क्या पहले भी जश्न मनाने के लिए उपयोग किया जाता था सफेद बारादरी का

लखनऊ

 22-09-2020 11:06 AM
वास्तुकला 1 वाह्य भवन

यदि कोई लखनऊवासी से यह पूछता है कि कैसरबाग के किसी स्थान पर एक शादी हो रही है, तो उनका सबसे पहला सवाल होता है कि "क्या यह सफ़ेद बारादरी में है?" शानदार सफेद संरचना के लिए प्रसिद्ध सफ़ेद बारादरी (यह इमारत सफेद रंग की है जिस कारण इसे सफेद या सफदर बारादरी कहा जाता है। बारादरी दो शब्दों से मिलकर बना है, बारह और द्वार, इस प्रकार बारादरी का अर्थ हुआ बारह द्वारों वाली इमारत।) एक ऐसा आकर्षण है, जो लखनऊ शहर के कैसरबाग क्षेत्र में अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के बीच स्थित है। कम ही लोग जानते हैं कि इन दिनों शादियों, त्योहारों और स्वागतों की मेजबानी करने वाला स्मारक वास्तव में नवाबों के समय में "शोक के महल" के रूप में बनाया गया था।

यह अवध के अंतिम नवाब, वाजिद अली शाह द्वारा कर्बला में इमाम हुसैन और उनके अनुयायियों की शहादत के लिए अजादारी (शोक) मनाने के लिए एक इमामबाड़ा के रूप में बनाया गया था। बारादरी के निर्माण की प्रक्रिया 1848 में शुरू हुई थी और 1850 तक चली थी। 1856 में अवध के विनाश के बाद, बारादरी का उपयोग अंग्रेजों द्वारा किया जाने लगा। 1923 के आसपास, सफ़ेद बारादरी को अवध के तालुकदारों के एक संघ को सौंप दिया गया, जिसे 'अंजुमन-ए-हिंद अवध' के नाम से जाना जाता है। अंततः इसे द ब्रिटिश इंडिया एसोसिएशन ऑफ अवध (The British India Association of Awadh) का नाम दिया गया और यह बारादरी आज भी उनके कब्जे और नियंत्रण में है। बारादरी के मुख्य कक्ष में संघ के संस्थापकों में बलरामपुर के महाराज, मान सिंह और दिग्विजय सिंह की दो संगमरमर की मूर्तियाँ हैं।
बारादरी नवाबी काल से लखनऊ की वास्तुकला का एक उल्लेखनीय हिस्सा है, ऐसी ही और अन्य बारादरी शहर में विभिन्न स्थानों पर उपस्थित हैं। बारादरी धनुषाकार उद्घाटन के साथ मंडप का रूप लेती है, भवन के चार किनारों में से प्रत्येक पर तीन उद्घाटन होते हैं। लखनऊ के कई बारादरी अच्छे आकार में हैं और आज भी उपयोग में बने हुए हैं, हालांकि उनका उपयोग उस मूल उद्देश्य के लिए नहीं किया जाता, जिसके लिए उन्हें बनाया था। सफ़ेद बारादरी पर वर्गाकार मण्डप है, जो महल परिसर के मध्य में बना है और इसमें विभिन्न आकारों के कई स्तम्भावली युक्त मंडप शामिल हैं। जिसके केंद्र में सफ़ेद बारादरी स्थित है, यह एक भव्य सफ़ेद पत्थर की इमारत है, जिसे पहले चांदी के साथ प्रशस्त किया गया था। इस संरचना में दो लक्खी द्वार और पूर्व शाही निवास भी बने हुए हैं।
साथ ही यह एक उभरे हुए मंच या चबूतरे पर मौजूद है। हालांकि इसमें सभी जगह से प्रवेश किया जा सकता है, लेकिन पूर्वी पक्ष मुख्य प्रवेश द्वार है और इसके सामने एक बड़ी छत है जिसमें बाड़ा के रूप में नक्काशीदार संगमरमर की पटल है। संरचना के शीर्ष पर कोनों में अष्टकोणीय मीनार हैं। सफ़ेद बारादरी का अंदरूनी हिस्सा महीन चूने, सुंदर धनुषाकार द्वार और जुड़वां स्तंभों वाली खिड़कियों से निर्मित किया गया है। छत से लटका हुआ झूमर अंदरूनी हिस्से को और भी अधिक आकर्षक बनाता है। सफ़ेद बारादरी के पूर्व में लक्खी दरवाजा या क़ैसरबाग़ गेट अवध में विकसित इंडो-यूरोपीय स्थापत्य शैली के सर्वश्रेष्ठ उदाहरणों में से एक है।

