो वे आमतौर पर छोटे, टूटे टुकड़ों के रूप में पाए जाते हैं। इन सभी टुकड़ों को फिर से संगठित कर अनेक जानकारियां प्राप्त की जा सकती हैं। जब एक बर्तन का केवल एक हिस्सा बचा होता है, तो पुरातत्वविद् बाकी का पुनर्निर्माण कर सकते हैं (यदि मूल आकार और आकृति के बारे में पर्याप्त जानकारी है तो)।
लगभग 2,800 साल पहले वुडलैंड (Woodland) के समय में मिट्टी के बर्तनों की पहली उपस्थिति महत्वपूर्ण है क्योंकि यह इंगित करता है कि लोग कैसे पहले की तुलना में अधिक गतिहीन हुए अर्थात उनमें अधिक समय तक बैठने की क्षमता उत्पन्न हुई। पहले लोग पेड़ों की भीतरी छाल या ईखों से बने हल्के, सुवाह्य स्किन बैग (Skin bag) या बुने हुए बर्तन इस्तेमाल करते थे। घुमंतू शिकारी भारी और टूटने वाले बर्तनों को अपने साथ नहीं ले जाना चाहते थे। जब लोगों ने अधिक स्थायी गांवों में बसना शुरू किया, तो उन्होंने मिट्टी के बर्तनों के लिए कई उपयोग किए। मिट्टी के बर्तनों को धाराओं के साथ या पहाड़ियों पर एकत्रित मिट्टी से बनाया गया था। बर्तनों को तपाने और सुखाने के दौरान उन्हें सिकुड़न और दरार को रोकने के लिए रेत, पीसे हुए पत्थरों, जली हुई पीसी मिट्टी, पौधे के तंतुओं आदि को इसमें मिलाया गया। प्रागैतिहासिक बर्तनों को कई तरीकों से बनाया गया था जिनमें कोइलिंग (Coiling), पैडलिंग (Paddling), पिंचिंग (Pinching) और आकार देना हैं। बाद की संस्कृतियों द्वारा बनाए गए मिट्टी के बर्तनों की तुलना में वुडलैंड के कई बर्तन काफी मोटे हैं। मिट्टी के बर्तनों पर आधारित कालक्रम अक्सर गैर-साक्षर संस्कृतियों के लिए आवश्यक होते हैं और अक्सर ऐतिहासिक संस्कृतियों के डेटिंग (Dating) में भी मदद करते हैं। ट्रेस-तत्व (Trace-element) विश्लेषण, ज्यादातर न्यूट्रॉन (Neutron) सक्रियण द्वारा, मिट्टी के स्रोतों को सटीक रूप से पहचानने की अनुमति देता है और अंतिम तापन की तारीख का अनुमान प्रदान करने के लिए थर्मोल्यूमिनसेंस (Thermoluminescence) परीक्षण का उपयोग किया जा सकता है।
प्रागितिहास काल के मिट्टी के बर्तनों की जांच से वैज्ञानिकों ने जाना कि उच्च तापमान के तापन से मिट्टी में लोहे की सामग्री उस सटीक क्षण में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र की सटीक स्थिति को रिकॉर्ड (Record) करती है। मिट्टी के बर्तन पुरातत्वविदों के लिए विभिन्न समय काल का निर्धारण करने में सहायक सिद्ध होते हैं। पुरातत्व मनुष्य के जीवन काल के प्रारंभ तथा उसके द्वारा उपयोग में लायी गयी वस्तुओं के अवशेषों के अध्ययन से जुड़ा हुआ है। मानव विकास के विभिन्न पहलुओं की जानकारी पुरातत्व विज्ञान से ही हमें प्राप्त हुई है, जिसमें मिट्टी के बर्तनों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। मिट्टी के बर्तनों के अवशेष ये जानकारी देते हैं कि वह किस काल और संस्कृति से सम्बंधित है।
किसी भी पुरास्थल अन्वेषण के दौरान जब मिट्टी के बर्तनों के अवशेष पुरातत्वविदों को प्राप्त होते हैं तो वह उस अवशेष के आधार पर उस पुरास्थल की ऐतिहासिकता को सिद्ध कर देता है। पुरातत्वविद विभिन्न काल में बने मिट्टी के बर्तनों के प्रकार और विशिष्टताओं में अंतर कर पाते हैं। बिना किसी स्पष्ट सीमाओं के साथ पुरातत्वविदों के लिए मिट्टी के बर्तन मुख्य आधारों में से एक बन गए हैं।

संदर्भ:
https://archaeology.uiowa.edu/prehistoric-pottery-0
https://bit.ly/2LnDb7o
https://en.wikipedia.org/wiki/Pottery#Archaeology

चित्र सन्दर्भ:
मुख्य चित्र अपने मिट्टी के बर्तन के साथ एक कुम्हार, ब्रिटिश राज (1910)। (wikipedia)
दूसरा चित्र कुम्हार,1605।
तीसरा चित्र मीट्टी के बर्तनों का है।(Wikipedia)
चौथा चित्र 13 वीं शताब्दी के लोंग्क्वैन सेलाडोन के समूह का है।(Wikipedia)
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