इसके निकट ही कई अन्य दर्शनीय इमारतें जैसे नवाब सआदत अली खां का मकबरा, बेगम हजरत महल पार्क एवं मकबरा, शाह नजफ़ इमामबाड़ा आदि भी हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के लखनऊ में कैसरबाग बारादरी की तस्वीर, 1880 के दशक में एक अज्ञात फोटोग्राफर द्वारा ली गई थी, जो कि आज आर्किटेक्चरल व्यू (Architectural Views) के बेलेव कलेक्शन (Bellew Collection) का हिस्सा है। यदि आपको सफ़ेद बारादरी की सैर करनी है तो इसके लिए आपको किसी भी प्रकार के प्रवेश शुल्क की आवश्यकता नहीं है। आप यहां आसानी से घूम सकते हैं तथा इसकी सुंदरता को अपने कैमरे में भी कैद कर सकते हैं।

संदर्भ :-
http://lucknow.me/Safed-Baradari.html
http://uttarpradesh.gov.in/en/details/baradari-qaiserbagh/37003600
https://en.wikipedia.org/wiki/Safed_Baradari
http://www.bl.uk/onlinegallery/onlineex/apac/photocoll/k/019pho0000050s2u00120000.html
http://double-dolphin.blogspot.com/2015/10/safed-baradari-lucknow.html

चित्र सन्दर्भ:

विलाप का महल 'और इसका नाम क़सर-उल-अज़ा रखा गया (wikimedia)
सफेद बारादरी (wikimedia)


RECENT POST

  • भारत में चुनावी प्रक्रिया एवं संयुक्त राज्य अमेरिका से इसकी तुलना
    आधुनिक राज्य: 1947 से अब तक

     01-12-2021 09:10 AM


  • अंग्रेजी शब्द कोष में Pyjama आया है हिंदी-उर्दू शब्द पायजामा से
    ध्वनि 2- भाषायें

     30-11-2021 10:37 AM


  • अवध के पूर्व राज्यपाल एलामा ताफज़ुल हुसैन के पारंपरिक भारतीय विज्ञान पर लेख व् पुस्तकें
    मध्यकाल 1450 ईस्वी से 1780 ईस्वी तक

     29-11-2021 09:06 AM


  • 1999 में युक्ता मुखी को मिस वर्ल्ड सौंदर्य प्रतियोगिता का ताज पहनाया गया
    द्रिश्य 3 कला व सौन्दर्य

     28-11-2021 01:04 PM


  • भारत में लोगों के कुल मिलाकर सबसे अधिक मित्र होते हैं, क्या है दोस्ती का तात्पर्य?
    विचार 2 दर्शनशास्त्र, गणित व दवा

     27-11-2021 10:17 AM


  • शीतकालीन खेलों के लिए भारत एक आदर्श स्थान है
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     26-11-2021 10:26 AM


  • प्राचीन भारत के बंदरगाह थे दुनिया के सबसे व्यस्त बंदरगाहों में से एक
    ठहरावः 2000 ईसापूर्व से 600 ईसापूर्व तक

     25-11-2021 09:43 AM


  • धार्मिक किवदंतियों से जुड़ा हुआ है लखनऊ के निकट बसा नैमिषारण्य वन
    छोटे राज्य 300 ईस्वी से 1000 ईस्वी तक

     24-11-2021 08:59 AM


  • कैसे हुआ सूटकेस का विकास ?
    य़ातायात और व्यायाम व व्यायामशाला

     23-11-2021 11:18 AM


  • गंगा-जमुनी लखनऊ के रहने वालों का जीवन और आपसी रिश्तों का सुंदर विवरण पढ़े इन लघु कहानियों में
    सिद्धान्त 2 व्यक्ति की पहचान

     22-11-2021 09:59 AM






  • © - 2017 All content on this website, such as text, graphics, logos, button icons, software, images and its selection, arrangement, presentation & overall design, is the property of Indoeuropeans India Pvt. Ltd. and protected by international copyright laws.

    login_user_id